December 03, 2016

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भारत ने कहा, बेबुनियाद आरोप लगाने की बजाय आतंकवाद की सड़न को खत्म करे पाकिस्तान

स्वरूप ने कहा कि शायद अजीज को अंदाजा नहीं है कि भारतीयों से उनको कैसा स्वागत मिलेगा।

Author नई दिल्ली | November 24, 2016 20:51 pm
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप। (Photo- ANI/FILE)

कश्मीर में कथित अत्याचारों को लेकर नई दिल्ली को ‘बेनकाब करने’ के लिए पाकिस्तान की ओर से एक विशेष समूह बनाए जाने सबंधी खबरों की पृष्ठभूमि में भारत ने गुरुवार (24 नवंबर) को कहा कि इस्लामाबाद को ‘निराधार आरोप लगाने में अपनी ताकत जाया करने की बजाय आतंकवाद की सडांध को खत्म करने पर अपनी ऊर्जा खर्च करनी चाहिए।’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के उस बयान को लेकर भी उन पर कटाक्ष किया जिसमें उन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद उन भारतीयों तक भी पहुंचेगा जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘अतिवादी नीतियों’ के विरोधी हैं। स्वरूप ने कहा कि शायद अजीज को अंदाजा नहीं है कि भारतीयों से उनको कैसा स्वागत मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान को यह सलाह दी जाती है कि वह निराधार आरोप लगाने में अपनी ताकत जाया करने की बजाय आतंकवाद की सड़न को खत्म करने पर अपनी ऊर्जा खर्च करे।’

वह उन खबरों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिनमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को वैश्विक स्तर पर तवज्जो देने के मकसद से ‘साध्य और सतत’ नीति बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है तथा उन भारतीयों से संपर्क कर रहा है जो मोदी की ‘अतिवादी नीतियों’ के विरोधी हैं। स्वरूप ने तीन भारतीय सैनिकों की हत्या को लेकर कल पाकिस्तानी उप उच्चायुक्त को जारी डिमार्शे का ब्यौरा भी दिया। स्वरूप ने कहा कि भारत पाकिस्तानी सेना की ओर से उन हथियारबंद आतंकवादियों को सहयोग देने की तरकीब की कड़ी निंदा करता है जो 22 नवंबर, 2016 को माछिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास भारत की सैन्य चौकियों के निकट आए और भारतीय गश्ती दल को निशाना बनाया। इस हमले में तीन जवान मारे गए और उनमें एक के शव को निर्ममता से क्षत-विक्षत भी किया गया।

उनके अनुसार सरकार ने भारतीय चौकियों और गश्ती दलों को निशाना बनाने के लिए सीमा के उस पार से हथियारबंद आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के निरंतर प्रयासों को लेकर भी गंभीर चिंता से अवगत कराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘पिछले एक सप्ताह के भीतर 15 ऐसी वारदात हुई हैं जब आतकवादियों ने नियंत्रण रेखा के उस पार से पाकिस्तानी सेना की शह पर घिनौनी हरकतों को अंजाम दिया।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 16 से 21 नवंबर के बीच 27 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जो 2003 के संघर्ष विराम समझौते का खुला उल्लंघन है। स्वरूप ने इस्लामाबाद के उस आरोप को भी खारिज कर दिया कि भारत पाकिस्तान को अपनी सीमा के उच्च्पर से उड़ान भरने की इजाजत नहीं दे रहा है जो 1991 के समझौते का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, ‘हां, हम अवगत हैं कि पाकिस्तान ने यह दावा किया है लेकिन हम इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं।’

स्वरूप ने कहा कि 1991 के समझौते के तहत सैन्य विमान के संदर्भ में माल या यात्रियों से संबंधित कुछ जरूरी सूचना देनी होती है और पाकिस्तान सरकार ने उड़ान भरने को लेकर जो आग्रह किए हैं उनमें से कुछ में इस तरह की सूचना नहीं दी गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता स्वरूप ने कहा, ‘कई बार याद दिलाने और पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त और 9 नवंबर, 2016 को भारतीय विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान के प्रभारी) के बीच मुलाकात के बावजूद पाकिस्तान ने सूचना प्रदान नहीं की। हमें उम्मीद है कि पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौतों की बातों का सम्मान करेगा।’ संघर्ष विराम के उल्लंघन पर स्वरूप ने कहा कि बुधवार (23 नवंबर) को जब पाकिस्तान के उप उच्चायुक्त को तलब किया गया था तब उन्हें बताया गया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने 16 से 21 नवंबर के बीच 27 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया।

स्वरूप ने कहा, ‘सरकार ने 16 और 21 नवंबर के बीच नियंत्रण रेखा से लगे 18 गांवों को पाकिस्तानी सेना द्वारा जानबूझकर निशाना बनाए जाने को लेकर भी विरोध दर्ज कराया है।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने सिपाही चंदू बाबूलाल चव्हाण की सुरक्षा और खैरियत को लेकर भी अपनी चिंता जताई जो कुछ हफ्ते पहले अनजाने में पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हो गए थे। स्वरूप ने कहा, ‘हम सिपाही चंदू बाबूलाल चव्हाण के जल्द भारत वापस आने की उम्मीद करते हैं।’

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First Published on November 24, 2016 8:51 pm

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