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गोमांस दावत के खिलाफ कश्मीर के विधायक के चेहरे पर पोती स्याही

गोमांस दावत के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक के चेहरे पर पेंट, स्याही और मोबील ऑयल पोत दिया..
Author नई दिल्ली | October 19, 2015 21:19 pm
जम्‍मू-कश्‍मीर विधानसभा के निर्दलीय विधायक अब्‍दुल राशिद के ऊपर सोमवार को नई दिल्‍ली के प्रेस क्‍लब में स्‍याही और मोबिल फेंका गया। (पीटीआई फोटो)

जम्मू कश्मीर के निर्दलीय विधायक शेख अब्दुल राशिद के एक संवाददाता सम्मेलन में सोमवार को यहां उस वक्त गुंडागर्दी देखने को मिली, जब कथित तौर पर एक दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने गोमांस दावत के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए विधायक के चेहरे पर पेंट, स्याही और मोबील ऑयल पोत दिया। इस महीने के शुरुआत में श्रीनगर में विधायक ने गोमांस दावत दी थी।

राशिद ने जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में दो ट्रक चालकों पर हुए हमले को लेकर संवाददाता सम्मेलन के लिए यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों को बुलाया था। ट्रक हमले के पीड़ितों में शामिल 19 वर्षीय जाहिद की रविवार सुबह सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई।

राशिद ने जैसे ही अपना संवाददाता सम्मेलन खत्म किया, उन्हें प्रेस क्लब के द्वार पर कुछ टीवी पत्रकारों ने एक-एक कर साक्षात्कार के लिए घेर लिया, तभी कुछ कार्यकर्ता ‘‘गौ माता का अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान’’ का नारा लगाते हुए उन पर झपट पड़े और उनके चेहरे पर काला रंग, मोबील ऑयल तथा नीली स्याही पोत दी।

कुछ टीवी पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के चेहरों और कपड़ों पर भी रंग लग गए, जब वे विधायक को भीड़ से बचाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में ले लिया और उन्हें संसद मार्ग थाना ले जाया गया जबकि राशिद को अतिरिक्त सुरक्षा बल के पहुंचने तक प्रेस क्लब में शरण लेनी पड़ी।

राशिद ने हमले के बाद कहा, ‘‘वे लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। मैं चाहता हूं कि पूरी दुनिया यह देखे कि ये लोग किस तरह से कश्मीरियों की आवाज दबाना चाहते हैं।’’गोमांस दावत की मेजबानी करने को लेकर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने उन्हें पीटा था।

घटना के चंद मिनटों के अंदर इसकी व्यापक निंदा हुई। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मुहम्मद सईद ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि एक के बाद एक ऐसी अप्रिय घटनाएं होना बहुत परेशान करने वाला है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि असिहष्णुता का यह वातावरण और हिंसा बहुत चिंताजनक है।

अब्दुल्ला ने ट्वीट किया, ‘‘इंजीनियर राशिद पर हमला अस्वीकार्य है और इसकी सख्त निंदा करते हैं। असिहष्णुता और हिंसा का यह वातावरण बहुत चिंताजनक है।’’

माकपा विधायक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि यह घटना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ‘‘यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है और स्वतंत्र रूप से बोलने के लोगों के मानवाधिकार का उल्लंघन है। हम किस ओर जा रहे हैं?’’

बाद में, पुलिसकर्मी राशिद को प्रेस क्लब के बाहर ले गए। वह अपने कुछ समर्थकों के साथ चाणक्यपुरी में जम्मू कश्मीर भवन के बाहर धरने पर बैठ गए और रेस कोर्स रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास जाने देने की इजाजत मांगने लगे।

राशिद ने श्रीनगर के एमएलए हॉस्टल में अपने द्वारा दी गई गोमांस की दावत के बारे में संवाददाता सम्मेलन में बोला था जिसके बाद आज की घटना हुई। लोगों की भावनाएं आहत करने के बारे में पूछे जाने पर राशिद ने संवाददाताओं को स्पष्टीकरण दिया, ‘‘मैं गोमांस, बकरे या मुर्गे का मांस नहीं खाता लेकिन वह अधिकारियों को यह बताने के लिए विरोध का एक तरीका है कि किसी के धर्म में दखलदंजी ना करें।’

उन्होंने उधमपुर घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माफी मांगे जाने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘‘यदि दादरी कांड को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है तो फिर भाजपा भी उधमपुर घटना के लिए अपनी सहयोगी पीडीपी के साथ समान रूप से जिम्मेदार है।

जाहिद और शौकत ट्रक में सो रहे थे तभी भीड़ ने उन पर पेट्रोल बम से हमला कर दिया था। उनके रिश्तेदारों ने आरोप लगाया है कि मुफ्ती मोहम्मद सईद सरकार उनके परिवार के लोगों को धमकी दे रही है कि वे मीडिया से बात नहीं करे।

जाहिद के परिजन मोहम्मद अशरफ ने अपने चेहरे पर कालिख पोते जाने के बाद कहा, ‘‘मुफ्ती सईद को इसकी कीमत चुकानी होगी। क्या भारत इसी लोकतंत्र की शेखी बघारता है। यह बदतर है।’’

अशरफ और राशिद के साथ मौजूद जाहिद के भाई मोहम्मद यूनुस ने कहा कि उसके परिवार को वहां पुलिस और प्रशासन धमकी दे रही है। उन्होंने कहा, ‘‘सईद ने मुझसे या मेरे परिवार से बात नहीं की। हमें पीआरओ अल्ताफ साहब से संपर्क करने को कहा गया। क्या अपने कश्मीरी साथियों की देखभाल करने का उनका यही तरीका है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुफ्ती साहेब को याद रखना चाहिए कि हमने उन्हें वोट दिया था ना कि भाजपा के राम माधव को।’’

28 वर्षीय यूनुस ने कहा कि उनका भाई अब भी अस्पताल में है। ‘‘डॉक्टर कुछ नहीं कह रहे। जब वे मेरे भाई को रोजाना की ड्रेसिंग में ले गए तब उन्होंने परिवार के सदस्यों को वार्ड से बाहर भेज दिया।’’

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