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सिर कलम किए गए सैनिक के पिता ने याद दिलाया एक के बदले 10 सिर का चुनावी वादा, अफसरों के सामने बड़ा सवाल- कैसे दिखाएं शहीद का चेहरा

मंगलवार को कश्मीर के माछिल में पाकिस्तानी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। शहीद हुए तीन जवानों के शव में से एक शव के साथ बर्बरता भी की गई थी।
राइफलमैन प्रभु सिंह के पिता चंद्र सिंह और प्रभु सिंह की 10 महीने की बेटी पलक। (Express Photo)

राजस्थान के जोधपुर में जन्मे राइफलमैन प्रभु सिंह बुधवार को 25 साल के हो जाते। लेकिन जन्मदिन से एक दिन पहले ही कश्मीर के माछिल सेक्टर में पाकिस्तानियों के हमले में वह शहीद हो गए। प्रभु सिंह के साथ दो अन्य जवान भी शहीद हुए। शहीद हुए तीनों जवानों के शव में से प्रभु सिंह शव के साथ बर्बरता की गई थी और उनका सिर कलम किया गया था। सूचना मिलने के बाद से ही शेरगढ़ तहसील में प्रभु सिंह के घर मातम पसरा है। शहीद प्रभु सिंह के पिता चंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को अब पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाना ही चाहिए, नहीं तो देश के जवान यूं ही मरते रहेंगे। उन्होंने पीएम मोदी के 2014 में एक सिर के बदले 10 सिर वाले चुनावी वादे की भी याद दिलाई। चंद्र सिंह ने कहा, “चुनावी वादे कभी पूरे नहीं होते। कुछ ना कुछ कमी रह जाती है। प्रधानमंत्री को अब कुछ करना ही चाहिए।”

माछिल सेक्टर में शहीद हुए प्रभु सिंह सिर्फ 25 साल के थे। दो साल पहले ही शादी हुई और 10 महीने की मासूम बेटी पलक है। अपने परिवार की रोजी-रोजी का एकमात्र सहारा प्रभु दिवाली के समय छुट्टी पर घर आए थे। चार बहनों के इकलौते भाई प्रभु के दो बहनों की शादी हो चुकी है जबकि 2 बहनों की शादी की जिम्मेदारी अभी उनके कंधों पर बाकी थी।

सालों से चली आ रही परंपरा:

राइफलमैन प्रभु सिंह का परिवार 100 से ज्यादा सालों से देश की सेवा कर रहा है। शहीद के पिता चंद्र सिंह ने बताया कि जब प्रभु सिंह पैदा हुआ था उन्होंने तभी फैसला कर लिया था कि इसे फौज में भेजेंगे। चंद्र सिंह ने बताया, “किसी और पेशे में जाने का सवाल ही नहीं उठता था। मेरे पिता अचल सिंह ने भी कई सालों तक देश की सेवा की थी। मैं भी 1979 से 1998 तक फौज में रहा था। मेरी पोस्टिंग भी जम्मू-कश्मीर में रही थी। मेरे तीन भाई भी सेना और पुलिस में रहे चुके हैं। देश की सेवा करना हमारी परंपरा रही है।”

कैसे दिखाएं चेहरा: 

प्रभु सिंह का शव बुधवार को श्रीनगर लाया गया। मौसम खराब होने के कारण नहीं आगे नहीं भेजा जा सका। गुरुवार को मौसम साफ हुआ तो शव पहले चंडीगढ़, फिर जोधपुर लाया जाएगा। लेकिन अधिकारियों के आगे बड़ा सवाल है कि परिवार को शहीद का चेहरा दिखाया जाए या नहीं। कुछ रिश्तेदारों का कहना है कि परिवार को आखिरी बार चेहरा देखने का मौका जरूर दिया जाना चाहिए। वहीं, अधिकारियों को डर है कि इससे कुछ सदस्य विचलित हो सकते हैं, खासतौर पर महिलाएं।

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