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Hole Punch History: दिखने में छोटा सा, लेकिन बहुत काम का है होल पंच, जानें इससे जुड़ी अहम बातें

Hole Punch History in Hindi: इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले एक छोटे से उपकरण को गूगल ने मंगलवार को अपने होमपेज पर डूडल के तौर पर जगह दी।
Author नई दिल्ली | November 14, 2017 20:21 pm
Hole Punch History: गूगल ने अपने डूडल में होल पंच के आविष्कार का क्रेडिट एक जर्मन शख्स फ्रेडरिक जोनेखेन को दिया है।

Hole Punch History: इंसान की रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाले एक छोटे से उपकरण को गूगल ने मंगलवार को अपने होमपेज पर डूडल के तौर पर जगह दी। यह उपकरण कुछ और नहीं, कागजों में छेद करने वाला होल पंच है। इसके जरिए कागजों को फाइल में लगाने के लिए होल बनाने, टिकटों में छेद करने आदि का काम आसानी से किया जाता है। आज जब हर तरफ डिजिटल का जोर है, ऐसे में एक 131 साल पुराना आविष्कार हमारे बीच अब भी प्रासंगिक है। आइए जानते हैं होल पंच से जुड़ीअहम बातें

1.आविष्कारक पर पेच
कहा जाता है कि होल पंच का अविष्कार मशूहर इन्वेंटर बेनजामिन स्मिथ ने किया था। हालांकि, गूगल ने अपने डूडल में होल पंच के आविष्कार का क्रेडिट एक जर्मन शख्स फ्रेडरिक जोनेखेन को दिया है। उसने होल पंच के पेटेंट के लिए दावा किया, जो उसे 14 नवंबर 1886 को दे दिया गया।

2. अमेरिका में तुरंत पहुंचा होल पंच
अमेरिका ने भी खुद से होल पंच का ईजाद कर लिया। अमेरिका में सबसे पहले होल पंच का पेटेंट हासिल करने का श्रेय मेसाचुसेट्स के एक शख्स बेंजामिन स्मिथ को जाता है। कुछ साइटों ने तो बेंजामिन को ही इसका असली आविष्कारक माना है। बता दें कि बेंजामिन ने अपने उपकरण का नाम कंडक्टर पंच रखा था।

3.वक्त के साथ बेहतर होता गया होल पंच
आविष्कार के बाद इस छोटे से उपकरण में गुजरते वक्त के साथ कई बदलाव हुए। बदलाव का मकसद इसके इस्तेमाल को आसान बनाना था। चार्ल्स ब्रूक्स नाम के एक अमेरिकी शख्स को जर्मन खोज वाले होल पंच को बेहतर करने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने इस उपकरण में छोटा सा बक्सा लगाया, जिसमें छेद करने की वजह से उत्पन्न हुए कागज इकट्ठा हो जाते थे।

4.20वीं और 21वीं शताब्दी में और बेहतर हुआ होल पंच
दिखने में होल पंच भले ही एक अदना सा उपकरण लगे लेकिन गुजरते वक्त में इसमें काफी ज्यादा बदलाव हुए हैं। ये बदलाव 21वीं शताब्दी तक हुए। वक्त के साथ ये प्लायर के आकार के बनने लगे। इसका मूलभूत डिजाइन तो वही रहा, लेकिन हल्का बनाने के लिए बॉडी में प्लास्टिक का इस्तेमाल होने लगा। वहीं, कटर की जगह लोहे या आम मेटल के स्थान पर स्टील का इस्तेमाल होने लगा।

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