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मैत्री के जरिए ही प्रगति कर सकते हैं भारत और पाकिस्तान: अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर में विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आज भारत और पाकिस्तान से कहा है कि वे ‘लड़ाई के रास्ते’ को छोड़ें और सभी मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाएं..
Author श्रीनगर | September 8, 2015 17:49 pm

जम्मू-कश्मीर में विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आज भारत और पाकिस्तान से कहा है कि वे ‘लड़ाई के रास्ते’ को छोड़ें और सभी मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाएं। अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों में से कोई भी देश आपस में मैत्री स्थापित किए बिना प्रगति नहीं कर सकता।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘युद्ध का माहौल बना हुआ है। पाकिस्तान से धमकियां आ रही हैं कि वे तैयार हैं। आखिर मरेगा कौन? एक गरीब कश्मीरी यहां मरेगा और एक गरीब कश्मीरी वहां मारा जाएगा। और होगा क्या? कुछ भी नहीं बदलेगा। नियंत्रण रेखा नहीं बदलेगी लेकिन हम मर जाएंगे।’’

अपने पिता और नेशनल कांफ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 33वीं बरसी के मौके पर अब्दुल्ला ने उनके मकबरे पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं दोनों देशों से अनुरोध और अपील करता हूं कि युद्ध के रास्ते को छोड़ा जाए और मुद्दों को वार्ता के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाए।’’

अब्दुल्ला की ये टिप्पणियां दरअसल पाकिस्तान के सेना प्रमुख द्वारा कश्मीर को एक ‘अधूरे एजेंडा’ बताए जाने और ‘दुश्मन’ द्वारा किसी भी ‘लंबी या छोटी’ अवधि वाला युद्ध छेड़े जाने की स्थिति में उसे ‘अपूर्णनीय क्षति’ उठाने की चेतावनी दिए जाने के बाद आई हैं। इससे पहले भारतीय सैन्य प्रमुख ने कहा था कि भारतीय सेना ‘‘द्रुत और छोटी अवधि वाले भविष्य के युद्धों’’ के लिए तैयार है।

इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का स्मरण करते हुए अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान दोनों से अपील की कि वे मैत्री के जरिए प्रगति के मार्ग पर बढ़ें। उन्होंने कहा, ‘‘हम सिर्फ वार्ताओं के जरिए ही आगे बढ़ सकते हैं। बमों के जरिए हम अब तक आगे नहीं बढ़ पाए हैं और भविष्य में भी ऐसा नहीं होने वाला। इन धमकियों से कुछ नहीं हो सकता। मुझे याद है जब भाजपा प्रधानमंत्री करनाह (उत्तरी कश्मीर में) गए थे, तब मैं वहां था। उन्होंने एक भाषण दिया था और पाकिस्तान के लोग सुन रहे थे। उन्होंने कहा था कि दोस्त बदले जा सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं बदले जा सकते।’’

उनके अनुसार, ‘‘उन्होंने (वाजपेयी ने) कहा कि हम अपने पड़ोसियों के साथ मैत्री और प्रगति के साथ रहेंगे और यदि हम मैत्री नहीं रखते हैं तो कोई भी देश प्रगति नहीं कर पाएगा। यदि हमें प्रगति करनी है तो फिर मैत्री के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। उन्हें मैत्री के मार्ग को देखना होगा और उसी पर बढ़ना होगा।’’

अब्दुल्ला ने अलगाववादी नेताओं से भी कहा कि वे अपने ‘दोस्तों’ से कहें कि वे युद्ध की बातें बंद करें और इसके बजाय मैत्री की भाषा अपनाने की कोशिश करें।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मैं हुर्रियत के नेताओं को भी यह बताना चाहता हूं। उन्हें अपने दोस्तों से कहना चाहिए कि वे युद्ध की बातें छोड़कर मैत्री के रास्ते की ओर देखें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो वे भी हमारी तरह मारे जाएंगे। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि इस पहलू पर गौर किया जाए।’’

इसी बीच, जम्मू में डोगरा प्रमाणपत्रों की बहाली की मांग के बारे में अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी भाजपा-पीडीपी गठबंधन राज्य को बांटना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह गलत रास्ता है। वे जम्मू-कश्मीर को बांटना चाहते हैं। यदि उनकी योजना जम्मू-कश्मीर को बांटने की है तो मैं उन्हें इस मंच से यह चेतावनी देना चाहता हूं कि राज्य को जो भी कष्ट झेलने पड़ेंगे, उसकी जिम्मेदारी आप पर ही होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जम्मू हमारा प्रवेश द्वार है और कश्मीर लद्दाख का प्रवेश द्वार है। और यदि आप राज्य को बांटते हैं तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे जो कि देश झेल नहीं पाएगा। इसलिए मैं ऐसी मांगें उठाने वाले उन सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे नफरत को बढ़ावा देने वाली ऐसी आवाजें न उठाएं।’’

प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने रविवार को जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की थी कि वह डोगरा प्रमाणपत्र की बहाली करने के लिए एक विधेयक लाए और क्षेत्र में रक्षा सेवाओं से जुड़ने के इच्छुक युवाओं को ये प्रमाणपत्र जारी करे।

नेशनल कांफ्रेंस नेता ने कहा कि यदि राज्य को आगे बढ़ना है तो लोगों को हिंदू, मुस्लिमों और सिखों के बीच भाईचारे का शेख अब्दुल्ला का नारा याद रखना होगा। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘यदि हम इसे याद नहीं रखते हैं तो राज्य आगे नहीं बढ़ेगा।’’

उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को चाहिए कि या तो वे राज्य की जनता को राहत उपलब्ध करवाएं या फिर अपना पद छोड़ दें। उन्होंने कहा, ‘‘विकास शून्य है। मैं मुफ्ती साहब को बता देना चाहता हूं कि हम कोई आपके शत्रु नहीं हैं। आप सरकार चलाएं और लोगों को राहत दें। लेकिन यदि आप लोगों को राहत नहीं उपलब्ध करवा सकते और फिर भी कुर्सी पर बने रहते हैं….तो यदि आपमें साहस हो तो कुर्सी छोड़ें। इसे अलविदा कहें। या तो लोगों के सम्मान की बात करें या फिर हम चुनाव के लिए तैयार हैं, फिर चाहे इन्हें अभी ही क्यों न करवा लिया जाए।’’

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष ने केंद्र से अपील की कि वह राज्य में पिछले साल आई बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों को राहत पहुंचाए ताकि वे आगामी सर्दियों के लिए इंतजाम कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ना, ईश्वर ही जानता है कि सर्दी के कारण कितने लोगों की जान जाएगी।’’

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