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रक्षा मंत्रालय और आंध्र प्रदेश सरकार के विवाद के कारण कबाड़ में बिक सकता है 58 साल पुराना आईएनएस विराट

इस जहाज ने 27 साल तक रॉयल ब्रिटिश आर्मी में अपनी सेवाएं दी थीं, इसके बाद इसे 1987 में भारतीय नेवी में शामिल कर लिया गया।
INS Virat की फाइल फोटो (PIB)

3 दशकों तक भारतीय नेवी में सेवा देने वाले देश के सबसे पुराने जहाज आईएनएस विराट पर कबाड़ में बिक जाने का खतरा मंडरा रहा है। यूं तो इस 58 साल पुराने जंगी जहाज की रिटायरमेंट की तारीख 6 मार्च तय की गई है, लेकिन अब तक इसे एक म्यूजियम में तब्दील करने का प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया है। टाइम्स अॉफ इंडिया ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि इस 27,800 टन वजन वाले जंगी जहाज को मजबूरन कबाड़ में बेचना पड़ सकता है। इस जहाज ने 27 साल तक रॉयल ब्रिटिश आर्मी में अपनी सेवाएं दी थीं, इसके बाद इसे 1987 में भारतीय नेवी में शामिल कर लिया गया। कबाड़ में बेचे जाने की एक वजह आंध्र प्रदेश सरकार और केंद्र के बीच इस बात का विवाद है कि इसे म्यूजियम में तब्दील करने का पैसा कौन देगा।

बता दें कि 13 मंजिल वाले आईएनएस विराट को म्यूजियम में तब्दील करने में ही 1000 करोड़ का खर्च आएगा। आंध्र प्रदेश सरकार इस बेड़े को लेना चाहती है, लेकिन उसकी मांग है कि इसका आधा खर्च रक्षा मंत्रालय दे। वहीं रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वह इसके लिए सलाह और टेक्निकल मदद मुहैया करा सकता है, लेकिन प्रोजेक्ट पर मोटा पैसा खर्च नहीं कर सकता। काफी देरी के बाद 6 मार्च को मुंबई में इस जंगी जहाज को रिटायर कर दिया जाएगा।

नेवी 5 लाख नॉटिकल मील (करीब 9 लाख 30 हजार किमी) का सफर कर चुके आईएनएस विराट के समृद्धशाली इतिहास को संजो कर रखने के मूड में है। वह नहीं चाहती कि इस हश्र वही हो जो भारत के पहले एयरक्राफ्ट करियर आईएनएस विक्रांत के साथ हुआ था। बता दें कि आईएनएस विक्रांत का लोहा अॉटो कंपनी बजाज ने खरीद लिया था। इसके बाद उसने इसके लोहे से बजाज वी15 बाइक बनाई थी।

नेवी फिलहाल आईएनएस विराट के डेक से ऑपरेट होने वाले 11 सी हैरिअर जंप जेट्स को देश भर में स्थित विभिन्न रक्षा प्रतिष्ठानों में बतौर प्रतीक स्थापित करने की तैयारी कर रही है। जंप जेट्स वे फाइटर जेट्स होते हैं, जो बिना रनवे के वर्टिकल टेकऑफ या छोटे रनवे पर टेकऑफ में सक्षम होते हैं।

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