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J&K: BJP के साथ सरकार बनाने के संकेत देकर फारूख ने लिया यू टर्न, उमर भी बोले- हम सत्‍ता के भूखे नहीं

फारुख अब्दुल्ला के बदले रुख के बाद राज्य में सरकार के गठन पर गतिविधियां और तेज हो गई हैं। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई।
Author श्रीनगर | January 17, 2016 20:41 pm
लालू यादव से गले मिलते जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला। (पीटीआई फाइल फोटो)

जम्म-कश्मीर में भाजपा के साथ सरकार बनाने के वास्ते चर्चा के लिए नेशनल कान्फ्रेंस की तरफ से रजामंदी जताने के पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बयान के एक दिन बाद उनके बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनकी पार्टी ‘‘सत्ता की भूखी नहीं है’’ और ‘‘विचारधारा के साथ समझौता’’ नहीं करेगी। उमर ने फेसबुक पर लिखा, ‘‘नेशनल कान्फ्रेंस सत्ता की भूखी नहीं है और ऐसी राजनीतिक सत्ता में उसकी रूचि नहीं है जो विचारधारात्मक समझौता कर के मिलती हो। हमने एक साल पहले भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना छोड़ दी थी और ऐसा करने की वजह नहीं बदली है।’’ वहीं, फारूख अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि उन्‍होंने भाजपा के साथ सरकार बनाने की बात नहीं कही थी।

बता दें कि फारुख अब्‍दुल्‍ला ने कहा था कि यदि ऐसा प्रस्ताव आता है तो नेशनल कांफ्रेंस कार्य-समिति की बैठक बुलाएगी और इस पर चर्चा करेगी। उनसे सवाल पूछा गया था कि अगर बीजेपी की ओर सरकार बनाने का प्रस्ताव मिलता है तो उनका क्या रुख क्‍या होगा? आपको बता दें कि विधानसभा में नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के 15 सदस्य हैं।

फारुख अब्दुल्ला के बदले रुख के बाद राज्य में सरकार के गठन पर गतिविधियां और तेज हो गई हैं। इसी बीच पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक बुलाई है। इसमें आगे के कदम और बीजेपी के साथ गठबंधन को जारी रखने या अलग जाने पर विचार विमर्श किया जाएगा। बैठक में पार्टी सांसदों, पूर्व मंत्रियों एवं पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है।

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के 7 जनवरी को निधन के बाद महबूबा मुफ्ती पहली बार पार्टी बैठक की औपचारिक रूप से अध्यक्षता करेंगी। पीडीपी और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार ने एक मार्च से सईद के निधन तक राज्य में शासन किया। चूंकि इस गठबंधन ने सरकार गठन का दावा नहीं किया, इसलिए 8 जनवरी को राज्य में राज्यपाल शासन लगा दिया गया।

गौरतलब है कि 87 सदस्‍यों वाली जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा में पीडीपी के 28, जबकि बीजेपी के 25 विधायक हैं। सरकार बनाने के लिए 44 सीटों की जरूरत है। वहीं, सीपीआई (एम)-1, कांग्रेस-12, एनसी-15, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (जेकेपीसी)-2, जम्मू-कश्मीर पीपुल ड्रेमोक्रेटिक (सेकुलर)-1 और 3 इंडिपेंडेंट हैं। महबूबा मुफ्ती अगर चाहें तो कांग्रेस और नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के साथ मिलकर सरकार बना सकती हैं। इन तीनों दलों की सीटें 55 हैं और बहुमत के लिए 44 सीटों की जरूरत है।

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