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वायु सेना ने आंकी अपनी ताकत, डोकलाम में चीन पर भारी पड़ेंगे भारतीय विमान

भारत और चीन के बीच डोकलाम में 16 जून से गतिरोध जारी है। भारत की सुरक्षा के लिए संवेदनशील इस इलाके में चीन सड़क बनाना चाहता है।
एफ-16 विमान एक बार उड़ान भरने के बाद 4200 किमी तक की दूरी तय करने में सक्षम है।

डोकलाम घाटी में भारत और चीन के बीच जारी गतिरोध के बीच चीनी मीडिया बार-बार भारत को 1962 के युद्ध का सबक याद रखने और अपनी सेना के ज्यादा ताकतवर होने की धौंस जता रहा है। लेकिन भारतीय सेना द्वारा तैयार कराए गए एक अप्रकाशित दस्तावेज के अनुसार इस इलाके में भारतीय वायु सेना की स्थिति चीन से काफी मजबूत है। इस अप्रकाशित दस्तावेज “द ड्रैगन क्लॉज: असेसिंग चीन पीएलएएएफ टुडे” की प्रति एनडीटीवी के पास है। इस दस्तावेज में चीन की मौजूदा वायु सेना की ताकत का  आकलन किया गया है। इस दस्तावेज में भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उत्तर में स्थिति तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में दोनों देशों की वायु सेना की क्षमता का विश्लेषऩ किया गया है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार इस रिपोर्ट को स्क्वाड्रन लीडर समीर जोशी ने तैयार किया है। जोशी भारतीय वायु सेना के मिराज 2000 लड़ाकू विमान के पायलट भी रह चुके हैं। डोकलाम घाटी में दोनों देशों के बीच जारी गतिरोध के बाद पहली बार भारतीय वायु सेना ने दोनों देशों की वायु सेना का तुलनात्मक अध्ययन किया है। रिपोर्ट के अनुसार जोशी ने दस्तावेज में लिखा है कि तिब्बत और दक्षिणी शिनजियांग में चीनी वायु सेना पर भारतीय वायु सेना भौगोलिक, तकनीकी और प्रशिक्षण तीनों स्तर पर भारी है। जोशी के अनुसार इन कारणों से संख्याबल में चीनी वायु सेना के अधिक होने के बावजूद भारतीय वायु सेना युद्ध की स्थिति में बेहतर स्थिति में होगी।

दस्तावेज के अनुसार चीन के मुख्य एयरबेस के ऊंचाई पर स्थिति होने के कारण वो अपनी आधी क्षमता से ही लड़ाई कर पाएगी। यानी चीन के एसयू-27, जे-11 और जे-10 जैसे फाइटर विमान तिब्बत स्थिति एयरबेस से पूरी क्षमता से लड़ाई में नहीं उतर सकेंगे। दूसरी तरफ भारतीय वायु सेना पूर्वोत्तर भारत स्थित तेजपुर, कलाईकुंड, चाबुआ और हासिमरा जैसे एयरबेस से लड़ाई में आराम से बगैर किसी भौगौलिक बाधा के अपनी पूरी क्षमता से लड़ सकेगी। दस्तावेज के अनुसार ऐसे हालात में भारतीय वायु सेना तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र में काफी अंदर तक घुसकर ज्यादा प्रभावी तरीके से प्रदर्शन कर सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायु सेना को विपरीत परिस्थितियों में काम करने का अभ्यास चीनी सेना से ज्यादा है। दस्तावेज में इस बात का खास उल्लेख किया गया है कि हिमालयी पहाड़ी क्षेत्र में इस मामले में भारतीय सेना “गुणात्मक” रूप से बेहतर है। लेकिन ऐसा नहीं है कि सीमित युद्ध में भारतीय वायु सेना हर मामले में चीन से बेहतर स्थिति में होगी। चीन की लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलेस्टिक मिसाइलें भारतीय वायु सेना के लिए चिंता का सबब हैं। चीन के पास सतह से हवा में मार करने वाली एस-300, एकक्यू-9 और एचक्यू-12 जैसी मिसाइलें भी भारतीय वायु सैनिक ठिकारों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। दस्तावेज में इस बात का भी जिक्र है कि चीन जे-20 स्टेल्थ मिसाइल को अपनी सेना में शामिल करने जा रहा है, ऐसे में भारतीय वायु सेना अगर उचित तैयारी नहीं करेगी तो वो इस इलाके में अपनी बढ़त को खो देगी।

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