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सिर्फ दो मिनट में तय हुआ था देवेंद्र फडणवीस सरकार का भविष्य

गणेश नंदन तिवारी मुंबई। बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में सिर्फ दो मिनट में सरकार का भविष्य तय हुआ था। विधानसभा में एक बजकर आठ मिनट पर भाजपा नेता आशीष शेलार ने एक पंक्ति का विश्वासमत पटल पर रखा और एक बजकर 10 मिनट पर विधान सभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने फडणवीस सरकार के विश्वास मत […]
Author November 14, 2014 08:00 am
आरक्षण खत्म करने का दावा करने वाले फडणवीस अब आरक्षण के पक्ष में

गणेश नंदन तिवारी

मुंबई। बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में सिर्फ दो मिनट में सरकार का भविष्य तय हुआ था। विधानसभा में एक बजकर आठ मिनट पर भाजपा नेता आशीष शेलार ने एक पंक्ति का विश्वासमत पटल पर रखा और एक बजकर 10 मिनट पर विधान सभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने फडणवीस सरकार के विश्वास मत जीतने की घोषणा की। इन दो मिनटों के भीतर सदन में किस दल ने क्या भूमिका निभाई, यह अभी तक अस्पष्ट है।

प्रस्ताव पास होते ही कांग्रेस विधायकों ने हंगामा शुरू किया और अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी। यह बात अभी तक साफ नहीं हुई कि विश्वास मत के ध्वनिमत से पास होने के दौरान शिवसेना ने सदन से बहिर्गमन किया था या नहीं। शिवसेना विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे का कहना है कि उनके विधायक सदन में मौजूद थे।

एक बजकर दो मिनट पर अध्यक्ष ने विश्वास मत प्रस्ताव लाने की बात कही तो शिवसेना और कांग्रेस विधायकों ने एक बजकर पांच मिनट पर प्रस्तावों की सूची में किए गए फेरबदल पर एतराज जताया। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के मुताबिक सबसे पहले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होना था। उसके बाद विपक्ष के नेता का और अंत में विश्वास मत प्रस्ताव लाया जाना था। मगर इसमें अंतिम समय में फेरबदल किया गया। बदलाव के बाद पहले विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ। उसके बाद विश्वास प्रस्ताव और अंत में विपक्षी दल के नेता के नाम की घोषणा की गई। इस बदलाव के कारण जब सदन में विश्वास मत पास हो रहा था, तब उस पर एतराज करने के लिए या पोल की मांग करने के लिए विपक्षी दल के नेता का अस्तित्व ही नहीं था क्योंकि विपक्षी दल के नेता के नाम की घोषणा प्रस्ताव पास होने के बाद की गई थी। यह छोटी-सी हेरफेर बुधवार के विश्वास मत प्रस्ताव के पास होने के कारणों में एक रही।

एक बजकर पांच मिनट पर शिवसेना ने एतराज जताया कि विपक्षी दल के नेता की घोषणा पहले की जानी चाहिए। उसके बाद ही विश्वास मत लाया जाना चाहिए। मगर अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे का कहना था कि चूंकि शिव सेना के अलावा कांग्रेस ने भी विपक्ष के नेता पद पर दावा किया है इसलिए इसमें समय लगेगा। अध्यक्ष के यह कहने के बाद शिवसेना के नेताओं ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया और अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए।

माना यह जा रहा है कि जब एक बजकर आठ मिनट पर सदन में आशीष शेलार के विश्वास मत पर ध्वनिमत शुरू हुआ, तब शिवसेना के 63 सदस्य सदन से बाहर निकल गए थे जिससे 288 सदस्यों वाली विधानसभा की ताकत घटकर 224 पर आ गई थी। भाजपा विधायकों ने यस कहकर ध्वनिमत से प्रस्ताव का समर्थन किया। इस दौरान सदन से अनुपस्थित रहने की घोषणा करने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सदस्य सदन में उपस्थित थे, मगर तटस्थ थे। उन्होंने ध्वनिमत में हिस्सा लिया या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस के कुछ सदस्य जरूर इस दौरान अध्यक्ष के आसन के करीब पहुंचे। एक बजकर 10 मिनट पर अध्यक्ष ने घोषणा की कि फडणवीस सरकार ने ध्वनिमत से बहुमत साबित कर दिया है। इसके बाद सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी गई थी।

जब दस मिनट बाद, एक बजकर बीस मिनट पर, सदन की कार्रवाई फिर से शुरू हुई तो अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता के तौर पर शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नाम की घोषणा की। कांग्रेस विधायक दल के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील ने अध्यक्ष से मत विभाजन की मांग की। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सरकार का भविष्य तय हो चुका था। सरकार विश्वास मत जीत चुकी थी।

बहरहाल बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में जो कुछ हुआ, उसने कुछ बुनियादी सवाल खड़े किए हैं। पारदर्शिता की हिमायती सरकारें महत्त्वपूर्ण मसलों पर होने वाली सदन की कार्रवाई का सीधा प्रसारण करने से पीछे क्यों हट जाती हैं। जब कई पूर्व नियोजित कार्यक्रमों को रोककर क्रिकेट मैचों का
है, तो सरकार बनने या राज्यों के गठन (तेलंगाना) जैसे महत्त्वपूर्ण क्षणों को क्यों जनता के सामने नहीं आने दिया जाता? अगर बुधवार को सदन की कार्रवाई का सीधा प्रसारण किया जा रहा होता, तो उतना विवाद पैदा नहीं होता जितना हुआ है।

इस बीच शिवसेना ने राज्यपाल सी विद्यासागर राव से मिलकर सदन में सरकार के फिर से बहुमत साबित कराने की मांग की है। शिवसेना के वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने कहा है कि उनकी पार्टी सदन में फिर से विश्वासमत के पक्ष में है ताकि भाजपा वैध रूप से साबित करे कि उसके पास बहुमत है। उन्होंने कहा, राज्यपाल ने भाजपा से बहुमत साबित करने के लिए कहा था। लेकिन, ध्वनिमत से ऐसा कराके वे (भाजपा) देश के कानून के खिलाफ गए। मुख्य प्रतिपक्ष होने के नाते हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।

शिवसेना ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि उसने भारी शोरशराबे और विरोध के बीच बहुमत साबित करके संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है और ध्वनिमत के जरिए विश्वासमत हासिल करके राज्य में लंबे समय से चली आ रही परंपरा का गला घोंटा है।

 

 

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