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जल्‍लीकट्टू विवाद: ‘एक्टिविस्‍ट’ मेनका गांधी पर भारी पड़ा मंत्री का किरदार, बेटे वरुण गांधी की वजह से साधनी पड़ी चुप्‍पी?

केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन ने ट्विटर पर सफाई देते हुए कहा, "मैंने कुछ मिनट पहले ही मेनका गांधी से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि वो जल्लीकट्टू के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट नहीं गई हैं। टीवी चैनलों पर इस बारे में गलत खबर आ रही है।"
महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी। (फाइल फोटो)

तमिलनाडु में हजारों लोगों के जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध के खिलाफ सड़कों पर उतरने की धमक राज्य के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम से लेकर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दरवाजे तक सुनायी दी। रजनीकांत, कमल हासन, एआर रहमान और धनुष जैसे फिल्मी सितारे तक प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए। सीएम पन्नीरसेल्वम ने पीएम मोदी से इस मुद्दे पर मुलाकात की। तमिलनाडु सरकार ने एक अध्यादेश लाकर जल्लीकट्टू पर लगे रोक को खत्म किया लेकिन उसके बाद इंसानों और सांडों के बीच प्रतिद्वंद्विता वाले इस आयोजित इस खेल में तीन लोगों की जान चली गयी। लेकिन इस पूरे मामले पर मोदी कैबिनेट की मंत्री और भारत में शायद पशु अधिकारों की सबसे चर्चित प्रवक्ता मेनका गांधी की चुप्पी पर सभी हैरान हैं।

मेनका गांधी पशु अधिकारों से जुड़ा कोई भी मुद्दा उठाने का कोई भी मौका कभी नहीं छोड़तीं। मेनका जल्लीकट्टू का अतीत में खुलकर विरोध भी कर चुकी हैं। साल 2015 में मेनका ने जल्लीकट्टू को “पश्चिमी अवधारणा” बताते हुए कहा था कि इस खेल में इंसान और पशु दोनों मारे जाते हैं। मेनका ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जल्लीकट्टू पर रोक लगाने का स्वागत करते हुए कहा था कि भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है।

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू पर रोक के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच ही कुछ तमिल चैनलों ने खबर चला दी कि मेनका गांधी और उनका संगठन पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए) जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध जारी रखने के लिए सर्वोच्च अदालत की शरण ले सकते हैं। इस अफवाह के खतरे भापंते हुए केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमन ने ट्विटर पर सफाई देते हुए कहा, “मैंने कुछ मिनट पहले ही मेनका गांधी से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि वो जल्लीकट्टू के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट नहीं गई हैं। टीवी चैनलों पर इस बारे में गलत खबर आ रही है।”

अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि भाजपा आलाकमान ने मेनका को इस मुद्दे पर चुप रहने की “सलाह” दी थी। तमिलनाडु सरकार को अध्यादेश लाने में जिस तरह मोदी सरकार ने मदद की उससे साफ था कि सरकार का इस मुद्दे पर रवैया क्या है। रिपोर्ट के अनुसार यूपी विधान सभा चुनाव में अपने बेटे वरुण गांधी को किनारे किए जाने से पहले से ही बैकफुट पर जा चुकी मेनका जल्लीकट्टू के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के हिंसक होने की खबरों की वजह से पीछे हट गयीं। कुछ लोगों का कहना है कि सांडों के भविष्य से ज्यादा मेनका को बेटे के भविष्य की चिंता है। उनके किसी फैसले से नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह नाराज हुए इसका सीधे असर 36 वर्षीय वरुण के राजनीतिक करियर पर पड़ेगा।

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