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मसरत आलम की रिहाई पर मोदी ने कहा: ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

कश्मीर के अलगाववादी सरगना मसरत आलम की रिहाई को अस्वीकार्य बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ऐसा भारत सरकार को जानकारी दिए बिना किया गया है और देश की एकता, अखंडता के लिए जो भी जरूरी होगा उनकी सरकार करेगी। इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। राज्यसभा […]
संसद से मुफ्ती मुहम्मद सईद को पीएम का सख्त संदेश। (फोटो: रॉयटर्स)

कश्मीर के अलगाववादी सरगना मसरत आलम की रिहाई को अस्वीकार्य बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ऐसा भारत सरकार को जानकारी दिए बिना किया गया है और देश की एकता, अखंडता के लिए जो भी जरूरी होगा उनकी सरकार करेगी। इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में जमकर हंगामा हुआ। राज्यसभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पीडीपी व भाजपा के बीच मतभेद होने की बात मानी।

मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली राज्य की पीडीपी- भाजपा गठबंधन सरकार के मसर्रत की रिहाई के फैसले पर लोकसभा में विपक्ष द्वारा प्रकट किए गए भारी आक्रोश पर प्रधानमंत्री ने सदन में कहा कि सरकार बनने के बाद वहां जो कुछ भी गतिविधियां हो रही हैं , वे न तो भारत सरकार से मशविरा करके हो रही हैं और न भारत सरकार को जानकारी देकर हो रही हैं।
मसरत आलम की रिहाई के मसले पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने के विपक्ष के आरोपों के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी किसी भी हरकत को स्वीकार नहीं करती है। देश की एकता, अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

संविधान की मर्यादा में कदम उठाए जाते रहे हैं और आगे भी उठाए जाते रहेंगे। सदन में और देश में जो आक्रोश है, उस आक्रोश में मैं भी अपना स्वर मिलाता हूं। यह देश अलगाववाद के मुद्दे पर दलबंदी के आधार पर न पहले कभी सोचता था , न अब सोचता है और न आगे कभी सोचेगा।

सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने मसरत आलम की रिहाई के मुद्दे पर भारी हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के बयानों से असंतोष जताते हुए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस , राकांपा, राजद , जद (एकी) और वाम दलों ने सदन से वाकआउट किया। मोदी ने सदन को आश्वस्त किया कि अलगाववादी ताकतों , उनका समर्थन करने वालों और कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ और देश की एकता, अखंडता के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, सरकार उठाएगी।

इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से हंगामा किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह पूछा जा रहा है कि मोदी जी चुप क्यों हैं? ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें इस मुद्दे पर चुप रहना पड़े। हम वे लोग हैं जिन्होंने इन आदर्शों के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिया है। इसलिए कृपया करके हमें देशभक्ति न सिखाएं। मोदी ने कहा कि यह आक्रोश किसी दल का नहीं देश का है। यह आक्रोश इस बेंच या उस बेंच का नहीं, बल्कि पूरे सदन का है।

वहीं राज्यसभा में विपक्ष के हमलों से घिरी केंद्र सरकार ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कुछ भी न्योछावर करने को तैयार है। सरकार ने साथ ही यह भी माना कि भाजपा और पीडीपी के बीच वैचारिक मतभेद हैं। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष की सारी आशंकाओं को निर्मूल करार देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और बना रहेगा। किसी भी व्यक्ति को भले ही वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, देश की एकता और अखंडता और सुरक्षा से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। हम इसके लिए कुछ भी न्योछावर करने के लिए तैयार हैं। सरकार का कोई छिपा हुआ एजंडा नहीं है।

सिंह ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा और पीडीपी के बीच वैचारिक मतभेद हैं। उन्होंने कहा कि विगत में हमारे कभी पीडीपी के साथ कोई संबंध नहीं रहे हैं। हमारा उनका साथ तो महज दस दिन पुराना है। आपका (कांग्रेस का) उनके साथ लंबा संबंध रहा है। उनके ऊपर तो आपका ही रंग चढ़ा हुआ है। आप उनके साथ सत्ता में भी रहे थे।

मसर्रत आलम की रिहाई के बारे में राज्य सरकार के गृह विभाग की ओर से दी गई जानकारी को असंतोषजनक बताते हुए सिंह ने कहा कि केंद्र ने वहां की सरकार से इस बारे में और जानकारी मांगी है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हुई तो राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए जाएंगे। सरकार इस मामले में कोई संकोच नहीं करेगी। जम्मू- कश्मीर में पीडीपी-भाजपा सरकार के गठन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि खंडित जनादेश के कारण ऐसा करना जरूरी था।

इससे पूर्व, गृह मंत्री से स्पष्टीकरण मांगते हुए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि मसर्रत आलम घाटी में 112 बच्चों के मारे जाने का जिम्मेदार है। उसके खिलाफ सरकार ने कोई मामला क्यों नहीं चलाया। जद (एकी) प्रमुख शरद यादव ने जानना चाहा कि भाजपा और पीडीपी के बीच जम्मू-कश्मीर न्यूनतम साझा कार्यक्रम के तहत कौन-कौन से प्रावधान किए गए हैं।

इससे पहले सदन की बैठक शुरू होने पर कांगे्रस के उप नेता आनंद शर्मा ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसके लिए उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के आने के एक हफ्ते के भीतर ही अलगाववादी तत्वों की गतिविधियां बढ़ गई हैं और वे जलसे कर राष्ट्रविरोधी बयान दे रहे हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि पीडीपी और भाजपा की मिलीजुली सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री ने विधानसभा चुनाव के बारे में एक बयान दिया जिसकी पूरे देश में आलोचना हुई। उन्होंने कहा कि राज्य की सरकार एक के बाद एक ऐसे कदम उठा रही है जिसकी देश में निंदा हो रही है। बसपा के सतीश चंद्र मिश्र, निर्दलीय एचके दुआ, कांग्रेस के आनंद शर्मा, प्रमोद तिवारी और शांताराम नाइक जद (एकी) के केसी त्यागी सहित कई सदस्यों ने भी मसरत आलम की रिहाई से जुड़े मुद्दों पर सरकार से विभिन्न स्पष्टीकरण मांगे।

गृह मंत्री के बयान के बाद विपक्ष के प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर जवाब दिए जाने की मांग करने पर संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि सदस्यों ने जो मुद्दा उठाया, उसका गृह मंत्री ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने विपक्ष पर बहाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री यहां उपस्थित थे और किसी सदस्य ने यह नहीं कहा कि उन्हें हस्तक्षेप करना चाहिए। इस पर विपक्ष ने हंगामा किया व दो बार सदन की कार्रवाई स्थगित करने के बाद उसे मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

 

 

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  1. S
    sanjay
    Mar 11, 2015 at 10:53 am
    महामना कुछ करके साबित करो की आखिर मोदी साहब PM हे
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    Reply
    1. V
      VIJAY LODHA
      Mar 10, 2015 at 2:17 pm
      राष्ट्रिय सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं. सिर्फ कहना पर्याप्त नहीं है .. इसे साबित करने के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार से समर्थन वापस ले लीजिये, माननीय.
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      Reply
      1. R
        raj Dahale
        Mar 10, 2015 at 1:31 pm
        क्या हैं ये...
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        Reply
        सबरंग