June 26, 2017

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भारत की अर्थव्‍यवस्‍था 7 फीसदी की दर से बढ़ी, मगर नौकरियों में 1 फीसद बढ़ोत्‍तरी ही कर सकी नरेंद्र मोदी सरकार

नए रोजगार तैयार होने की दर पिछले आठ सालों के न्यूनतम स्तर पर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Photo: PTI)

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। बीते साल भारत की अर्थव्यवस्था 7 फीसद की दर पर रही लेकिन नौकरी के क्षेत्र में स्थिति खराब रही। लेबर ब्यूरो के सर्वे के मुताबिक बीते साल नौकरियों में सिर्फ 1.1% की दर से बढ़ोतरी हुई। लेबर ब्यूरो ने अपन सर्वे में यह दावा किया है। इसके मुताबिक जॉब ग्रोथ को ट्रैक करने के लिए हर तिमाही में लगभग 10 हजार लोगों को वहीं सालाना 7.8 लाख लोगों को सर्वे में शामिल किया गया। सर्वे अप्रेल 2016 की तिमाही में शुरू किया गया था। वहीं सर्वे में एक्सपोर्ट सेक्टर्स को भी कवर किया गया था। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक कई और चिंताजनक बातें सामने आई हैं।

इंडस्ट्रीज का सकल क्रेडिट बीते तीन सालों में बढ़कर 6.7 फीदस का हो गया है, जबकि इसकी तुलना में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन अच्छी स्थिति में नहीं रहा। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स की बात करें तो सकल सकल स्थिर पूंजी निर्माण इस साल जनवरी महीने में महज 0.6 फीसद रह गया जो बीते साल 6.1 फीसद पर था। वहीं नौकरी की बात करें तो तिमाही सर्वे में निर्माण, विनिर्माण, कारोबार, ट्रांस्पोर्ट, रेस्तरां, IT/BPO और स्वास्थ्य एंव शिक्षा आदि क्षेत्रों में मजह 2.3 लाख नौकरियां पैदा हुईं। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में लगभग 1 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। वहीं इससे पहले भी एक रिपोर्ट में 2015 में बीते 5 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर 5 फीसद होने का दावा किया गया था।

गौरतलब हैं हाल ही में नौकरियों पर लटकी तलवार को लेकर भी कई खबरें सामने आई हैं। आईटी सेक्टर की नौकरियों में भी छंटनी होने या छंटनी पर विचार करने को लेकर कई खबरें सामने आई हैं। विप्रो, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और कॉग्निजेंट जैसी 7 बड़ी आईटी कंपनियां भारत में काम कर रहीं हैं। एक अंग्रेजी अखबार मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी कंपनियों ने छंटनी के लिए पहले ही जमीन तैयार कर ली है। वहीं केंद्रीय श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले आठ सालों में साल 2015 और साल 2016 में क्रमशः 1.55 लाख और 2.31 लाख नई नौकरियां तैयार हुईं। जबकि मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में साल 2009 में 10 लाख नई नौकरियां तैयार हुई थीं। नए रोजगार तैयार होने की दर पिछले आठ सालों के न्यूनतम स्तर पर है।

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First Published on May 20, 2017 3:17 pm

  1. M
    manish agrawal
    May 20, 2017 at 7:04 pm
    Modi Govt 2014 se hi baraabar Elections main lagi huyi hai kabhi Biha ,kabhi Delhi, kabhi U.P., Punjab, Manipur, Goa aur Uttarakhand ke Elections ! kabhi Odisha ke Local Bodies Elections hain to kabhi MCD Elections ! kabhi Maharashtra main Muni l Corporations Elections! abhi 2017 main Gujrat ke Elections hone hain! phir South India,West Bengal, Kerela jese non-BJP states main sangathan ko majboot karna hai !President of India ka Election bhi 2017 main hi hona hai ! BJP ke paas ek hi Star Campaigner hain aur wo hain Narendra Modiji ! aisy haalat main Govt ko "Job Creations" jese issues par focus karne ki fursat kahan hai ? phir "Tripple Talaq" ka issue hai , stan aur China se ek saath WAR karne ki possibilities bhi explore karni hain, BSF Jawan TejbahadurYadav ko conspiracy karke barkhast bhi karna thaa! Manniya Lalkrishna Advaniji, Murlimanohar Joshiji jese BJP ke founder leaders ko haashiye par bhi daalnaa thaa ! in sabse fursat milegi tabhi to JOB CREATION ki baari aayegi !
    Reply
    1. S
      Sidheswar Misra
      May 20, 2017 at 4:41 pm
      श्रम ब्यरो के आंकड़े भ्रमित है गाय रच्छा ,रोमियो ब्रिगेड ,वाहनी में जो नौकरी मिली है उसे नहीं जोड़ा। इसमें तत्काल आमदनी होती है। पांच साल में कितने करोड़ पति हो जाये गे।
      Reply
      सबरंग