ताज़ा खबर
 

अमित शाह ने युवाओं को चेताया- BJP विरोधी सोशल मीडिया कैम्पेन से ना हों गुमराह, लगाएं अपना दिमाग

अमित शाह ने युवाओं से कहा कि सोशल मीडिया यूज करते वक्त दिमाग का इस्तेमाल भी करें।
Author September 11, 2017 12:44 pm
युवाओं को संबोधित करते अमित शाह, साथ में हैं गुजरात के सीएम विजय रुपानी और राज्य भाजपा प्रमुख जीतू वघानी। (Photo Source: Indian Express )

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने युवाओं को चेताया है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे भाजपा विरोधी कैम्पेन से सावधान रहें। उसे देखकर गुमराह ना हों और अपने दिमाग का इस्तेमाल करें। गुजरात सरकार के विकास के दावे के खिलाफ सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाया जा रहा है। इस पर रविवार को युवाओं को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह एक ‘प्रोपेगंडा’ है, इस पर विश्वास करने से बचें और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते वक्त अपनी दिमाग का भी इस्तेमाल करें। उन्होंने अपने संबोधन के दौरान इस पर भी जोर दिया कि गुजरात का पाटीदार आरक्षण आंदोलन का झुकाव एक पार्टी की ओर था, शाह का संकेत कांग्रेस की ओर था।

अमित शाह, अहमदाबाद के पंडित दीनदयाल उपाध्याय हॉल में आयोजित अधिकाम गुजरात युवा टाउन हॉल समारोह में युवाओ को संबोधित कर रहे थे। इसके अलावा गुजरात की 32 जगहों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी युवा इस इवेंट से जुड़े हुए थे। शाह ने पिछले दो दशक में राज्य में भाजपा सरकार की उपलब्धियां भी गिनवाईं। उन्होंने पहले करीब 45 मिनट युवाओं को संबोधित किया और फिर उनके 16 सवालों के जवाब दिए। भाजपा का दावा है कि करीब 1.8 लाख युवाओं ने इस समारोह में हिस्सा लिया और करीब 3 लाख सवाल पूछे गए, इनमें से कुछ लोगों ने सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए भी सवाल पूछे थे। शाह ने अपने संबोधन में गुजरात के राजनीतिक इतिहास को दो हिस्सों (1995 से पहले और 1995 के बाद) में बांट दिया। भाजपा ने गुजरात में सबसे पहले साल 1995 में अपनी सरकार बनाई थी।

सोशल मीडिया पर भाजपा विरोधी कैम्पेन को लेकर शाह ने युवाओं से कहा कि ऐसी बातों से गुमराह नहीं होना है। उन्होंने कहा, ‘युवाओं को इसमें दिमाग लगाना होगा। क्या आप यह करते है? या फिर आप इन व्हॉट्सऐप मैसेज के जरिए गुमराह होते हैं?’ इसके बाद उन्होंने युवाओं के 16 सवालों के जवाब दिए। शाह से पहला सवाल पाटीदार आरक्षण आंदोलन से जुड़ा हुआ पूछा गया, जिस पर उन्होंने कहा,’गुजरात में दो-तीन बार आरक्षण संबंधित आंदोलन हुए हैं। हर बार इन आंदोलनों ने राजनीतिक रूप अपनाया है। अगर आप ध्यान दोगे तो आपको पता लगेगा कि इन आंदोलनों का झुका केवल एक पार्टी की ओर ही रहा है। हालांकि, आंदोलनों के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी हो सकती हैं।’

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. N
    Nadeem Ansari
    Sep 11, 2017 at 12:40 pm
    Those who got in to power with help of social media, now afraid of same.
    (0)(0)
    Reply
    सबरंग