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पत्रकार जगेंद्र सिंह: पनवाड़ी से खबरची, फिर ‘फरार मुलजिम’

अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर आरोप थे। पोस्टर में उसे उगाही, ब्लैकमेल करने वाला अपराधी तत्व बताया गया था। इसमें कहा गया था कि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज […]
Author July 1, 2015 08:45 am
पोस्टर में चर्चा जगेंद्र सिंह की ‘रंगदारी’ की। पिछले साल यह पोस्टर लगाया गया था।

अगस्त 2014 में मध्य उत्तर प्रदेश के शहर शाहजहांपुर में एक रहस्यमय पोस्टर पर सबकी निगाह पड़ी थी। गहरे बैंगनी पृष्ठभूमि के इस ‘वांछित’ पोस्टर में कथित के बारे में गंभीर आरोप थे। पोस्टर में उसे उगाही, ब्लैकमेल करने वाला अपराधी तत्व बताया गया था। इसमें कहा गया था कि उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। पोस्टर में कहा गया कि लोग इस शातिर शख्स से सावधान रहें।

यह ‘वांछित’ जगेंद्र सिंह वही शख्स है जिसकी हत्या का आरोप अखिलेश सरकार के एक मंत्री पर है।हालांकि शुरुआती जांच में यह भी दावा किया गया है कि 1 जून को इस स्वतंत्र पत्रकार ने खुद को आग लगाकर जान दी थी। इस हत्या के बाद प्रदेश में पत्रकारों ने आंदोलन चलाया और आरोपित मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। जगेंद्र के परिजनों ने मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते हुए धरना भी दिया था। आखिरकार चौतरफा दबाव के बाद राज्य सरकार ने मृतक के घरवालों को 30 लाख रुपए देने का एलान किया था। साथ ही सरकार ने जगेंद्र के दो बेटों को नौकरी देने का वादा भी किया है।

लेकिन इस पोस्टर की हकीकत सामने लाकर कुछ लोग मृत पत्रकार की असली तस्वीर पेश करना चाहते हैं। ‘वांटेड’ जगेंद्र सिंह वाले इस पोस्टर में पत्रकार की तस्वीर भी दी गई है। पोस्टर में कहा गया है कि शाहजहांपुर की अदालत ने उसके खिलाफ गंभीर आरोपों के मद्देनजर गैर जमानती वारंट जारी किया था। पोस्टर में आरोप लगाए गए हैं, यह पत्रकार वसूली में लिप्त था और पुलिस को उसकी तलाश है। पोस्टर में यह चेतावनी दी गई है: यह ठगी / जालसाजी / अवैध वसूली करने का माहिर है…। पोस्टर के संदेश में लोगों से कहा गया कि इस शख्स से बचकर रहें। पुलिस ने जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की कि किसने इन पोस्टरों को लगवाया। लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल पाई।

पोस्टर में प्राथमिकी संख्या 786 / 14 उन सात आपराधिक मामलों में एक है, जो जगेंद्र के ेखिलाफ दर्ज हो चुके थे। इनमे से चार मामले 2010 से पहले दर्ज हुए हैं, जब पान की दुकान चलाने वाला जगेंद्र सिंह कथित तौर पर पत्रकार बन चुका था। वह अपने फेसबुक पेज शाहजहांपुर समाचार में खबरें देता था, इनमें से ज्यादातर खबरें विरोधियों पर लगे आरोपों से जुड़ी होती थीं। शाहजहांपुर से चालीस किलोमीटर दूर खटार गांव के वासी जगेंद्र ने 1989 में आइटीआइ करने के बाद अमरोहा में एक निजी फर्म में चार माह तक काम किया। लेकिन यहां उसका मन नहीं लगा और वह घर लौटकर एक चाय और पान की दुकान चलाने लगा। उसके ेपिता सुमेर सिंह के अनुसार जगेंद्र ने किराना की दुकान भी खोली थी।

सुमेर सिंह ने बताया कि 2008 में एक अपराधी से झगड़े में वह घायल हो गया था। उसने दुकान बंद कर दी और अमर उजाला में स्ट्रिंगर बन गया। 2010में वह स्वतंत्र भारत के ब्यूरो चीफ सरदार शर्मा के संपर्क में आ गया और शाहजहांपुर में संवाददाता की नौकरी मिल गई। शर्मा ने बताया कि जगेंद्र ने अपने परिवार को गांव में ही छोड़ रखा था। शाहजहांपुर में वह आवास विकास कालोनी स्थित अपने पिता के एक कमरे वाले फ्लैट में रहने लगा। यह वही घर है जहां उसने कथित तौर पर आग लगाकर जान दी थी।

शर्मा के अनुसार, उसने मेरे साथ दो साल तक काम किया। वह खबरों के जरिए निजी दुश्मनी निकालने की कोशिश करता था। उसकी खबरों के कारण हमें दो बार माफीनामा देना पड़ा। एक बार उसने पुलिस कर्मी पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली खबर छापी। लेकिन जिस महिला से बलात्कार का आरोप था, उसने खबर को गलत बताया।

