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बुद्धिजीवियों ने की अपील- धर्म-जाति से ऊपर उठकर बने भारतीए

भारतीयता को महत्व देने की जरूरत है क्योंकि इसी सोच से देश को विकसित और समृद्ध बनाया जा सकता है।
Author नई दिल्ली | July 17, 2016 14:48 pm
(file photo)

सोशल मीडिया के दौर में कई लोगों के धर्म और जाति के आधार पर राय बनाने और छींटाकशी करने की पृष्ठभूमि में देश के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवियों ने अपील की है कि लोगों को पंथ और जाति से ऊपर पहले भारतीयता को महत्व देने की जरूरत है क्योंकि इसी सोच से देश को विकसित और समृद्ध बनाया जा सकता है।

बीती शाम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘आॅल इंडिया कांफ्रेंस आॅफ इंटलेक्चुअल्स’ नामक संस्था की ओर से ‘यूपी रतन’ पुरस्कार प्रदान किए जाने के समारोह में पूर्व चुनाव आयुक्त जीवीजी कृष्णमूर्ति एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री भीष्म नारायण सिंह सहित कई बुद्धितीवियों ने विचार व्यक्त किए। कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘किसी भी देश में बुद्धिजीवियों की भूमिका बहुत अहम होती है। बुद्धिजीवी समुदाय देश और समाज को सही रास्ता दिखाने का काम करता है। हर दौर में बुद्धिजीवियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस देश में जो भी व्यक्ति रहता है कि वो पहले भारतीय है, इसके बाद वह हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई है। हम सभी लोगों को भारतीयता को महत्व देना चाहिए। इसी सोच से देश में विकास और खुशहाली आएगी।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री भीष्म नारायण सिंह ने कहा, ‘‘हमारे देश में सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक हमारा संविधान है जो सभी लोगों को जोड़ता है। हमारे देश के सभी लोग संविधान और देश के ध्वज में विश्वास रखते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि संविधान और लोकतंत्र में हमारी आस्था आगे और प्रगाढ़ होती जाएगी।’’
फिल्मकार शोएब हुसैन चौधरी ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया के दौर में कई बार ऐसा नजर आता है कि लोग धर्म और जाति के आधार पर बंट रहे हैं। ऐसे में बुद्धिजीवियों की भूमिका अहम हो जाती है कि वे लोगों का सही मार्गदर्शन करें। भारतीयता हम सभी लोगों की पहचान है और हमें इस पर गर्व करना चाहिए।’’
इस मौके पर शोएब हुसैन चौधरी, जानेमाने शायर पापुलर मेरठी और कुछ अन्य लोगों को ‘यूपी रतन’ पुरस्कार प्रदान किया गया।

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