December 08, 2016

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… जब नोबेल जीतने वाले वैज्ञानिक एस चंद्रशेखर को इंदिरा गांधी ने दिया था टका सा जवाब और महफिल में छा गया था सन्‍नाटा

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने 31 अक्टूबर 1984 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर हत्या कर दी थी।

इंदिरा गांधी तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के असामयिक निधन के बाद 1966 में पहली बार प्रधानमंत्री बनी थीं।

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने 31 अक्टूबर 1984 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। 19 नवंबर 1917 में जन्मीं इंदिरा का अक्सर राजनीतिक जानकार भारत का अब तक का सबसे “मजबूत” प्रधानमंत्री मानते हैं। इसे इंदिरा का प्रभाव ही कहा जा सकता है कि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रवैये की तुलना उनके पूर्ववर्ती किसी पुरुष प्रधानमंत्री से नहीं बल्कि इंदिरा गांधी से की गई। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने उन्हें इंदिरा की तरह “मजबूत” नेता बताया। भारत के पहले प्रधानमंत्री और अपने पिता जवाहरलाल नेहरू से इंदिरा को विरासत में केवल प्रधानमंत्री की कुर्सी ही नहीं बल्कि साहित्य, कला और विज्ञान को सराहने और बढ़ाने का नजरिया भी मिला था। इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व के इस पहलू का अच्छा परिचय नोबेल विजेता वैज्ञानिक सुब्रमण्यम चंद्रशेखर के संस्मरण से मिलता है।

एस चंद्रशेखर 1930 में उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए। पढ़ाई के बाद उन्हें अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी में नौकरी मिल गई और वो वहीं के होकर रह गए। एस चंद्रशेखर ने इंदिरा गांधी से अपनी मुलाकातों का जिक्र अपने संस्मरण में किया है। राधिका रामनाथ द्वारा संपादित “एस चंद्रशेखर मैन ऑफ साइंसेज” में शामिल इस संस्मरण के अनुसार एस चंद्रशेखर और इंदिरा गांधी की पहली मुलाकात उस समय हुई जब जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद इंदिरा गांधी को लाल बहादुर शास्त्री के मंत्रिमंडल में सूचना प्रसारण मंत्री के तौर पर शामिल किया जा चुका था। इंदिरा गांधी अमेरिका दौरे पर थीं। उनके पुराने दोस्त प्रोफेसर थियोडोर डब्ल्यू शुल्ज ने उनके लिए शिकागो यूनिवर्सिटी में एक छोटा सी दावत रखी। वहां इंदिरा को अकेले देख चंद्रशेखर उनसे मिलने पहुंचे। उन्होंने इंदिरा से कहा, “अब तो चीजें काफी बदल गई होंगी?” इंदिरा ने बस इतना कहा, “हां, ये तो है।” इतना कहकर इंदिरा ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया।

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चंद्रशेखर की इंदिरा गांधी से दूसरी मुलाकात 1968 में हुई। चंद्रशेखर को दूसरा नेहरू मेमोरियल लेक्चर देने के लिए आमंत्रित किया गया था। जब चंद्रशेखर लेक्चर देने के लिए मंच के पीछे इंतजार कर रहे थे तभी इंदिरा गांधी वहां पहुंची। चंद्रशेखर के अनुसार इंदिरा काफी थकी-मांदी दिख रही थीं। वो सीधे लोक सभा से वहां पहुंची थीं। चंद्रशेखर को देखते ही इंदिरा ने कहा, “आपको अंदाजा भी नहीं होगा कि इस देश में कुछ सकारात्मक करना कितना मुश्किल है, हर कोई आलोचना और गलती निकालने में लगा है, लेकिन अभी ढेर सारा काम करना बाकी है।” चंद्रशेखर इंदिरा की बात को कोई जवाब दे पाते इससे पहले ही तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन वहां आ गए और सभी लोग उनके पीछे सभागार में चले गए। चंद्रशेखर के अनुसार इंदिरा ने बगैर किसी नोट या चिट के सभा में उनका शानदार अभिवादन किया था।

उसी शाम इंदिरा गांधी ने अपने घर पर एक दावत दी थी। चंद्रशेखर के अनुसार इंदिरा गांधी थोड़ी देरी से डिनर में पहुंची। वो अभी भी तनावग्रस्त नजर आ रही थीं। वो घर पहुंचने पर सीधे मेहमानों के पास ही पहुंच गईं। उनके वहां पहुंचते ही चंद्रशेखर ने उनके बैठने के लिए कुर्सी बढ़ाई। लेकिन इंदिरा ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि “मेरी मदद न करें, मुझे मदद की आदत नहीं है।” इंदिरा गांधी का खरा जवाब सुनकर वहां मौजूद सज्जनों के बीच थोड़ी देर के लिए सन्नाटा खिंच गया।

चंद्रशेखर की इंदिरा गांधी से तीसरी मुलाकात फरवरी 1982 में हुई थी। चंद्रशेखर और उनकी पत्नी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात का समय मांगा जो उन्हें मिल गया। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने इंदिरा से पूछा कि क्या भारत में 1920 और 1930 के दशक का गर्व और आशावाद अब नहीं बचा है। इंदिरा ने दुखी स्वर में उन्हें जवाब दिया, “मुझे डर है कि ऐसा ही है। राष्ट्रीय गर्व अब राष्ट्रीय संपदा नहीं रहा, इनकी जगह आलोचना और अविश्वास इस समय राष्ट्रीय शौक बन गए प्रतीत होते हैं।” इंदिरा से बातचीत के दौरान चंद्रशेखर ने उनसे आखिरी सवाल पूछा, “क्या आप भारत के भविष्य को लेकर आशावान हैं?” इंदिरा ने तुरंत जवाब दिया, “आशावान न होने की सुविधा मेरे पास नहीं है।”

एस चंद्रशेखर को 1983 में खगोलविज्ञान में उनके योगदान के लिए संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनका निधन 84 साल की उम्र में 1995 में अमेरिका में हुआ। उनके बाद अभी तक किसी भारतीय या भारती मूल के वैज्ञानिक ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार नहीं जीता है।

एस चंद्रशेखर एस चंद्रशेखर को 1983 में संयुक्त रूप से भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। (तस्वीरः केंद्रीय विद्यालय, मदुरै से साभार)

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First Published on October 31, 2016 11:48 am

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