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अंतरराष्ट्रीय अदालत ने लगाई कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक, ट्विटर पर पाकिस्तानियों ने बुलंद किया विरोध का झंडा, कहा- #PakistanisRejectICJ?

पाकिस्तानी थिंक टैंक पाकिस्तान डिफेंस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस फैसले को विरोध करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला पाकिस्तान पर लागू नहीं होगा।
वीडियो से निकाली गई कुलभूषण जाधव की तस्वीर।

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकार कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा सुनायी गयी फांसी की सजा पर गुुरुवार (18 मई) को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने अगले आदेश तक रोक लगा दी। नीदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत के इस फैसले के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के ट्विटर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। फैसला आने के बाद ट्विटर पर दोनों देशों में कुलभूषण जाधव टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बन गये। जहां भारत में इस फैसले पर खुशी जतायी जा रही है वहीं पाकिस्तानी ट्विटर यूजर्स ने  #PakistanisRejectICJ? हैशटैग के साथ इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते हे ये हैशटैग ट्विटर पर पाकिस्तान का दूसरा टॉप ट्रेंडिंग टॉपिक बन गया।

पाकिस्तानी थिंक टैंक पाकिस्तान डिफेंस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस फैसले को विरोध करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला पाकिस्तान पर लागू नहीं होगा। पाकिस्तान डिफेंस ने ट्वीट किया है, “आईसीजे का फैसला पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा जुड़े मामलों पर लागू नहीं होते। भारत को आखिरकार हार ही मिलेगी।”

सैय्यद फैयाज अली नामक पाकिस्तानी ट्वीटर यूजर ने लिखा है, “कुलभूषण जाधव जैसे आतंकवादी के संग कोई रहम नहीं दिखाना चाहिए।” शिरीन मजारी नामक यूजर ने लिखा है, “मैंने अपने ट्वीट में पहले ही आशंका जतायी थी कि आईसीजे के फैसा पहले से तय था। हमें आईसीजे में जाना ही नहीं चाहिए था।”

Kulbhushan Jadav, Indian Ex Navy Officer आईसीजे का फैसला आे के बाद 18 मई शाम 5.30 बजे ट्विटर पर पाकिस्तान में ट्रेंड कर रहे टॉपिक।

कुछ पाकिस्तानी ट्वीटर यूजर्स इस बात की भी आलोचना कर रहे हैं कि पाकिस्तानी वकीलों ने अंतरराष्ट्रीय अदालतम में अपना पक्ष रखने के लिए मिले 90 मिनट में से केवल 40 मिनट का ही उपयोग किया। हालांकि कुछ दूसरे यूजर्स इस पर पाकिस्तान का बचाव कर रहे हैं। पाकिस्तानी पत्रकार फारूक के पिताफई ने ट्वीट किया है, “पाकिस्तानी वकीलों को दोष देने का कोई मतलब नहीं है। अगर आप आसमानी फरीश्तों को भी भेज देते तो नतीजा यही होता।”

मुबाशिर जैदी नामक पाकिस्तानी पत्रकार ने आईसीजे के एक पुराने मामले का हवाला देते हुए लिखा है कि 1982 में जर्मनी के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय अदालत द्वारा ऐसा ही फैसला दिये जाने के बावजूद अमेरिका ने जर्मन नागरिकों कार्ल हेंज और वाल्टर को फांसी पर लटका दिया था।

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