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4 दशक का इंतजार बेकार? वायु सेना ने कहा- भारत के आसमान की हिफाजत करने में सक्षम नहीं तेजस

वायु सेना के मुताबिक, संघर्ष की स्थिति में तेजस सिर्फ 59 मिनट तक मैदान में डटे रह सकता है जबकि ग्रीपेन तीन घंटे और एफ-16 करीब चार घंटे तक संघर्ष कर सकता है।
तेजस का विकास ‘हल्का युद्धक विमान’ या (एलसीए) नामक कार्यक्रम के अन्तर्गत हुआ है जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था।

भारतीय वायु सेना ने सरकार से कहा है कि स्वदेश निर्मित हल्का लड़ाकू विमान तेजस अब भारतीय आसमान की सुरक्षा करने में नाकाम है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया है कि वायु सेना का यह जवाब तब आया है, जब रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना से सिंगल इंजन वाले लड़ाकू विमान के अधिग्रहण की योजना को खारिज करने को कहा था। मंत्रालय को दिए जवाब में वायु सेना ने लिखा है कि तेजस लड़ाकू विमान स्वीडिश एयरोस्पेस कंपनी साब द्वारा निर्मित लड़ाकू विमान JAS 39 ग्रीपेन और अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन निर्मित F-16 की तुलना में काफी पीछे है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने ही यह फर्क समझते हुए इस मुद्दे को उठाया था जिसके बाद सरकार की तरफ से वायु सेना को कहा गया था कि विदेश निर्मित सिंगल इंजन के लड़ाकू विमान को बेड़े में शामिल करने की योजना खारिज कर सिर्फ स्वदेश निर्मित सिंगल इंजन वाले लड़ाकू विमान को शामिल किया जाय। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में वायु सेना ने सरकार के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया है जिसमें यह बताया गया है कि तेजस कैसे अकेले भारतीय आसमान की हिफाजत नहीं कर सकता है।

वायु सेना के मुताबिक, संघर्ष की स्थिति में तेजस सिर्फ 59 मिनट तक मैदान में डटे रह सकता है जबकि ग्रीपेन तीन घंटे और एफ-16 करीब चार घंटे तक संघर्ष कर सकता है। इसके अलावा तेजस सिर्फ तीन टन का भार ढो सकता है जबकि ग्रीपेन छह टन और एफ-16 सात टन का भार ढोने में सक्षम है। यानी किसी निशाने पर 36 बम गिराने के लिए छह तेजस की जरूरत पड़ेगी जबकि ग्रीपेन और एफ-16 की तीन इकाई ही इस काम को अंजाम तक पहुंचा सकती है। इसके अलावा तेजस का रख-रखाव भी उन दोनों की तुलना में काफी महंगा है। सूत्रों के मुताबिक, तेजस 20 साल तक कारगर रह सकता है जबकि वे दोनों विमान 40 साल तक अच्छे से काम कर सकते हैं। कुछ मामलों में तो रूसी मिग-21 भी तेजस से अच्छा है।

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बता दें कि इसी साल जनवरी में नौसेना ने भी स्वदेश निर्मित हल्‍के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ को काफी भारी बताते हुए खारिज कर दिया था और नौसेना के विमान वाहक पोत के लिए 57 बहुद्देश्यीय लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर सूचनाएं मंगाई थीं। तेजस भारत द्वारा विकसित किया जा रहा एक हल्का व कई तरह की भूमिकाओं वाला जेट लड़ाकू विमान है। यह हिन्दुस्तान एरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) द्वारा विकसित एक सीट और एक जेट इंजन वाला, अनेक भूमिकाओं को निभाने में सक्षम हल्का युद्धक विमान है। इसका विकास 1980 के दशक में शुरू हुआ था। विमान का आधिकारिक नाम तेजस 4 मई 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखा था।

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  1. J
    jameel shafakhana
    Nov 11, 2017 at 1:41 pm
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