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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2017: 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल योगा डे, क्या है इसका इतिहास

International Yoga Day 2017: इंटरनेशनल योग दिवस का आइडिया सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी को ही आया था।
International Yoga Day 2017: इलाहबाद में योग करते बच्चे। (फोटो पीटीआई)

इंटरनेशनल योग दिवस का आइडिया सबसे पहले पीएम नरेंद्र मोदी को ही आया था। उन्होंने ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की मांग रखी थी। उन्होंने 27 सितंबर 2014 को UNGA में दिए गए भाषण में इसका जिक्र किया था। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को यूएनजीए में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक मुखर्जी ने मसौदा प्रस्ताव पेश किया। कुल 177 देशों ने इसपर सहमति जाहिर की। यह अपने आप में रिकॉर्ड था। भारत के अलावा बाकी देशों के नेताओं और अध्यात्मिक गुरुओं ने भी इसको सपोर्ट किया था। जिसमें ईशा फाउंडेशन के सदगुरु महाराज और आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रवि शंकर शामिल हैं।

मोदी ने भाषण देते हुए कहा था –
योग भारत की प्राचीन परंपरा का एक अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर की एकता का प्रतीक है। योग इंसान की सोच, काम करने का तरीका, संयम बरतना, मनुष्य और प्रकृति के बीच सद्भाव सिखाता है। यह सिर्फ कसरत नहीं है बल्कि दुनिया, प्रकृति आदि के बारे में भावनाएं पैदा करता है। हमारी जीवन शैली को बदलकर अच्छी तरह से काम करने में मदद कर सकता है। आइए हम एक अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को अपनाने की दिशा में काम करें।

21 को ही क्यों मनाया जाता योग दिवस है: मोदी ने ही 21 जून की तारीख को आगे बढ़ाया था। उन्होंने बताया था कि यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे लंबा और दक्षिणी गोलार्द्ध में सबसे छोटा होता है जिसका दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग महत्व है। शिव को पहला योगी (आदि योगी) बताया गया है। कहा जाता है कि उन्होंने इसी दिन से योग की शिक्षा लोगों को देना शुरू किया था। इसी दिन उनको पहला गुरु माना गया।

अबतक कहां-कहां हुआ – इंटरनेशनल योग दिवस 2015 को दिल्ली में राजपथ में मनाया गया था। पीएम मोदी ने राजपथ पर 35,985 लोगों के साथ योग किया था। इसके बाद इंटरनेशनल योग दिवस 2016 चंडीगढ़ में मनाया गया। वहां भी काफी लोग आए।

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