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IRCTC से तत्काल टिकट बुक करने पर भी अब मिलेगी ‘पे ऑन डिलिवरी’ की सुविधा

IRCTC की pay on delivery की सर्विस अभी तक जनरल रिजर्वेशन के लिए उपलब्ध थी।
यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते, या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

तत्काल ट्रेन टिकट बुक कराने वालों को अब आईआरसीटीसी ने एक और सर्विस दे दी है। IRCTC से बुक किए गए टिकट पर ‘पे ऑन डिलीवरी’ की सुविधा देने वाली एंड्युरिल टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने बुधवार (3 अगस्त) को ऐलान किया कि अब यूजर तत्काल टिकट बुक करने के दौरान भी ‘बुक नाउ पे लेटर’ का ऑप्शन चुन सकते हैं। अब आईआरसीटीसी से तत्काल रेल टिकट बुक करने के बाद कैश और डेबिट या क्रेडिट कार्ड से बाद में भुगतान कर सकेंगे। पे ऑन डिलीवरी की सर्विस अभी तक जनरल रिजर्वेशन के लिए उपलब्ध थी। अब तत्काल बुकिंग के लिए इस सेवा को उपलब्ध करा दिया गया है। यह सर्विस उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है जो टिकट तो ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं लेकिन टिकट की पेमेंट ऑनलाइन नहीं करना चाहते या फिर ऑनलाइन टिकट बुक करने के बाद पेमेंट कैश में करना चाहते हैं।

ऐसे करता है तत्काल टिकट के लिए ‘पे ऑन डिलीवरी’ सिस्टम काम
इस सर्विस का फायदा उठाने के लिए यूजर को सबसे पहले irctc.payondelivery.co.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन करने के दौरान यूजर को अपने आधार कार्ड या पैन कार्ड की जानकारी देनी होगी।
इसके बाद जब आईआरसीटीसी पोर्टल पर तत्काल टिकट की बुकिंग करेंगे तो बुकिंग के दौरान यूजर को एंड्युरिल टेक्नोलॉजी के ‘pay-on-delivery’ ऑप्शन को चुनना होगा।

टिकट बुक होने के साथ ही टिकट को एसएमएस/ईमेल द्वारा डिजीटली डिलीवर कर दिया जाता है। इसमें सबसे खास बात यह है कि टिकट बुकिंग के 24 घंटे के अंदर-अंदर भुगतान करना होता है।
ग्राहक ऑनलाइन भुगतान भी कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें बुकिंग के समय एक पेमेंट लिंक भेजा जाता है।

आईआरसीटीसी के पे-ऑन-डिलिवरी (पीओडी) सिस्टम का एक और फायदा यह है कि यूजर को सिर्फ तभी भुगतान करना होगा जब टिकट बुक हो जाए। एंड्युरिल टेक्नोलॉजी देशभर के 4000 से ज्यादा पिनकोड पर यह सुविधा दे रही है। डिलीवरी से पहले टिकट कैंसिल करने पर ग्राहको को कैंसिलेशन और डिलीवर चार्ज देने होंगे। इन शुल्क को न देने की स्थिति में यूजर का अकाउंट डीएक्टिवेट करने और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

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