December 03, 2016

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जस्टिस काटजू और जस्टिस गोगोई के बीच हुई ऐसी गरमागरम बहस, फिर गुस्साए जज बोले-गार्ड इन्हें बाहर ले जाओ

पहले जस्टिस काटजू ने अटार्नी जनरलन के साथ खंडपीठ से सहयोग किया और यह बताने का प्रयास किया कि हत्या के आरोप में दोषियों को बरी करने में किस तरह से न्यायाधीशों ने गंभीर चूक की।

जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मार्कन्डेय काटजू (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अप्रत्याशित कार्रवाई देखने को मिली। कोर्ट ने रिटायर्ड जज जस्टिस मार्कन्डेय काटजू की ‘असंयमित’ और न्यायपालिका को ‘बदनाम’ करने वाली भाषा पर क्षोभ जताते हुए उनके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है। जस्टिस काटजू शुक्रवार को कोर्ट में तीन जजों की बेंच के समक्ष उपस्थित हुये थे। इस दौरान बेंच के साथ उनकी तीखी झड़प हुयी। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस पी सी घोष और जस्टिस उदय यू ललित की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हाल ही में एक ब्लॉग में जस्टिस काटजू का बयान फैसले पर नहीं बल्कि न्यायाधीशों पर गंभीर हमले जैसा है और इसलिए उन्हें अवमानना नोटिस दिया जा रहा है। जस्टिस काटजू ने इस फैसले का प्रतिवाद किया और कहा कि जज उन्हें धमकी दे रहे हैं और यह उनके लिये शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश के साथ इस तरह का आचरण करना उचित नहीं है।

जस्टिस गोगोई ने कोर्ट के उत्तेजनापूर्ण माहौल में जैसे ही अपना आदेश सुनाया तो जस्टिस काटजू ने कहा, ‘मैं इससे डरता नहीं हूं। मुझे धमकी मत दीजिये।’ इस पर जस्टिस गोगोई ने जस्टिस काटजू को चेतावनी देते हुये कहा, ‘मुझे और अधिक उकसाइए नहीं।’ इस पर जस्टिस काटजू ने कहा, ‘आप इस तरह की धमकी देकर मुझे भड़का रहे हैं। आपने मुझे यहां आने और आपकी मदद करने का अनुरोध किया था।’ इस पर जस्टिस गोगोई ने कहा, ‘क्या यहां पर कोई है जो जस्टिस काटजू को (बाहर) ले जाये।’ इस पर जस्टिस काटजू ने पलट कर जवाब दिया, ‘यह कैसा आचरण है। आपके अनुरोध पर ही मैं यहां आया था। क्या मुझसे पेश आने का यही तरीका है।’

वीडियो देखिए: सुप्रीम कोर्ट ने मार्कंडेय काटजू को अवमानना नोटिस जारी किया; दुर्व्यवहार करने पर कोर्ट से बाहर निकाला

इसके बावजूद, खंडपीठ ने अपना आदेश लिखना जारी रखा और कहा कि पहली नजर में बयान (काटजू का) न्यायाधीशों पर गंभीर हमले जैसा है न कि फैसले पर, इसलिए अवमानना नोटिस दिया जा रहा है। सौम्या हत्याकांड में आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी करने के फैसले के खिलाफ केरल सरकार और मृतक की मां की पुनर्विचार याचिका खारिज किये जाने के बाद अवमानना का मसला उठा। दरअसल जस्टिस काटजू को सुप्रीम कोर्ट ने तलब किया था क्योंकि उन्होंने अपने ब्लॉग में दावा किया था कि सौम्या हत्याकांड के आरोपियों को बरी करने के फैसले में त्रुटियां हैं और उनसे पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ की मदद का अनुरोध किया गया था।

जस्टिस रंजन गोगोई को संबोधित करते हुये जस्टिस काटजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जज को इस तरह से आचरण नहीं करना चाहिए और यह उनके लिये धमकी जैसा है। जस्टिस गोगोई जब अपना यह आदेश सुना चुके कि क्यों नहीं उनके खिलाफ न्यायपालिका को बदनाम करने के लिये अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाये तो जस्टिस काटजू ने कहा, ‘मेरे साथ मजाकिया बनने की कोशिश मत कीजिये। मैं यहां आपके अनुरोध पर आया। मेरे साथ इस तरह पेश मत आइये।’

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सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी का दृष्टिकोण जानने के बाद जस्टिस काटजू को नोटिस जारी किया। रोहतगी को जस्टिस काटजू के ब्लॉग की एक प्रति दिखाई गयी थी जिसे उन्होंने ‘बदनाम’ करने वाला बताया था। इस कथन का संज्ञान लेते हुये पीठ ने कहा, ‘हम अवमानना नोटिस जारी कर रहे हैं।’ इससे हतप्रभ रोहतगी ने कहा कि उनकी राय उन्हें दिखाये गये ब्लॉग में रेखांकित अंश तक ही सीमित थी और उन्होंने पूरा ब्लाग नहीं पढ़ा था। अटार्नी जनरल ने कहा, ‘मैं अपना दृष्टिकोण बदल रहा हूं और मैं पूरा पेज पढ़ रहा हूं। रेखांकित अंश असंयमित है और इससे आगे कुछ नहीं।’ पीठ ने जब जस्टिस काटजू के ब्लॉग के दूसरे हिस्से की ओर ध्यान आकर्षित किया जो रेखांकित नहीं किया गया था, तो रोहतगी ने कहा कि दूसरा अंश भी असंयमित हैं। जस्टिस काटजू ने बार-बार दोहराया कि वह पीठ के समक्ष उपस्थित हुये हैं और उसे धमकी नहीं देनी चाहिए क्योंकि वह भी पीठ के वरिष्ठ सदस्य थे।

हालांकि, इससे पहले जस्टिस काटजू ने अटार्नी जनरलन के साथ खंडपीठ से सहयोग किया और यह बताने का प्रयास किया कि हत्या के आरोप में दोषियों को बरी करने में किस तरह से न्यायाधीशों ने गंभीर चूक की। जस्टिस काटजू ने कहा कि न्यायाधीशों ने एक निर्णय पर पहुंचने से पहले ‘कॉमन सेन्स’ का इस्तेमाल नहीं किया कि पीड़ित को मौत के लिये ढकेला गया क्योंकि दोषियों द्वारा उसे जख्मी किये जाने के बाद वह अर्धचेतन अवस्था में धीमी हुये ट्रेन से कूदी थी। गौरतलब है कि पिछले महीने ही कोर्ट ने जस्टिस काटजू से 11 नवंबर को उपस्थित होने और इस फैसले की आलोचना करने संबंधी उनकी फेसबुक पोस्ट पर बहस के लिये कहा था जिसकी वजह से सौम्या बलात्कार मामले के आरोपी फांसी के फंदे से बच गये थे। इस मामले में आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया था।

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First Published on November 12, 2016 10:03 am

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