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आजादी के 70 साल: आखि‍री वक्‍त में अंग्रेजों ने दिखाई हड़बड़ी और 1947 में ही आजाद हो गया भारत

Independence Day 2017 India: 1930 से भारत की आजादी तक 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस के तौर पर मनाया जाता था।
Author August 15, 2017 09:40 am
Independence Day India: भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू लाल किले पर भाषण देते हुए। (तस्वीर- एक्स्प्रेस आर्काइव)

आजादी के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने वाले जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस के 1929 में आयोजित लाहौर अधिवेशन में पहली बार “पूर्ण स्वराज” को पार्टी का लक्ष्य बताया था। 26 जनवरी को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी के दिन के रूप मं चुना गया। 1930 से भारत की आजादी तक भारत इसी दिन स्वतंत्रता दिवस मनाता रहा था। जब भारत आजाद हुआ तो इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया। 26 जनवरी 1950 को आजाद भारत का अपना संविधान लागू हुआ और भारत आधिकारिक तौर पर एक संप्रभु राष्ट्र बन गया। तो आखिर 15 अगस्त को ही भारत आजाद क्यों हुआ?

भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन को ब्रिटिश संसद ने 30 जून 1948 तक भारत में सत्ता-हस्तांतरण का दायित्व सौंपा था। सी गोपालचारी के अमर शब्दों में कहें तो अगर माउंटबेटन ने 30 जून 1948 तक इंतजार किया होता तो उनके पास हस्तांतरित करने के लिए कोई सत्ता नहीं बचती। इसलिए माउंटबेटन ने अगस्त 1947 में ही ये दायित्व पूरा कर दिया। माउंटेबेटन का दावा था कि सत्ता-हस्तांतरण पहले करने से खून-खराबा रोका जा सकता है। हालांकि इतिहास ने माउंटबेटन को गलत साबित किया। बाद में माउंटबेटन ने यह कहकर अपना बचाव किया कि “जहां भी औपनिवेशिक शासन खत्म हुआ है, वहीं खून-खराबा हुआ है। ये इसकी कीमत है जो आपको चुकानी पड़ती है।”

माउंटबेटन के भेजे सूचनाओं के आधार पर ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमंस में इंडियन इंडिपेंडेंस बिल चार जुलाई 1947 को पेश किया गया। भारत को आजादी देने वाला ये विधेयक एक पखवाड़े में ही ब्रिटिश संसद में पारित हो गया। इस विधेयक के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत में ब्रिटिश राज समाप्त होना तय हुआ। विधेयक के अनुसार इसके बाद भारत और पाकिस्तान नामक दो डोमिनियन स्टेट (स्वतंत्र-उपनिवेश) बनने तय हुए जिन्होंने ब्रिटिश कॉमनवेल्थ के तहत रहना स्वीकार किया।

ब्रिटिश हुकूमत ने भारत की 500 से ज्यादा रियासतों का भविष्य भी नए देशों पर छोड़ दिया था। इन रियासतों को भारत और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनना था। कई रियासतें 15 अगस्त 1947 से पहले ही भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन गई थीं लेकिन कुछ रियासतें आजादी के बाद तक दोनों में से किसी देश में नहीं शामिल हुई थीं। जम्मू-कश्मीर, जोधपुर, जूनागढ़, हैदराबाद और त्रावणकोर की रिसायतें आजादी के बाद देश का हिस्सा बनीं।

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