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आधार कार्ड की भी होती है वैलिडिटी: इनऐक्टिव तो नहीं हो गया है आपका कार्ड, ऐसे करें चेक

अगर आपने आधार बनवाने के बाद लगातार तीन साल तक उसे न तो पैन कार्ड से जोड़ा और न ही बैंक से जोड़ा या किसी भी सरकारी सामाजिक कार्यक्रम के तहत उसे नहीं जोड़ा तो वह निष्क्रिय हो जाएगा।
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (फाइल फोटो)

सरकार आधार कार्ड को धीरे-धीरे सभी सरकारी योजनाओं और आर्थिक गतिविधियों के लिए अनिवार्य करती जा रही है। इसी कड़ी में एक नया खुलासा हुआ है कि अगर किसी ने अपने आधार को लगातार तीन साल तक किसी भी सरकारी योजना या बैंकिंग से जुड़े कारोबार में इस्तेमाल नहीं किया तो वह निष्क्रिय हो सकता है। इकोनोमिक टाइम्स के मुताबिक यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की हेल्पलाइन और सूत्रों के अनुसार, अगर आपने तीन साल तक लगातार आधार का प्रयोग नहीं किया तो वह निष्क्रिय हो सकता है।

यानी अगर आपने आधार बनवाने के बाद लगातार तीन साल तक उसे न तो पैन कार्ड से जोड़ा और न ही बैंक से जोड़ा या किसी भी सरकारी सामाजिक कार्यक्रम के तहत उसे नहीं जोड़ा तो वह निष्क्रिय हो जाएगा। हालांकि, इससे घबराने की जरूरत नहीं है। अगर आपका आधार नंबर निष्क्रिय हो जाता है तो उसे दोबारा सक्रिय किया जा सकता है। इसके अलावा जिन लोगों को शक है कि उनका कार्ड सक्रिय है या निष्क्रिय तो ऐसे लोग यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जाकर उसे ऑनलाइन चेक कर सकते हैं।

अगर आपका कार्ड निष्क्रिय हो गया है तो आप सभी डॉक्यूमेंट लेकर नजदीकी आधार पंजीकरण केंद्र पर पहुंच जाएं। वहां आपसे आधार अपडेट फॉर्म भरवा जाएगा। उस के बाद बायोमिट्रिक मशीन से आपकी उंगलियों के निशान को वेरीफाई किया जाएगा। वेरिफिकेशन होते ही आपका आधार दोबारा सक्रिय हो जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए सरकार ने 25 रुपये का शुल्क निर्धारित किया है। इस क्रम में आपके पास दर्ज मोबाइल नंबर होना जरूरी है। आप ऑनलाइन या डाक के द्वारा अपने निष्क्रिय पड़े आधार को रिऐक्टिवेट नहीं करा सकते हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी आधार कार्ड को पैन कार्ड से जोड़ने वाले केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहाराया था लेकिन इसको जरूरी मानने से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों के पास  आधार कार्ड नहीं है या फिर जिन्होंने अबतक वह नहीं बनवाया है उनके लिए यह फिलहाल जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने एक स्कीम बनाने के लिए भी कहा जिसके जरिए निजी डाटा लीक ना होने की बात सुनिश्चित की जा सके। बता दें कि केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव करते हुए आधार नंबर को परमानेंट एकाउंट नंबर (पैन कार्ड) से जोड़ना जरूरी कर दिया था।

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