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“मोदी राज में ‘हिंदू राष्ट्र और संस्कृत’ जैसे मुद्दों ने सर उठाना शुरू कर दिया है”

नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर कटाक्ष करते हुए द्रमुक नेता एम के स्टालिन ने आज कहा कि देश मिश्रित अर्थव्यवस्था से हट कर पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का रुख कर रहा है और कॉरपोरेट घराने ‘‘बहुत कुछ हासिल करने के लिए’’ तैयार प्रतीत हो रहे हैं।
Author July 10, 2017 15:34 pm
अखबार ने कहा, ‘‘मोदी अपनी घरेलू छवि चमकाने के लिए सीमा विवादों एवं सुरक्षा मुद्दों पर भी चाल चल रहे हैं जबकि चीन के साथ समझौते में फायदा उठाना चाहते हैं।’’

नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर कटाक्ष करते हुए द्रमुक नेता एम के स्टालिन ने आज कहा कि देश मिश्रित अर्थव्यवस्था से हट कर पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का रुख कर रहा है और कॉरपोरेट घराने ‘‘बहुत कुछ हासिल करने के लिए’’ तैयार प्रतीत हो रहे हैं।

द्रमुक के कोषाध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने यहां एक साक्षात्कार में पीटीआई को बताया, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में रास्ता मिलीजुली अर्थव्यवस्था से हट कर पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की ओर जा रहा है।’’

उन्होंने मोदी सरकार के कामकाज के आकलन के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि ऐसे संकेत नजर आ रहे हैं कि गरीब अपनी समस्याओं से उबर ही न पाएं। ….और कॉरपोरेट घराने तथा बड़े निवेशक बहुत कुछ हासिल करने के लिए तैयार प्रतीत हो रहे हैं।
स्टालिन ने कहा ‘‘मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद छह माह में बहुत कुछ कहा और कई घोषणाएं की गईं।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘हिंदू राष्ट्र और संस्कृत’’ जैसे आरएसएस के प्रतीकों ने भी अपना सर उठाना शुरू कर दिया है। उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा की तरह ही द्रमुक में पीढ़ीगत बदलाव की अपेक्षा की जा सकती है जो भगवा दल के पक्ष में हो। उन्होंने कहा ‘‘स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि मोदी की सफलता पीढ़ीगत अंतराल की वजह से है।’’

द्रमुक में स्टालिन के पिता करुणानिधि लंबे समय से पार्टी अध्यक्ष बने हुए हैं। स्टालिन की हैसियत उनके बाद है। स्टालिन ने कहा ‘‘जहां तक द्रमुक का सवाल है तो एकता के लक्ष्य की दिशा में अतीत, वर्तमान और भावी पीढ़ियां एकजुट होती रहीं और काम करती रही हैं।’’

स्टालिन ने कहा ‘‘मुझे नहीं लगता कि भाजपा का (पीढ़ीगत बदलाव का) फॉर्मूला तमिलनाडु में कारगर होगा। द्रमुक से निष्कासित या खुद पार्टी छोड़ कर गए लोगों की वापसी के आसार के बारे में पूछने पर द्रमुक नेता ने कहा ‘‘जिन्हें पछतावा होता है, उन्हें अपनाने के लिए पार्टी हमेशा तैयार रहती है।’’
उन्होंने कहा ‘‘पार्टी छोड़ कर गए या निष्कासित किए गए लोग द्रमुक के विशाल परिवार का हिस्सा हैं।’’

स्टालिन के बड़े भाई और पूर्व केंद्रीय मंत्री एम के अलागिरी तथा उनके समर्थकों को इस साल जनवरी में पार्टी से निकाल दिया गया था। हाल ही में अभिनेत्री खुशबू द्रमुक छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गई हैं। वर्ष 2016 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों के साथ गठबंधन की संभावना के बारे में स्टालिन ने कहा ‘‘अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।’’

क्या स्टालिन नरेंद्र मोदी की तरह अकेले ही चुनाव अभियान की अगुवाई करेंगे। इस पर उन्होंने कहा ‘‘यह तुलना उचित प्रतीत नहीं होती और हमारे अभियान को हमारी पार्टी के अध्यक्ष करुणानिधि दिशानिर्देश देंगे।’’

लोकसभा चुनाव में स्टालिन ने पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया था और पार्टी को गहरा झटका लगा था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के चुनाव के लिए चरणबद्ध तरीके से रणनीतियां बनाई जा रही हैं। चुनाव से पहले पार्टी को मजबूत करने के लिए राज्य भर का दौरा कर द्रमुक कार्यकताओं से मिल रहे 61 वर्षीय स्टालिन ने कहा ‘‘पार्टीजन उत्साह भरे मूड में हैं।’’

वर्ष 2011 में विधानसभा चुनाव हारने वाली द्रमुक लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत पाई।

 

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