December 05, 2016

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‘पेरिस थिएटर में हमले के दोषियों को जानता था आईएस का संदिग्ध भारतीय सदस्य मोइदीन’

मोइदीन आठ अप्रैल 2015 से इराक में था, जहां उसे मोसुल ले जाया गया। इसके बाद उसे धार्मिक प्रशिक्षण और फिर लड़ाकू प्रशिक्षण दिया गया।

Author नई दिल्ली | October 23, 2016 19:26 pm
केरल के कोच्चि में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से संपर्क के संबंध में गिरफ्तार छह संदिग्धों को कोर्ट ले जाती एनआईए। (पीटीआई फोटो/3 अक्टूबर, 2016/फाइल)

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की छानबीन में पता चला है कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का संदिग्ध सदस्य और भारतीय नागरिक सुबहानी हजा मोइदीन पिछले साल नवंबर में पेरिस के एक थिएटर में हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को जानता था, लेकिन उसने ऐसा दिखावा किया कि उसे इस वारदात के बारे में कुछ पता ही नहीं था। इस हमले में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्य पुलिस बलों की मदद से एनआईए द्वारा की गई कार्रवाई में मोइदीन को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया था। मोइदीन को गिरफ्तार कर एनआईए ने केरल के कुछ जजों और इस तटीय राज्य की सैर पर आने वाले विदेशी सैलानियों को निशाना बनाने की आईएसआईएस की साजिश नाकाम कर दी थी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के तिरूनेलवेली से गिरफ्तार किए गए मोइदीन में सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी भावनाएं भरी गईं और फिर उसकी भर्ती की गई। ‘उमरा’ करने का बहाना बना कर वह पिछले साल अप्रैल में चेन्नई से तुर्की के इस्तांबुल चला गया था। इस्तांबुल पहुंचने के बाद वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए कुछ लोगों के साथ इराक के उस इलाके में चला गया जहां आईएसआईएस का नियंत्रण था। सूत्रों ने बताया कि इसी अवधि में मोइदीन ने पेरिस हमले के हमलावरों से मुलाकात की, जिसमें अब्दुलहमीद अबाउद और सालह अब्दुस्सलाम शामिल थे।

पिछले साल नवंबर में पेरिस के थिएटर में हुए हमले के दौरान जवाबी फायरिंग में अबाउच्च्द मारा गया था जबकि अब्दुस्सलाम फ्रासं पुलिस की गिरफ्त में है। सूत्रों ने बताया कि मोइदीन नवंबर में भारत लौट आया था और उसने कहा कि उसे पेरिस हमले के बारे में मीडिया में आई खबरों से पता चला। उसने इराक और सीरिया में आईएसआईएस के नियंत्रण वाले इलाकों में आरोपियों से मिलने की भी बात बताई। सूत्रों ने बताया कि एनआईए ने फ्रांस के सुरक्षा अधिकारियों को सूचित किया है और यहां फ्रांसीसी दूतावास से संपर्क किया है। जांच में किसी तरह की मदद मिलने की उम्मीद से उन्हें सूचित किया गया है। उन्होंने कहा कि अदालत का उचित आदेश मिलने पर फ्रांसीसी अधिकारी मोइदीन से पूछताछ भी कर सकते हैं।

फ्रांस में हुए आतंकवादी हमलों की कई देशों की ओर से की जा रही छानबीन के मुताबिक, हमले में शामिल आतंकवादी उस वक्त आईएसआईएस के नियंत्रण वाले इलाकों में ही मौजूद थे जब 31 साल का मोइदीन वहां था। मोइदीन आठ अप्रैल 2015 से इराक में था, जहां उसे मोसुल ले जाया गया। इसके बाद उसे धार्मिक प्रशिक्षण और फिर लड़ाकू प्रशिक्षण दिया गया जिसमें स्वचालित हथियारों को चलाने का प्रशिक्षण भी शामिल था। इसके बाद उसे करीब दो हफ्ते के लिए युद्ध लड़ने के लिए तैनात किया गया। उसने जांच अधिकारियों को बताया कि युद्ध के दौरान आईएसआईएस ने उसे हर महीने भत्ते के तौर पर 100 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया और इसके अलावा रहने एवं खाने की सुविधा मुहैया कराई।

बहरहाल, मोइदीन ने जांच अधिकारियों को बताया कि वह मोसुल में हिंसा और मुश्किल हालात नहीं झेल सका और जब अपने दो दोस्तों को जलकर मरते देखा तो वहां से रवाना होने का फैसला किया। आईएसआईएस ने मोइदीन को जेल में बंद कर दिया था और एक इस्लामी जज के सामने पेश किया जिसने उसे सीरिया भेज दिया। उसने दावा किया कि उसे तुर्की जाने दिया गया जहां से उसने इस्तांबुल स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की मदद से अपने परिवार से संपर्क साधा। वह छह महीने बाद एक आपातकालीन प्रमाण-पत्र पर पिछले साल सितंबर में मुंबई पहुंचा और अपने पैतृक स्थान चला गया और पत्नी के साथ रहने लगा । बाद में तमिलनाडु के कदयानल्लूर में वह एक आभूषण की दुकान पर नौकरी करने लगा।

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First Published on October 23, 2016 7:26 pm

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