शर्मा ने बताया कि नौकरी से हटने के बाद भी वह हर माह उनके पास आता था। उससे बचने के लिए मैं हजार रुपए देता था। अगले कुछ महीनों में जगेंद्र ने तीन और हिंदी अखबारों में कम किया। उसके छोटे बेटे राहुल ने ईटीवी, नवभारत की ओर से पिता के जारी पहचान पत्र दिखाए थे। सिंह की पत्नी सुमन ने बताया कि गर्ममिजाज होने के कारण उसका पति कहीं भी ज्यादा दिन तक काम नहीं कर पाया। लेकिन यह मालूम था कि वह महीने में 20-25 हजार तक कमा लेता है।
मिली जानकारी के अनुसार, 2013 के आसपास जगेंद्र ने अपने फेसबुक पेज पर खबरें देनी शुरू कीं। मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ उसने करीब 25 पोस्ट डालीं। सात मई और

एक जून के बीच इन्हें पोस्ट किया गया था। एक पोस्ट मे उसने वर्मा पर जमीन हथियाने, अपराधियों को प्रश्रय देने और महिलाओं से दुराचार जैसे आरोप लगाए थे। इन्हीं पोस्ट के बाद एक जून को पुलिस जगेंद्र से पूछताछ करने के लिए गई थी और यह घटना हो गई। शाहजहांपुर की जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना का कहना है कि जिला प्रशासन ने पत्रकार के फेसबुक पोस्ट को लेकर कोई जांच नहीं की।

सिंह के खिलाफ जो सात मामले दर्ज हैं, उनमें पहला 10 जुलाई 1991 को दर्ज हुआ था। उसके पड़ोसी कृष्णानंद राठौर की शिकायत पर खुटार थाने में यह मामला दर्ज हुआ था। राठौर ने आरोप लगाया था कि जगेंद्र उसके पिता सुमेर सिंह ने उसके घर में घुसकर लूटपाट की और जेवर, नगदी समेत काफी कीमती सामान ले गए। लेकिन पुलिस ने इस शिकायत को सही नहीं पाया और अगले दिन मामला बंद कर दिया गया।

दूसरा मामला खुटार के रामसागर ने दर्ज कराया। इसमें पिता-पुत्र पर हमले का आरोप लगाया गया था। लेकिन अगस्त 1997 में शाहजहांपुर की अदालत ने दोनों को दोषमुक्त कर दिया। 2001 और 2005 में जगेंद्र के खिलाफ दो मामले दर्ज हुए थे। स्थानीय अदालत ने एक मामले में उसे निर्दोष करार दिया जबकि दूसर मामला अदालत में लंबित है।

2014 के पोस्टर में जिस मामले का जिक्र है, वह शाहजहांपुर व्यापार संघ के अध्यक्ष सचिन बाथम की ओर से मई 2014 में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर है। इस शिकायत में जगेंद्र सिंह और सत्यपाल मिश्र पर धमकाने और वसूली करने के आरोप लगाए गए थे। मिश्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। लेकिन सिंह के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट तामील नहीं हो सका। इस साल शाहजहांपुर पुलिस ने सिंह के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया था। यह वही केस था, जिसके सिलसिले में पुलिस एक जून को उससे पूछताछ करने गई थी।

दस मई को पुलिस ने अमित प्रताप सिंह भदौरिया की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। उसने आरोप लगाया था कि जगेंद्र और दो अन्य लोगों ने उन पर हमला किया और आवास विकास कालोनी के पास से उन्हें अगवा कर लिया। बाद में यह केस बरेली तब्दील हो गया था। जगेंद्र के बेटे का आरोप है कि मंत्री वर्मा की शह पर उनके पिता के खिलाफ यह ममाला दर्ज कराया गया।

सूत्रों के अनुसार, जब जलने के बाद सिंह को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया उसके खिलाफ ‘आत्महत्या की कोशिश’ और ‘सरकारी कर्मचारी को काम से रोकने के लिए किए हमले’ का मामला दर्ज किया गया। 22 जून को सिंह के पिता सुमेर सिंह ने मंत्री के दो सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई कि वे उनके परिवार को धमकाकर केस वापस लेने का दबाव डाल रहे हैं।

बहरहाल एक दिन बाद मृतक के परिजनों ने खुटार गांव में अपना धरना समाप्त कर दिया। प्रशासन ने मामले पर कार्रवाई करने का भरोसा दिलाने के साथ पीड़ित परिवार को तीस लाख का चेक दिया था। जगेंद्र के बेटों को दो हथियारों के लाइसेंस देने के अलावा परिवार को पांच एकड़ जमीन दी गई है।

परिजनों से यह पूछने पर कि उन्होंने तो सीबीआइ जांच की मांग की थी, फिर अपना धरना क्यों खत्म कर दिया, इस पर दिवंगत पत्रकार के बेटे राजवेंद्र सिंह ने कहा कि धरने का मकसद इंसाफ की मांग करना था। मुख्यमंत्री ने वादा किया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

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