ताज़ा खबर
 

जनसंघ की पत्रिका में तिरंगे से हरा रंग हटाया, उसकी जगह भगवा दिखाया, अल्पसंख्यक की अवधारणा भी खत्म करने की मांग

जनसंघ टूडे पत्रिका के कवर पेज पर राष्ट्रीय ध्वज की फोटो छपी है, जिसमें से 'हरा' रंग हटाकर उसकी जगह 'केसरिया' रंग रखा गया है।
Author नई दिल्ली | October 6, 2016 10:44 am
जनसंघ की मासिक पत्रिका ‘जनसंघ टूडे’ के सितंबर के अंक में छपी कवर स्टोरी में अल्पसंख्यक अवधारणा को समाप्त करने की मांग की गई है। मैगजीन के कवर पर छपे तिरंगे में ‘हरा’ रंग की जगह केसरिया रंग दिखाया गया है। (Photo: Jana Sangh Today Website)

शायद भारतीय जनसंघ ऐसा सोच रहा है कि उसे अपनी मांगों को उठाने के लिए यह उपयुक्त समय है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार जनसंघ के अध्यक्ष रहे राजनीतिक विचारक पंडित दीन दयाल उपाध्याय का जन्मशती वर्ष मनाने जा रही है। 1980 में भारतीय जनता पार्टी को जन्म देने वाला जनसंघ पूरी तरह भंग नहीं हुआ तथा बहुत ही छोटे स्तर पर अस्तित्व में बना रहा। अब इसी जनसंघ ने सरकार से भारत के राष्ट्रीय ध्वज से ‘हरा’ रंग को निकालने की मांग की है। जनसंघ की मासिक पत्रिका ‘जनसंघ टूडे’ के सितंबर के अंक में एक कवर स्टोरी प्रकाशित हुई है। इस कवर स्टोरी का टाइटल है ‘अबॉलिश माइनॉरटी कॉन्सेप्ट’ (अल्पसंख्यक अवधारणा को खत्म करो)।

इस स्टोरी के साथ ही पत्रिका के कवर पेज पर राष्ट्रीय ध्वज की फोटो छपी है, जिसमें से ‘हरा’ रंग हटाकर उसकी जगह ‘केसरिया’ रंग रखा गया है। पत्रिका के संपादकीय में कहा गया है कि भारत में ‘असंख्यक अवधारणा’ की शुरूआत बंटवारे के बाद प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी। संपादकीय में आगे लिखा गया है कि नेहरू की देन ‘अल्संख्यक अवधावरणा’ ने देश को एक बार फिर बांटने का काम किया है। जनसंघ की पत्रिका ‘जनसंघ टूडे’ ने अपने संपादकीय में लिखा है, ‘सावधान हो जाइए और अल्पसंख्यक अवधारणा को खत्म कीजिए, क्योंकि सभी एक बराबर हैं।’

वीडियो: वायुसेना के अभ्यास के लिए पाकिस्तान ने बंद किया अपना एयरस्पेस

जनसंघ के बारे में संक्षिप्त विवरण: ‘भारतीय जनसंघ’ भारतीय जनता पार्टी का ही पुराना नाम है। इसकी शुरुआत श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में की गयी थी। इस पार्टी का चुनाव चिन्ह लैंप था और इसने 1952 के संसदीय चुनाव मे 2 सीटें हासिल की थी, जिसमें डाक्टर मुखर्जी स्वयं भी शामिल थे। भारतीय जनसंघ ने 1952 में 3.1 प्रतिशत वोट के साथ तीन सीट, 1957 में 5.9 प्रतिशत वोट के साथ चार सीट, 1962 में 6.4 प्रतिशत वोट के साथ 14 सीट और 1967 में 9.4 प्रतिशत वोट के साथ 35 सीट हासिल की।

Read Also: गुरमीत राम रहीम की फिल्म के प्रोमोशन में पहुंचे बीजेपी के दो नेता, बोले- बाबा में जादू है

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा (1975-1976) के दौरान आपातकाल लागू करने के बाद जनसंघ सहित भारत के अन्य कई राजनैतिक दलों का विलय कर एक नए दल ‘जनता पार्टी’ का गठन किया गया। जनता पार्टी 1980 में टूट गयी और ‘जनसंघ’ की विचारधारा के नेताओं नें भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। भारतीय जनता पार्टी 1998 से 2004 तक राष्ट्रीय प्रजातांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार की सबसे बड़ी पार्टी रही थी। 2014 के आम चुनाव में इसने अकेले अपने दम पर सरकार बनाने में सफलता प्राप्त की।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. A
    aamroo khan
    Oct 6, 2016 at 10:15 am
    पाकिस्तान ने भारत से दुश्मनी कर आज तक क्या उखाड़ लिया सिवा मुंह खाने के अलावा ! यही हाल संघीयों का है ! कुछ नही उखाड़ लाएगें ! मुंह पर ही खाएगें ! हां कुंठा जरुर ईनकी शांत होती है
    (0)(0)
    Reply
    1. S
      Sidheswar Misra
      Oct 6, 2016 at 9:31 am
      यह कोई नई स्टोरी नहीं है १९२५ से यह विचार नागपुर का है . जनसत्ता में विदेशी पत्रकार आ गए है क्या ?
      (0)(0)
      Reply
      सबरंग