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तराई का क्षेत्र वन्यजीवों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बना

हाथियों के बेशकीमती हाथी दांतों, बाघों और तेंदुओं की खालों और नाखूनों की तस्करी के चक्कर में वन्यजीव तस्कर इन वन्य जीवों को मार डालते हैं।
हाथी पर काबू पाने के लिए 50 से ज्यादा वन्य कर्मचारी जुटे हुए हैं। (Image Source: IE)

नैनीताल जिले में स्थित देश का सबसे बड़ा और सबसे पुराना जिम कॉर्बेट राष्टÑीय पार्क आज उत्तर प्रदेश की सीमा के तराई क्षेत्र की वजह से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जूझ रहा है। इस पार्क का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बरेली मंडलों के तराई क्षेत्रों से सटा हुआ है। यह तराई क्षेत्र जिम कॉर्बेट पार्क के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है।
जिम कॉर्बेट पार्क के हाथी, बाघ और तेंदुऐ भोजन की तलाश में कई बार उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे तराई क्षेत्र में घुस जाते हंै। जहां पर कई दफा बाघों, तेंदुओं और हाथियों का शिकार वन्यजीव तस्कर कर चुके हंै। हाथियों के बेशकीमती हाथी दांतों, बाघों और तेंदुओं की खालों और नाखूनों की तस्करी के चक्कर में वन्यजीव तस्कर इन वन्य जीवों को मार डालते हैं। उत्तराखंड के प्रमुख वन्यजीव प्रतिपालक एवं प्रमुख वन संरक्षक डीवीएस खाती का कहना है कि वे कई दफा उत्तर प्रदेश सरकार के सामने विरोध भी दर्ज करा चुके है, परंतु कोई फर्क नहीं पड़ा। जिम कॉर्बेट पार्क के हाथी और बाघ भोजन की तलाश में पार्क क्षेत्र से लगे काशीपुर, रामनगर, किच्छा तथा अन्य आबादी वाले क्षेत्रों में घुसकर उत्पात मचाते हैं। पार्क क्षेत्र के हाथी गन्ने और धान की फसल के समय पार्क से सटे खेतों की फसलें तबाह कर देते हैं। हाथियों को खेतों की तरफ जाने से रोकने के लिए वन विभाग ने तारबाड़ भी लगाई, परंतु वह भी काम नहीं आई।

इसी तरह नरभक्षी बाघों और तेंदुओं ने भी पार्क से सटे आबादी वाले क्षेत्रों में कोहराम मचाया हुआ है। किच्छा में खेतीबाड़ी करने वाले जीवन चन्द्र पंत का कहना है कि पार्क से जुड़े तराई क्षेत्र के किसान जंगली हाथियों, बाघों और तेंदुओं के कारण बेहद असुरक्षित हैं। जंगली हाथी आए दिन फसल तबाह कर देते हैं। वहीं बाघ और तेंदुऐ छोटे बच्चों को अपना निवाला बना लेते हैं। तराई क्षेत्र के पालतू कुत्तों को भी उठा ले जाते हैं। विवादों से भी नाता-कई विवादों से भी जिम कॉर्बेट राष्टÑीय पार्क का नाता रहा है। गैर सरकारी संगठन आॅपरेशन आई आॅफ द टाइगर इंडिया ने जिम कॉर्बेट पार्क में बाघों के शिकार को लेकर एक खुलासा किया है। इस संस्था के समन्वयक राजीव मेहता के मुताबिक पिछले साल 2016 के मार्च और मई के महीने में उत्तराखंड पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स ने छह बाघों की खालों के साथ एक वन्यजीव तस्कर रामचन्द्र को गिरफ्तार किया था। उसके पास से बरामद चार खालें जिम कॉर्बेट पार्क के बाघों की निकली थीं। मेहता का आरोप है कि इस घटना के बाद पार्क प्रशासन ने बाघों की संघन जांच पड़ताल और कैमरा ट्रैपिंग भी करवानी जरूरी नहीं समझी। मेहता का आरोप है कि अधिकारी इस घटना पर जानबूझ कर पर्दा डाल रहे हैंै। आॅपरेशन आई आॅफ द टाइगर इंडिया ने इस मामले की शिकायत उत्तराखंड के वन मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख वन संरक्षक तथा केंद्रीय वन मंत्रालय के उच्चाधिकारियों से भी की है। उत्तराखंड के प्रमुख वन सरंक्षक खाती का कहना है कि उन्होंने इस मामले में अपनी जांच रिपोर्ट सरकार और शासन को भेज दी है।

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