December 03, 2016

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साइबर सुरक्षा में आपसी सहयोग बढ़ाएंगे इजराइल और भारत

रक्षा और खुफिया सुरक्षा पर ज्यादा जोर है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और रिवलिन ने इस तरह के सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।

Author नई दिल्ली | November 17, 2016 05:02 am
नई दिल्ली के हैदाबाद हाऊस संयुक्त बयान के बाद में एक-दूसरे से गले मिलते इस्राइली राष्ट्रपति र्यूवेन रिवलिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (REUTERS/Adnan Abidi/15 Nov, 2016)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और इजराइल के राष्ट्रपति रियुवेन रिवलिन में औपचारिक मुलाकात में गृह और साइबर सुरक्षा को लेकर साझा सहयोग बढ़ाने की बात पर जोर दिया गया। दोनों देशों के विशेषज्ञों ने इस दिशा में तुरंत प्रभाव से काम शुरू कर दिया, जब भारत द्वारा विकसित ड्रोन रुस्तम-दो को मिसाइल से लैस करने को लेकर तकनीकी सहयोग पर बातचीत शुरू की गई। डीआरडीओ ने मंगलवार को अपने इस ड्रोन का पहला परीक्षण बंगलुरू में किया। अभी भारत के पास 176 ड्रोन हैं, जिन्हें इजराइल ने बेचा है। इनमें 68 हेरोन ड्रोन हैं। इन सभी का इस्तेमाल टोही और खोजी अभियानों में किया जाता है। हेरोन ड्रोन को मिसाइलों से लैस करने की बात चल रही है।

इजराइली राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान कई मुद्दों पर आपसी सहयोग के करार होने हैं। रक्षा और खुफिया सुरक्षा पर ज्यादा जोर है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और रिवलिन ने इस तरह के सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत आपसी लाभ के लिए इजराइल के साथ साझेदारी बढ़ाने को उत्सुक है और दोनों देशों को वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को गृह और साइबर सुरक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों के विकास की जरूरत है जिनमें इजराइल ने अपनी क्षमताएं साबित की हैं।

भारत यात्रा पर आए इजराइल के राष्ट्रपति रियुवेन रिवलिन के सम्मान में यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्वागत समारोह में मुखर्जी ने कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक समुदाय को समन्वित कार्रवाई करनी होगी। करीब 20 साल बाद हो रही इजराइली राष्ट्रपति की यात्रा को ऐतिहासिक करार देते हुए मुखर्जी ने कहा कि रिवलिन उन लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी भारतीय प्रशंसा करते हैं, जिनके साथ भारतीय मजबूत और विशेष संबंधों का अनुभव करते हैं क्योंकि दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं जिसने मानवता में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। मुखर्जी ने कहा-‘जलवायु परिवर्तन समेत वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए हमें क्षमतावान समाधानों के लिए मिलकर काम करना होगा।

हमें अपने बच्चों के लिए एक ऐसी दुनिया छोड़नी चाहिए जो बेहतर, साफ और स्वस्थ हो। एक ऐसी दुनिया जहां शांति हो, जहां विविध तरह के लोग रहते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत और इजराइल इस महत्त्वपूर्ण लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।’ राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि दोनों देश अगले साल कूटनीतिक रिश्तों के 25 साल पूरे करेंगे, ऐसे में भारत आपसी लाभ के लिए व दुनिया की भलाई के लिए साझेदारी को और प्रगाढ़ करने को आशान्वित है। इजराइल की कुशलता की तारीफ करते हुए मुखर्जी ने कहा, ‘आपके अतीत और वर्तमान के नेतृत्व ने आप लोगों को बयां नहीं की जा सकने वाली विपत्तियों से उबरने और मजबूत होकर उभरने की प्रेरणा दी है। कठिन परिश्रम और दृढ़संकल्प से आपने अत्यंत प्रगतिशील, आत्मविश्वास वाला और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाया है।’ मुखर्जी ने कहा, ‘हमारी दोनों की जनता ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद आजादी हासिल की। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मानते थे कि यहूदियों का इजराइल पर वैध दावा है। पंडित नेहरू भी इसे मानते थे। उन्होंने 1950 में कहा था और मैं उनकी कही बात उद्धृत करता हूं-‘इजराइल एक वास्तविकता है’।’

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First Published on November 17, 2016 5:02 am

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