December 09, 2016

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भोपाल जेल से सिमी के 8 कार्यकर्ताओं के भागने के बाद हाईअलर्ट, गृह मंत्रालय ने मप्र सरकार से मांगी रिपोर्ट

31 अक्टूबर तड़के भोपाल जेल से सिमी के आठ कार्यकर्ता जेल के प्रहरी की हत्या कर फरार हो गए थे। जिसे बाद में पुलिस ने इनकाउंटर में ढेर कर दिया।

Author नई दिल्ली | October 31, 2016 21:43 pm
केंद्रीय गृह मंत्रालय।

भोपाल स्थित केंद्रीय जेल से सोमवार (31 अक्टूबर) तड़के प्रतिबंधित गुट सिमी के आठ कार्यकर्ताओं के भागने के बाद हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश की सरकार से घटना के संबंध में रिपोर्ट मांगी है। तीन साल में सिमी के कार्यकर्ताओं की जेल तोड़ने की यह दूसरी घटना है। इससे पहले वर्ष 2013 में मध्यप्रदेश के खंडवा में एक जेल से सिमी के सात सदस्य भाग निकले थे। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यहां बताया कि बीती रात हुई इस घटना के बाद आठों बंदियों की तलाश के लिए पूरे देश में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गौरतलब है कि सोमवार तड़के भोपाल जेल से सिमी के आठ कार्यकर्ता जेल के प्रहरी की हत्या कर फरार हो गए। सूत्रों ने बताया कि मध्यप्रदेश से लगे सभी राज्यों को विशेष तौर पर सतर्क रहने तथा सीमाओं पर खास तौर पर नजर रखने के लिए कहा गया है।

केंद्रीय सुरक्षा अधिकारी राज्य पुलिस अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और जानकारियों का आदान प्रदान हो रहा है ताकि फरार कैदियों को गिरफ्तार किया जा सके। गृह मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार से इस घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है जिससे यह पता चल सके कि क्या जेल प्रशासन की ओर से कोई चूक हुई या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं कि एक अक्तूबर 2013 को खंडवा स्थित जेल से भागे सिमी के सात कार्यकर्ताओं में से चार को तीन साल तक छिपे रहने के बाद मुश्किल से पकड़ा गया था और इन तीन साल में यह उग्रवादी आतंकवाद की कई और बैंक में लूटपाट की एक घटना में लिप्त थे।

यहां देखें मुठभेड़ का वीडियो

एक अक्तूबर 2013 को सिमी के सात सदस्य मध्यप्रदेश के खंडवा में स्थित जिला जेल से 14 फुट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए थे। इनमें से एक कैदी ने अगले दिन आत्मसमर्पण कर दिया था और एक अन्य कैदी को मध्यप्रदेश के बड़वानी से दिसंबर 2013 में पकड़ा गया था। तीसरा कैदी पांच अप्रैल 2015 को तेलंगाना पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में मारा गया था। चार कैदियों की पुलिस लगातार तीन साल तक तलाश करती रही और फरवरी 2016 में इन्हें ओडिशा के राउरकेला से गिरफ्तार किया गया। जब चारों कैदी फरार थे तब वह लोग मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में आतंकवादी गतिविधियों में कथित तौर पर लिप्त थे।

आशंका है कि यह लोग तेलंगाना के करीमनगर स्थित एक बैंक में लूटपाट के एक मामले में और एक फरवरी 2014 को चेन्नई सेंट्रल स्टेशन पर बेंगलुरु-गुवाहाटी ट्रेन में हुए विस्फोट में लिप्त थे। इस विस्फोट में एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई थी। एक मई 2014 को पुणे के फर्शखाना पुलिस थाने में और 10 जुलाई 2014 को विश्रामबाग पुलिस थाने के समीप हुए इस विस्फोट में भी इन लोगों का हाथ होने की आशंका है। बताया जाता है कि यह लोग उत्तराखंड के रूड़की और उत्तर प्रदेश के बिजनौर में हुई बम विस्फोट की घटनाओं में भी कथित तौर पर लिप्त थे।

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First Published on October 31, 2016 1:56 pm

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