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डोकलाम विवाद के बावजूद चीन से बढ़ा कारोबार, भारत ने मंगवाया 33% ज्‍यादा रकम का सामान

इस दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 5.5 प्रतिशत और युआन के मुकाबले 3.7 प्रतिशत मजबूत हुआ है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल)

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में चीन से आयात में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि करीब दो महीने से चीन और भारत के बीच सीमा विवाद जारी है। भारत द्वारा चीन से मंगाए जाने वाले सामान में इलेक्ट्रॉनिक सामान, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल्स  प्रमुख हैं। इस दौरान भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 5.5 प्रतिशत और युआन के मुकाबले 3.7 प्रतिशत मजबूत हुआ है। आर्थिक मामलों की संस्था क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि दोनों देशों के बीच जारी सीमा विवाद का असर दोनों देशों के आपसी कारोबार पर नहीं पड़ेगा। दोनों देशों के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब चीन ने भूटान की डोकलाम घाटी में सड़क बनानी शुरू कर दी। भारतीय सैनिकों ने उसे सड़क बनाने रोका क्योंकि ये इलाका भारत की सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील है। चीन ऐसी सड़क बना रहा था जिस पर से 40 टन वजन तक के सैन्य वाहन भी आसानी से आ-जा सकें।

चीन डोकलाम को अपना डोंगलॉन्ग इलाका बताता है। 16 जून को भारतीय सैनिकों द्वारा सड़क निर्माण से रोके जाने के बाद से ही चीनी मीडिया में बार-बार भारत को युद्ध की धमकी दी जा रही है। चीनी सेना और विदेश मंत्रालयों के प्रवक्ताओं ने भी भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए हैं। चीन की मांग है कि भारत डोकलाम से अपने सैनिक हटाए तभी दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर सार्थक बातचीत हो सकेगी। वहीं भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में कहा था कि भारत और चीन दोनों को एक साथ इलाके से सैनिक हटाने चाहिए। चीनी मीडिया ने भारत को 1962 के युद्ध का सबक याद रखने की बात कही गई। इस पर भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि भारत अब 1962 वाला नहीं है। बाद एक अन्य बयान में जेटली ने कहा कि चीन से 1962 में मिले सबक का नतीजा 1965 और 1971 में देखने को मिला था। 1965 और 1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में हराया था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत ने 18 अरब डॉलर (11 हजार करोड़ रुपये) का सामान चीन से आयात किया जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 13.5 अरब डॉलर (आठ हजार करोड़ रुपये) का सामान आयात किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार रुपये के मजबूत होने से भारतीय कारोबारी ज्यादा सामान का आयत कर रहे हैं। इस समय एक युआन का विनिमय मूल्य 9.61 रुपये है। भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि राजनीतिक और आर्थिक बाधाएं अलग-अलग होती हैं और घरेलू बाजार को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि नए रोजगार तैयार हों और आयात पर निर्भरता कम हो सके।

हालांकि भारत और चीन के बीच कारोबारी संतुलन का पलड़ा चीन की तरफ झुका है। भारत चीन से आयात ज्यादा मूल्य के सामान करता है और निर्यात कम। ये अंतर पिछले कुछ सालों में और बढ़ गया है। साल 2016-17 में ये अंतर 51.1 अरब डॉलर था, जबकि साल 2009-10 में ये अंतर केवल 19.26 अरब डॉलर था।

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  1. Shrikant Sharma
    Aug 14, 2017 at 6:50 pm
    विदेश मंत्रालय में कोर्रुप्त भ्रष्ठ चीन परास्त राजदूतों की नियुक्ति कर के जो भ्रष्ठ चार मचाय जा रहा है १९४७ के बाद से उसी का परिणाम है आज भारत हर उस सामन को जिसे वोह भारत में ही बना सकता है अपने दोष मन देश से बनवा कर बुला रहा है वोह भी ५० बिलियन डॉलर से भी ज्यादा हर साल?इतने डॉलरों में भारत अमरीका से उन्नत वॉर मचिनेस जैसे युद्धक विमान,कंप्यूटर चलितपहाडों पर चलने वाली तोपें,उन्नत बर्फीले मौसम में काम आने वाले सेना के जूते,कपडे,चश्में,वाटर बैग्स,कंपास,टेलीफोनिक सामान मोबाइल फ़ोन्स बुला सकता था और चीन से लगी सीमाओं पर रोड भी बना सकता है..विदेश मंत्रालय में तुरंत मोदी को परिवर्तन करके चीन के प्रति अपनी नीति बदलनी पड़ेगी भ्रष्ठ मन्त्रियुओं अफसरों को जेल भेजना होगा,जिन गद्दारों ने भारत को चीन का आर्थिक घुलम बनाने की पालिसी चालू राखी है उन्हें घोलिएयुओं से लाल किले पर उदा देना होगा वर्ण एक और ६२ इंतज़ार में है घटने के liye एक और नेहरू को चीनी खंजरों से उसके ५६िंच के सीने के बावजूद भारत पर आक्रमण की तैयारी के saath
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    1. Shrikant Sharma
      Aug 14, 2017 at 6:34 pm
      ५० बिलियन डॉलर्स से भी ज्यादा प्रेसियस विदेशी मुद्रा भारत चीन को हर साल दे रहा है उसका कचरा सामान,किसी भी वक़्त फ़ैल हो जाने वाली मचिनेस,कम्प्यूटर्स यहाँ तक की पावर प्लांट्स भी कोर्रुप्त कांग्रेस के शाशन के दौरान भारत में बुलाये -लगाए गए hain,अगर भारत चीन यौद्धा शुरू हुआ और चीन ने अपनी दी गयी मशीनों अय्यर कम्प्यूटरों को फाल्ट लाइन में ला कर ब्लैक आउट मचाया जैसा की वोह पाहिले ही टेस्ट कर के देख चूका है तो धोकेबाज राष्ट्रों से कोर्रुप्त विदेश मन्त्रियुओं के संबंधों के चलते एक और हादसा इस देश को झेलना पद सकता है.तब के हादसे ने नेहरू की जान ले ली थे वोह मोदी के ही सामान बहुत प्रतिभा शैली और पॉपुलर प्रधान मंत्री था भारत का.दुनिया में कोई भी राष्ट्र उस dushmanदग़ाबाज चीन से हर साल ५० बिलियन डॉलर से भी ज्यादा इम्पोर्ट करके अपने दुश्मन की ही मदद करता हो ऐसा उद्धरण नहीं है सुषमा स्वराज विदेश मंत्री और डोभाल के देश भक्त कार्य कलापों के बावजूद.जो भी सामान भारत चीन से आयत करता है वोह भारत में ही बनाया जा सकता है मोदी को वक़्त रहते इस विसंगति को दूर करना पड़ेगा ANYATHA चीन फिर khanjar भौंकेगा पीठ par
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      सबरंग