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16 साल तक भूख हड़ताल पर रही शर्मिला को दिया जाता था तीन टाइम ‘खाना’, पोषक तत्वों से होता था भरपूर

इरोम शर्मिला जिन्होंने मंगलवार (9 अगस्त) को शहद खाकर अपनी 16 साल से चल रही भूख हड़ताल तोड़ी है उन्हें पिछले 16 सालों से ही नेसल पाइप की मदद से पोषित आहार दिया जाता रहा था।
इरोम शर्मिला, मंगलवार को इंफाल में भूख हड़ताल तोड़ते वक्त। (Express Photo: Deepak Shijagurumayum)

इरोम शर्मीला जिन्होंने मंगलवार (9 अगस्त) को शहद खाकर अपनी 16 साल से चल रही भूख हड़ताल तोड़ी है उन्हें पिछले 16 सालों से ही नेसल पाइप की मदद से पोषित आहार दिया जाता रहा था। हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, मणिपुर सरकार इरोम पर हर महीने 10 हजार रुपए खर्च किया करती थी। यह खर्च 2011 के वक्त का है। जो 2016 में और बढ़ गया होगा। इन पैसों से इरोम को स्पेशल विटामिन और मिनिरल से भरपूर डाइट दी जाती थी। इसकी वजह से इरोम इतने लंबे वक्त तक भूखी रह सकीं। इंफाल में मौजूद जवाहर लाल नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल सांइस (JNIMS) के एक डॉक्टर ने कहा, ‘उन्हें उस तरीके के विटामिन और मिनिरल के भरपूर डाइट दी जा रही थी जैसी शायद भारत के सबसे अमीर आदमी की भी ना हो।’

इरोम का ख्याल रखने के लिए लगभग 40 लोग लगे रहते थे। इसमें JNIMS के 5 डॉक्टर, 12 नर्स, सिविल वर्दी में तीन पुलिसवाले शामिल थे। इन सबका काम यही देखना होता था कि इरोम को वक्त पर उस ट्यूब से पोषत तत्वों के इंजेक्शन दिए जाते रहें। दिन में तीन बार उनको सपलीमेंट दिया जाता था। उसमें कैलशियम, फैट, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन होते थे। इसके साथ ही यह भी ध्यान में रखा जाता था कि उनका वजन 51 किलो तक ही रहे। डॉक्टरों ने बताया कि वक्त-वक्त पर इरोम के तरह-तरह के टेस्ट भी हुआ करते थे। डॉक्टरों ने बताया कि वैसे को इरोम इन सब चीजों में साथ देती थीं लेकिन कभी-कभी जब वह गुस्सा हो जाती थीं तो सब करना बड़ा मुश्किल हो जाता था।

योगा से कर दिया था सबको इंप्रेस: पुलिसवाले और इरोम के साथ रहने वाले सभी उनकी योगा देखकर चौंक जाते थे। एक पुलिसवाले ने तो यह भी बताया कि इरोम 180 डिग्री तक टांगों को खोल सकती थीं और वह अपनी दो उंगलियों पर पुशअप्स कर लेती थीं।

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फिलहाल इरोम ने अपनी भूख हड़ताड खत्म कर ली है और उन्होंने कहा है कि वह चुनाव जीतकर मणिपुर की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं। इरोम ने 2 नवंबर 2000 को असम राइफल द्वारा दस मासूमों की जान लेने के बाद दुखी होकर भूख हड़ताल शुरू की थी।

 

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