March 30, 2017

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नोटबंदी: फोन करके ममता बनर्जी ने मांगा था बिहार सीएम का साथ, मगर नीतीश ने दिया था यह जवाब

नीतीश कुमार ने बिहार के कुछ विधायकों को नोटबंदी पर पीएम नरेंद्र मोदी का समर्थन और ममता बनर्जी का साथ ना देने की असल वजह बताई।

लालू यादव ने नीतीश को अपनी पार्टी के विधायकों के सामने भाषण देने के लिए बुलाया था।

नीतीश कुमार ने बिहार के कुछ विधायकों को नोटबंदी पर पीएम नरेंद्र मोदी का समर्थन और ममता बनर्जी का साथ ना देने की असल वजह बताई। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, मंगलवार (29 नवंबर) को नीतीश कुमार ने बताया कि उनके पास नोटबंदी के फैसले का विरोध करने के लिए हो रहे प्रदर्शन में चलने के लिए ममता बनर्जी का फोन आया था। लेकिन फोन पर नीतीश ने ममता को साफ शब्दों कहा कि जब राष्ट्रपति ने पीएम के फैसले पर मुहर लगा दी है तो फिर उसका विरोध करने का कोई मतलब ही नहीं बनता। नीतीश ने यह बात अपनी पार्टी के विधायकों के सामने नहीं बल्कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के विधायकों के सामने कही। लालू यादव ने ही नीतीश को वहां भाषण देने के लिए बुलाया था। नीतीश ने विधायकों के सामने बोलकर यह जाहिर करना चाहा कि पीएम मोदी के फैसला का समर्थन करने से उन दोनों के गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को पटना पहुंची थीं। उनका प्लान था कि बुधवार को पटना में नोटबंदी के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन किया जाए जैसा कि उन्होंने लखनऊ में किया था। खबर के मुताबिक, नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी के सभी सीनियर नेताओं को बुधवार को होने वाले प्रदर्शन में हिस्सा ना लेने के लिए कह दिया था। इतना ही नहीं नीतीश ने अखिलेश यादव की तरह किसी कैबिनेट मंत्री को भी ममता को लेने के लिए नहीं भेजा। इसपर ममता बनर्जी को गुस्सा आ गया था।

ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछा कि भाजपा के सांसदों और विधायकों को अपने बैंक खाते से लेन देन का नोटबंदी की अवधि के बाद का ही ब्योरा क्यों सौंपना चाहिए। यह राजग के सत्ता में आने के बाद से क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘आठ नवंबर से ही खाते का ब्योरा क्यों होना चाहिए? केवल तीन हफ्ते। क्यों नहीं सारे ब्योरे ढाई साल के हो…? आपके 21 दिनों की नोट बंदी के बाद पूरा देश घरबंदी हो गया है, इसलिए यह तमाशा क्यों।’’

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First Published on November 30, 2016 1:18 pm

  1. A
    Ajay Sharma
    Nov 30, 2016 at 8:50 am
    ईमानदार लोग ............ चाहे किसी भी पार्टी में हो अपनी ईमानदारी पर रहते हैं ......नितीश आज भले ही लालू के साथ हैं ,,,,,,,,,लेकिन नितीश के ईमानदार नेता हैं और राज्य के भलाई देश भलाई वाले फैसले में साथ हैं .....बाकि सब देश के खिलाफ हैं
    Reply
    1. D
      Dev Verma
      Nov 30, 2016 at 3:07 pm
      जे औरत जितनी शक्ल से गुंधी हे उतनी हे आधार से भी. ई हेट हेर फेस शी कैर्री.
      Reply
      1. P
        Pinna
        Dec 2, 2016 at 4:36 am
        कल. तक, जब नितीश कुमार मोदी जी का विरोध कर रहे थे तो ममता को बहुत अचे लग रहे थे और अब वही बिटिश अचानक से े लगने लगे! धन्य हो हमारे अवसरवादी नेता!
        Reply
        1. R
          R k
          Nov 30, 2016 at 10:28 am
          Pahli baar nitish ne samajhdari ka parichya dekar aapni ek alag bipaksh ka namuna diya hai.
          Reply

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