April 27, 2017

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गांधीजी की “नाइंसाफी” की वजह से सरदार पटेल नहीं बन पाए भारत के पहले प्रधानमंत्री?

आजादी के 69 सालों बाद भी ये बहस नहीं थमी है कि अगर जवाहरलाल नेहरू के बजाय सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री बने होते तो क्या होता?

नेहरू (दाएं) के साथ सरदार पटेल (Photo: Express Archive)

सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 में हुआ था। भारत के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को भारतीय रियासतों का विलय कराकर देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित किया जाने का  श्रेय दिया जाता है। लेकिन आजादी के 69 सालों बाद भी ये बहस नहीं थमी है कि अगर जवाहरलाल नेहरू के बजाय सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री बने होते तो क्या होता? इस सवाल का जवाब पाना संभव नहीं क्योंकि इतिहास में जो हो चुका है वो हो चुका है, जो नहीं हुआ है वो होता तो क्या होता इसका जवाब पाने का कोई तार्किक तरीका नहीं है। लेकिन पटेल के भारत के पहले पीएम बनने की अटकल हवाई नहीं बल्कि ठोस तथ्यों पर आधारित है। और ये मानने के ठोस आधार हैं कि अगर महात्मा गांधी ने नेहरू का अलोकतांत्रिक समर्थन न किया होता तो इतिहास कुछ और भी हो सकता था।

नेहरू की “रूमानी” छवि के उलट पटेल की छवि एक “व्यावहारिक” प्रशासक की थी। कांग्रेस पार्टी का व्यावहारिक कामकाज पटेल देखते थे। 1946 में ये साफ हो गया था कि भारत आजाद होने वाला है। और ये भी तय था कि 1946 में जो कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा वही देश का पहला प्रधानमंत्री होगा। 1946 के चुनाव में कांग्रेस को चुनाव में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं। लेकिन मुस्लिम इलाकों में मुस्लिम लीग को भारी जीत मिली थी। मौलाना अबुल कलाम आजाद 1940 से ही कांग्रेस के अध्यक्ष थे। भारत छोड़ो आंदोलन और दूसरे विश्व युद्ध जैसे कारणों से पिछले कई सालों से कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ था। 1946 में जब अध्यक्ष पद का चुनाव होने की बात शुरू हुई तो कलाम ने भी फिर से अध्यक्ष बनने की इच्छा जाहिर की। लेकिन गांधीजी ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किया।

वीडियो: पीएम नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल को दी श्रद्धांजलि-

ये सभी को मालूम था कि गांधीजी नेहरू को कांग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 29 अप्रैल 1946 थी। कांग्रेस अध्यक्ष का नामांकित कांग्रेस की 15 प्रादेशिक और क्षेत्रीय कमेटियों को करना था। नेहरू को गांधीजी का पूरा समर्थन है ये जानने के बाद भी किसी भी प्रादेशिक या क्षेत्रीय कमेटी ने नेहरू का नाम नामित नहीं किया। 15 में 12 कमेटियों ने सरदार पटेल का नाम नामित किया था। तीन कमेटियों ने किसी का भी नाम नामित नहीं किया था।

महात्मा गांधी ने इसे अपने लिए चुनौती माना। गांधीजी ही पहले भी कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के ऊपर अपनी मर्जी थोप चुके थे। 1939 में लोकतांत्रिक ढंग से चुने गए कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस की जीत को गांधीजी ने अपनी हार बताते हुए उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया था। 1946 में भी यही हुआ। गांधीजी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ऊपर अपनी मर्जी थोपी और पटेल को कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनने दिया। पटेल गांधीजी के आज्ञाकारी अनुयायी थे। इसलिए उन्होंने गांधीजी के फैसले को बगैर किसी शिकवा-शिकायत के स्वीकार कर लिया। ऐसे में क्या ये अनुमान लगाना गलत होगा कि अगर गांधीजी एक “नाइंसाफी” न करते तो सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री हो सकते थे? बहरहाल, पटेल भले ही पहले प्रधानमंत्री न बन सके हों लेकिन 15  दिसंबर 1950 को दुनिया से अलविदा कहने से पहले भारतीय रियासतों का विलय कराकर वो इतिहास में सदा के लिए अमर हो गए।

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First Published on October 31, 2016 3:29 pm

  1. D
    Devisahai Meena
    Nov 1, 2016 at 6:16 am
    बड़े शर्म की बात है क़ि देश को आज़ाद कराने वास्ते नेहरूजी ने अपनी 1/3 जिंदगानी अंग्रेजों क़ी जेल्स में बिताई और आज़ादी में कतई भाग नहीं लेने वाली जमात आज उनको बैन किये जाने वाले को हीरो समझने लगे हैं . . यह एक कुत्सित चाल है .. पटेल बिना गाँधी नेहरू के कैसे पूर्ण थे ? जो कांग्रेस ने पटेल को काम दिया उन्होंने किया अलग से कैसे करना हुवा ? २०१९ में इन सब का पटाक्षेप हो जायेगा संभवतः अन्यथा आतंरिक धर्म / जातीय कलह से भारत राष्ट्र टूट भी सकता हैं .
    Reply
    1. R
      raj kumar
      Oct 31, 2016 at 11:10 am
      ये तो भारत का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा की पहले प्रधानमंत्री पटेल नहीं बने अगर ऐसा होता तो शायद देश दो हिस्सों में नहीं बंटता और नासूर बनी कश्मीर की समस्या भी नहीं होती गांधीजी ने देश की आज़ादी का सिर्फ श्रेय लिया वरना आज़ादी के लिए कांग्रेस के अलावाऔर भी लोग थे पर गांधीजी और कांग्रेस दोनों ने देश को डुबोया ज्यादा है सुधारा काम है सुभाष चंद्र ी कहते थे की १० साल काम से काम तानाशाही होनी ही चाहिए जभी देश का उतना विकास होता जितना आज हुआ है मोदी जी से उम्मीद है की देश के लिए सख्त फैसले ले धन्यवाद
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      1. S
        shivshankar
        Oct 31, 2016 at 12:28 pm
        गांधीजी पटेल और नेहरू के गुरु थे उनहे मालूम था कुन सा शिष्य क्या काम कर सकता है इसी लिए hi जी ने नेहरू को चुना .पटेल ने कभी इस की कोई शिकायत नहीं की . !जिन गुजरातियो ने कभी गाँधी जी और पटेल का साथ नहीं दिया वोह आज कल पटेल के नाम से वोट मांग रहें हैं . पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबन्ध लगया था गुरु गोलवलकर को १९ महीने जेल मैं रखा था अगर पटेल और ज़िंदा रहते तो न जनसंघ को पैदा होने देते न ही बीजेपी पैदा होती
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        1. S
          Shrikant Sharma
          Nov 13, 2016 at 9:59 pm
          BAE
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          1. Z
            Zahid Siwani
            Nov 6, 2016 at 11:07 am
            पटेल को इतना अफसोस कभी नही हुआ प्रधानमंत्री न बनने का जितना आजकल के ढकोस्ले बाज लोगों हो रहा है । इसका मक़सद साफ दिख रहा है....जिस पटेल ने देश को जोड़ के रखा उसी के नाम पे ये लोग तोड़ना चाहते हैं पटेल का जो असल योगदान है जिसके वजह से पटेल जी हमारे Ideal हैं उसका मिट्टी पलीद कर रहे हैं और राजनीतिक फायदे के लिये पटेल के नाम का ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं
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