June 24, 2017

ताज़ा खबर
 

पश्चिम बंगाल में टीएमसी का ‘एकमात्र विकल्प’ बनने की राह पर है भाजपा? उप-चुनाव में हारकर भी दिया वामपंथियों को बड़ा झटका

पश्चिम बंगाल की कंठी दक्षिण विधान सभा सीट के लिए हुए उप-चुनाव में टीएमसी की प्रत्याशी और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को 95,369 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के सौरिंद्र मोहन जाना को हराया जिन्हें 42,526 वोट मिले।

Author April 14, 2017 10:34 am
चंद्रिमा को 95,369 वोटों से विजयी घोषित किया गया, जबकि बीजेपी के सौरिंद्र महन जाना को टीएमसी की इस प्रत्याशी ने 42,526 वोटों से पराजित किया है।

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कंठी दक्षिण विधान सभा उप-चुनाव में मिली जीत पर शायद ही किसी को ज्यादा हैरानी हुई हो। लोग हैरान हुए तो इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदर्शन से।  इस सीट पर पिछले साल हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा को केवल नौ प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन उप-चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत तीन गुना से ज्यादा बढ़कर करीब 31 प्रतिशत हो गया।

वहीं तृणमूल कांग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग उतना ही रहा। पिछले साल विधान सभा चुनाव में इस सीट से टीएमसी को 54 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि इस बार उसे 56 प्रतिशत वोट मिले। भाजपा को ये जीत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की कीमत पर मिली है। सीपीआई को इस सीट पर पिछली बार 31 प्रतिशत वोट मिले थे लेकिन इस बार केवल 10 प्रतिशत वोट उसे हासिल हो सके।

टीएमसी की प्रत्याशी और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को 95,369 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के सौरिंद्र मोहन जाना को हराया जिन्हें 42,526 वोट मिले। पिछले साल कंठी दक्षिण सीट से सीपीआई और कांग्रेस ने संयुक्त उम्मीदवार उतारा था। इस नतीजे के बाद भाजपा दावा कर रही है कि पश्चिम बंगाल में अब वह टीएमसी का “एकमात्र विकल्प” है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “इस नतीजे ने भाजपा के पश्चिमी बंगाल में मुख्य विपक्षी दल होने पर आधिकारिक मुहर लगा दी है।”

टीएमसी ने भाजपा के दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है। टीएमसी का वोट प्रतिशत बढ़ने की तरफ ध्यान दिलाते हुए विजयी उम्मीदवार चंद्रिका कहती हैं, “ये नतीजा उम्मीद के अनुरूप था क्योंकि तृणमूल और ममता बनर्जी का समर्थन लोगों में बढ़ा है।” अगले साल राज्य में पंचायत चुनाव होने वाले हैं। टीएमसी के लिए पंचायती चुनाव एसिड टेस्ट साबित होंगे। राज्य के सत्ताधारी दल और भाजपा दोनों के दावों की असल परीक्षा पंचायत चुनावों होगी। वाम दलों और कांग्रेस के सिकड़ते जनाधार का सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।

कंठी दक्षिण विधान सभा पर अधिकारी परिवार का दबदबा रहा है। पिछले साल इस सीट से टीएमसी के टिकट दिब्येंदु अधिकारी जीते थे जो बाद में सांसद बन गए। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी सांसद हैं और उनके भाई सुवेंदु अधिकारी राज्य के परिवहन मंत्री हैं। कंठी दक्षिण से 55 किलोमीटर दूर नंदीग्राम में लेफ्ट गठबंधन सरकार द्वारा गोली चलवाए जाने के बाद दिब्येंदु लेफ्ट छोड़कर टीएमसी में शामिल हो गये। उनके पिता शिशिर पहले कांग्रेस में थे।

इस इलाके में पहले कांग्रेस मजबूत थी। एक टीएमसी नेता कहते हैं, “कांग्रेस का इलाके में अभी भी जनाधार है लेकिन लेफ्ट की लोकप्रियता लगातार कम होती जा रही है। दुर्भाग्यवश लेफ्ट की कमजोरी की वजह से इलाके में भाजपा को पनपने का मौका मिल रहा है।”  अधिकारी से पहले सीपीएम के वरिष्ठ नेता लक्ष्मण सेठ यहां के प्रभावशाली नेता माने जाते थे। साल 2014 में सेठ को सीपीएम ने निकाल दिया तो वो भाजपा में चले गये। एक भाजपा नेता कहते हैं, “भाजपा ने अपने प्रचार में सेठ का सीधा इस्तेमाल नहीं किया लेकिन ये सच है कि इलाके में उनके कुछ समर्थक हैं।”

राज्य में भाजपा के विस्तार के पीछे एक और वजह है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और हिंदू संहति का राज्य में नेटवर्क भाजपा के लिए मददगार साबित हो रहा है। आरएसएस पश्चिम बंगाल में करीब 50 हजार स्कूल चलाता है। इनमें से बहुत सारे स्कूल पूर्वी मिदनापुर और पश्चिमी मिदनापुर जिलों में हैं।

वीडियो: 'सुदर्शन न्यूज' के संपादक गिरफ्तार; नफरत फैलाने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

First Published on April 14, 2017 9:53 am

  1. S
    Sidheswar Misra
    Apr 14, 2017 at 12:02 pm
    सम्रदायकता के कारण वोटो का धुर्वी करण में सीपीआई का वोट काम हुवा टिमसी का बढ़ा।
    Reply
    सबरंग