December 05, 2016

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विजिलेंस क्लीयरेंस नहीं मिलने के बावजूद स्मृति ईरानी ने भेज दिया था एनआईटी डायरेक्टर के लिए नाम, प्रकाश जावड़ेकर ने काटा!

ऐसा पहली बार नहीं है जब जावड़ेकर ने स्‍मृति के किसी फैसले को रोका या बदला हो।

बैठक से बाहर निकलते स्‍मृति ईरानी व प्रकाश जावड़ेकर। (FILE PHOTO)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हटाए जाने से पहले, स्‍मृति ईरानी ने नौ नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (एनआईटी) के निदेशकों के नाम तय कर दिए थे। इससे संबंधित फाइलें भी राष्‍ट्रपति भवन भ‍िजवा दी गई थीं। जब प्रकाश जावड़ेकर को एचआरडी मंत्री बनाया गया तो राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नए मंत्री की राय जानने के लिए फाइलें वापस भिजवाईं। ऐसा लगता है कि मंत्रालय अब नौ एनआईटी में से दो के पैनल को खत्‍म करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों ने कहा कि एनआईटी वारंगल और एनआईटी दुर्गापुर के निदेशक पद के लिए फिर से विज्ञापन निकाले जाएंगे। ऐसा इसलिए क्‍योंकि जावड़ेकर को लगा कि स्‍मृति ने जिनका नाम चुना था, वह पद के उपयुक्‍त नहीं है। वारंगल के निदेशक पद वाले उम्‍मीदवार विजिलेंस क्लियरेंस हासिल नहीं कर पाए, जबकि दुर्गापुर के उम्‍मीदवार के ख‍िलाफ कई शिकायतें जावड़ेकर को मिली हैं। ऐसा पहली बार नहीं है जब जावड़ेकर ने स्‍मृति के किसी फैसले को रोका या बदला हो। इससे पहले जावड़ेकर की अगुवाई में मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट (IIM) बिल में वे सभी बदलाव कर दिए जैसे प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (पीएमओ) द्वारा करने को कहे गए थे। इससे सभी आईआईएम को पहले से ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी। इस फैसले से सभी आईआईएम अपनी मर्जी से स्वायत्त रूप से बोर्ड ऑफ गवर्नर (BOG) का चेयरमैन चुन सकेंगे और नियुक्ति में सरकार की भूमिका खत्म हो जाएगी।

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प्रकाश जावड़ेकर ने एचआरडी मिनिस्टर को आईआईएम कोर्डिनेशन फोर्म के हेड के पद पर रहने का अधिकार भी खत्म करने की बात कही है। इस बिल को लेकर पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्री रहीं स्मृति ईरानी और आईआईएम प्रशासन के बीच काफी बहस हुई थी। उस वक्त की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मृति ईरानी आईआईएम में सरकार और एचआरडी मिनिस्ट्री का रोल कम नहीं होने देना चाहती थीं। इस वजह से उनकी और प्रधानमंत्री कार्यलय के बीच भी तकरार की खबरें आईं थीं। दरअसल, यह बिल प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की तरफ से ही लाया गया था, लेकिन स्मृति इसे मानने को तैयार नहीं थीं।

प्रकाश जावड़ेकर ने सितंबर में पीएमओ के साथ मीटिंग की थी। उस दौरान ही फैसला ले लिया गया था कि चेयरमैन को चुनने में अब सरकार का रोल नहीं रहेगा। गौरतलब है कि जुलाई में स्मृति ईरानी से एचआरडी मिनिस्टर का पद छीनकर प्रकाश जावड़ेकर को दे दिया गया था। वहीं स्मृति ईरानी को कपड़ा मंत्रालय दिया गया था। खबरें थी कि पीएमओ से चल रही तल्खी और बार-बार विवादों में पड़ने को लेकर उन्हें पद से हटाया गया था।

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First Published on November 7, 2016 8:53 am

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