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CBSE को HRD का फरमान- किताब छापना नहीं है आपका काम, बंद होगी 280 किताबों की छपाई

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने सीबीएसई को नए आदेश देते हुए कहा है कि वह किताबें प्रकाशन न करे।
प्रतीकात्मक फोटो

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) ने सीबीएसई को नए आदेश देते हुए कहा है कि वह किताबें प्रकाशन न करे। इक्नॉमिक टाइम्स ग्रुप के हवाले से यह खबर सामने आ रही है। खबर के मुताबिक एचआरडी ने कहा है कि किताबों का प्रकाशन करना उसके मेनडेट का हिस्सा नहीं है। बता दें सीबीएसई केंद्र सरकार के अधीन आता है। बोर्ड ने लगभग 300 स्कूली किबातें प्रकाशित की है। अमूमन ज्यादातर स्कूल सीबीएसई से ही ऐफिलेटिड होते हैं। वहीं अलग-अलग राज्यों के स्कूल राज्यों के बोर्ड्स से एफिलेटिड होते हैं और उनके पास सीबीएसई से खुद को ऐफिलेट कराने का विक्लप भी होता है। लगभग 19 हजार स्कूल सीबीएसई से एफिलेटिड हैं और इन स्कूलों में सीबीएसई द्वारा जारी की गई किताबों से पढ़ाया जाता है। वहीं खबर के मुताबिक सीबीएसई की वेबसाइट पर 280 नए पब्लिकेशन्स हैं जिनकी कीमत 13 रुपये से लेकर 700 रुपये तक की है। इनमें सेकेंड्री लेवल की साइंस, इंजीनियरिंग और मास मीडिया की किताबें शामिल हैं। नए आदेश के बाद इनकी  छपाई का काम बंद हो जाएगा।

बता दें हाल ही में कई छात्रों के परिजनों द्वारा ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि स्कूल, सीबीएसई द्वारा प्रकाशित की जाने वाली मंहगी किताबें खरीदने के लिए दबाव बनाते है। वहीं इस मामले को लेकर सीबीएसई की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। बता दें हाल ही में इसी महीने 25 मई को खबर सामने आई थी कि कैसे सीबीएसई शिक्षा बोर्ड से ज्यादा परीक्षा बोर्ड बनकर रह गया है। विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की वजह से बोर्ड पर ज्यादा दबाव रहता है।

बोर्ड जहां हर साल कक्षा 10वीं और 12वीं के लिए 27 लाख से ज्यादा बच्चों की परीक्षाएं आयोजित करवाता है। ऐसे ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए हर वर्ष औसतन 68 लाख उम्मीदवार बोर्ड के पास पंजीकरण कराते हैं। पिछले दिनों सीबीएसई की ओर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय को इस संबंध में बताते हुए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) को आयोजित करने में असमर्थता भी जताई थी। इसके बाद काफी विद्यार्थियों ने इसे लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मुख्यालय पर प्रदर्शन भी किया था।

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