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हरियाणा: नई पार्टी बनाकर बीजेपी को सपोर्ट करेंगे कांग्रेसी हुडा, पीएम मोदी से हो चुकी हैं तीन मुलाकातें?

हाल ही में मानसून सत्र के अंतिम दिन संसद के सेंट्रल हॉल में भी पीएम मोदी और हुड्डा आपस में बात करते हुए दिखाई दिए थे।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा पीएम नरेंद्र मोदी से मिलते हुए।

दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा बड़ी जोर-शोर से है कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा कांग्रेस का हाथ छोड़कर नई क्षेत्रीय पार्टी बनाएंगे और फिर भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में सपोर्ट करेंगे। रेडिफ डॉट कॉम के मुताबिक इस सिलसिले में हुड्डा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन बार मिल चुके हैं। माना जा रहा है कि हुड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय के बीच इस सिलसिले में खिचड़ी पकाई जा रही है। अगर ऐसा होता है तो कांगेस के लिए यह बड़ा नुकसान होगा।

बता दें कि अभी हाल ही में मानसून सत्र के अंतिम दिन संसद के सेंट्रल हॉल में भी पीएम मोदी और हुड्डा आपस में बात करते हुए दिखाई दिए थे। उस दिन सेंट्रल हॉल में पीएम मोदी ने आगे बढ़ते हुए पूछा था, “हुड्डा भाई कैसे हैं आप?”

राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि चूंकि सीबीआई और ईडी रॉबर्ट वाड्रा के सभी लैंड डील की जांच कर रहा है। लिहाजा, हुड्डा को इस बात का डर है कि कहीं वो रॉबर्ट वाड्रा के लैंड डील में खुद न फंस जाएं। इसलिए वो भाजपा और खासकर पीएम मोदी से दोस्ती आगे बढ़ा रहे हैं।

इन मुलाकातों और सियासी खिचड़ी की जानकारी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को है या नहीं? इस पर राजनीतिक विश्लेषक एकमत नहीं है। मगर यह साफ है कि बिहार कांग्रेस की तरह ही हरियाणा कांग्रेस में भी संकट चल रहा है, जो पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

गौरतलब है कि हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री रहे हुड्डा से जब यह पूछा गया कि आपकी और पीएम मोदी की मुलाकात के क्या राजनीतिक मायने हैं तब उन्होंने कहा था, ‘यह एक शिष्टाचार भेंट थी और इस मुलाकात के कोई राजनीतिक मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। राजनीति में होने की वजह से हम कई लोगों से मिलते रहते हैं।’ हुड्डा ने कहा, ‘हम एक दूसरे को निजी तौर पर जानते हैं। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो दिल्ली में मुख्यमंत्रियों की आधिकारिक बैठकों के दौरान हम (राज्यों के वर्णमाला संबंधी सीट प्रबंधन के मुताबिक) अगल-बगल बैठा करते थे। मेरे अच्छे संबंध हैं, लेकिन वह अलग बात है और राजनीति अलग है।’

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  1. B
    bitterhoney
    Sep 14, 2017 at 10:58 pm
    वाह रे राजनीती वाह. राजनीती की मंडी में हर व्यक्ति बिकने के लिए तैयार है. जो नहीं बिका है उसका अभी भाव नहीं लगा है. मोदी भी बिकेंगे कोविंद भी बिकेंगे. अब तो डर इस बात का है कि हमें भी बिकने पर मजबूर कर दिया जायेगा.
    (1)(0)
    Reply
    1. विशेष
      Sep 14, 2017 at 8:53 pm
      कृपया इतने बड़े अखबार समूह का होने के बाद बेबुनियाद बातें न लिखें। शीर्षक के अंत में " ?" लगाकर आप कानूनी उलझनों से शायद अपने आप को बचा लें लेकिन रामनाथ गोयनका जी की बनाई साख को खराब करने में आपकी पत्रकारिता को आमजन माफ नहीं करेंगे। तथ्यपरक बातें लिखिए ।
      (1)(0)
      Reply
      सबरंग