ताज़ा खबर
 

फिर सुर्खियों में गुरमेहर कौर, ब्लॉग में लिखा, ‘मेरे पापा शहीद हैं लेकिन मैं उन्हें इस तरह नहीं जानना चाहती’

गुरमेहर कौर ने 'आई एम' शीर्षक नाम से एक ब्लॉग लिखा है। इस ब्लॉग में गुरमेहर कौर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में हुए विवाद के बाद अपनी भावनाएं बयां की है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर ने एबीवीपी के खिलाफ कैम्पेन चलाया था। ( Photo Source: Facebook)

गुरमेहर कौर एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर वही लड़की जिसने कहा था कि मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं जंग ने मारा है। गुरमेहर इस बार अपने ब्लॉग को लेकर सुर्खियां बटोर रही है। गुरमेहर कौर ने ‘आई एम’ शीर्षक नाम से एक ब्लॉग लिखा है। इस ब्लॉग में गुरमेहर कौर ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में हुए विवाद के बाद अपनी भावनाएं बयां की है। रामजस कॉलेज में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के बीच जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। इस विवाद में गुरमेहर ने छात्र संगठन ABVP के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।  गुरमेहर अपने आलोचकों पर एक बार फिर हमलावर दिख रही है। गुरमेहर लिखती हैं मैं कौन हूं? इस सवाल के जवाब में वह आगे कहती हैं, कुछ दिन पहले तक मैं बिना झिझक के इस सवाल का अपने अंदाज में जवाब दे सकती थी, लेकिन अब नहीं। तो आखिर मैं हूं कौन? क्या मैं वह हूं जो ट्रोल्स समझते हैं? क्या मीडिया जैसा मुझे दिखाती है मैं वह हूं? क्या मेरे बारे में जो सेलेब्रेटीज समझते हैं मैं वो हूं? गुरमेहर कहती हैं कि नहीं मैं वह नहीं हूं। मैं टीवी स्क्रीन पर प्लेकार्ड पकड़े दिखने वाली लड़की जैसी हूं जो जरुर पर असल में मैं वो नहीं हूं।

गुरमेहर अपनी भावनाओं को अल्फाज में पिरोती हुई आगे कहती है, ‘मैं अपने पापा की बेटी हूं। मैं उनकी गुड़िया हूं।’ बकौल गुरमेहर, ‘मैं आदर्शवादी हूं, एथलीट हूं, युद्ध का विरोध करने वाली हूं। मैं आपकी तरह गुस्सैल, बदला लेने वाली और युद्ध का समर्थन करने वाली नहीं हूं, लेकिन आपने मुझसे उम्मीदें ऐसी ही पाल रखी थीं। मैं युद्ध नहीं चाहती हूं क्योंकि मैं इसकी कीमत जानती हूं।

गुरमेहर अपने ब्लॉग में लिखती हैं कि मेरे पिता शहीद हैं लेकिन मैं उन्हें इस तरह जानना नहीं चाहती हूं। मैं उन्हें उस शख्स के तौर पर जानती हूं जो कार्गो की बड़ी जैकेट पहनते थे, जिनकी जेबें मिठाइयों से भरी होती थीं, जिनका कंधा मैं जोर से पकड़ लेती थी, ताकि वो मुझे छोड़कर न चले जाएं। लेकिन वो चले गए और फिर कभी वापस नहीं आए। मेरे पिता शहीद हैं। मैं उनकी बेटी हूं। लेकिन, मैं आपके ‘शहीद की बेटी’ नहीं हूं।

DU बचाओ कैंपेन से अलग हुई गुरमेहर कौर; कहा- "मुझे अकेला छोड़ दो"

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.