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उरी हमले पर यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया से भारत निराश, कहा- आतंकवाद दोनों के लिए है बड़ा खतरा

सुजाता ने थिंकटैंक ‘कार्नेगी इंडिया’ द्वारा आयोजित गोष्ठी ‘सुरक्षा एवं वैश्विक प्रशासन क्षेत्रों में भारत-यूरोपीय संघ के बीच सहयोग’ में अपने संबोधन में कहा कि भारत ‘‘सीमापार आतंकवाद और राष्ट्र की नीति के औजार के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवाद का पीड़ित है।’’
Author November 4, 2016 19:46 pm
उरी स्थित सेना का ब्रिगेड कैंप, जहां रविवार (18 सितंबर) को हुए आतंकी हमले में 18 जवान शहीद हो गए। (PTI File Photo)

भारत ने आज (शुक्रवार को) उरी हमले पर यूरोपीय संघ की ‘सीमित प्रतिक्रिया’ पर निराशा जताते हुए कहा कि आतंकवाद उसके और यूरोपीय संघ दोनों के लिए ‘सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा’ है। इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। विदेश मंत्रालय की सचिव (पश्चिम) सुजाता मेहता ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच आतंकवाद निरोधक सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव देते हुए संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत एक ‘प्रभावशाली एवं व्यापक’ वैश्विक तंत्र के निर्माण की जरूरत पर भी जोर दिया जिसके जरिये आतंकवाद की प्रक्रिया – चाहे वह राष्ट्र प्रायोजित हो या सरकार से इतर ताकतों के जरिये हो – से ‘मजबूती से एवं असरदार तरीके से’ निपटा जाए।

सुजाता ने थिंकटैंक ‘कार्नेगी इंडिया’ द्वारा आयोजित गोष्ठी ‘सुरक्षा एवं वैश्विक प्रशासन क्षेत्रों में भारत-यूरोपीय संघ के बीच सहयोग’ में अपने संबोधन में कहा कि भारत ‘‘सीमापार आतंकवाद और राष्ट्र की नीति के औजार के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे आतंकवाद का पीड़ित है।’’ उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) के मसौदे को जल्द मंजूरी देने का भी आह्वान किया। सुजाता ने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ ने भी मुंबई हमले के गुनाहगारों को दंडित करने की मांग की है और भारत की ही तरह वह आईएसआईएस, अलकायदा एवं उससे जुड़े संगठनों, लश्करे तैयबा, जैश ए मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और हक्कानी नेटवर्क जैसे समूहों एवं इकाइयों के खिलाफ निर्णायक एवं एकीकृत कार्रवाई के पक्ष में है।’’

वीडियो देखिए: उरी हमले के बाद पाकिस्तान से तनातनी

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां 18 सितंबर को उरी में हुए हमले पर यूरोपीय संघ की अपेक्षाकृत सीमित प्रतिक्रिया पर कुछ निराशा जताना चाहूंगी।’’ उरी में पाकिस्तानी आतंकियों के हमले में 19 भारतीय सैनिक मारे गए थे। मेहता ने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत एवं यूरोपीय संघ की साझा चिंताओं को देखते हुए हमारे लिए अपना सहयोग बढ़ाना जरूरी है।

 

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