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जम्‍मू-कश्‍मीर में भी लागू हुआ जीएसटी, जेटली बोले- आर्थिक एकता के लिए बड़ी पहल

वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने केंद्रीय माल और सेवा कर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) विधेयक 2017 और एकीकृत माल और सेवा कर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) विधेयक 2017 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।
Author August 2, 2017 19:33 pm
वित्तमंत्री अरुण जेटली। (File Photo)

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में जीएसटी का विस्तार देश के साथ राज्य के आर्थिक एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है और कांग्रेस जैसे एक राष्ट्रीय दल को जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे जैसे विषय में नहीं उलझाना चाहिए क्योंकि जीएसटी के खिलाफ ऐसी दलील अलगाववादी दिया करते थे। जेटली ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जीएसटी के विस्तार से देश के साथ उसके राष्ट्रीय एकीकरण की कल्पना पूरी हो रही है। जहां तक राज्य के विशेष दर्जे को प्रभावित करने के सवाल पर बिना इसके विवाद में जाए, मैं यह कहना चाहूंगा कि वहां विधानसभा में भी यह विषय उठाया गया था विशेष दर्जें के संबंध में । यह स्पष्ट हुआ कि विशेष दर्जा प्रदेश की आर्थिक प्रगति और विकास के मार्ग में अड़चन नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल को विशेष दर्जे (अनुच्छेद 370) जैसे विषय में नहीं उलझना चाहिए । पीडीपी और भाजपा इसी बात के पक्षधर रहे हैं । मैंने कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस से समर्थन की उम्मीद की थी। वित्त मंत्रियों की उच्च अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष पहले नेशनल कांफ्रेंस के नेता ही थे जो पहले समर्थन कर रहे थे, आज विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस जैसे एक राष्ट्रीय दल को जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे जैसे विषय में नहीं उलझाना चाहिए क्योंकि जीएसटी के खिलाफ ऐसी दलील अलगाववादी दिया करते थे। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर में जीएसटी का विस्तार नहीं करते तो वहां के व्यापारियों , कारोबारियों को इनपुट क्रेडिट नहीं मिलता। पास में दूसरे राज्य में उत्पाद सस्ते होते। पास में ही पठानकोट में सामान सस्ता होता और जम्मू कश्मीर में महंगा। ऐसे में प्रदेश के लोग वहां सामान खरीदने जाते। इससे प्रदेश के कारोबारियों को तकलीफ आती। राज्य का राजस्व कम होता।

वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने केंद्रीय माल और सेवा कर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) विधेयक 2017 और एकीकृत माल और सेवा कर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) विधेयक 2017 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। ये विधेयक सरकार द्वारा पहले लागू किये गये केंद्रीय वस्तु और सेवाकर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) अध्यादेश, 2017 और एकीकृत वस्तु एवं सेवाकर (जम्मू कश्मीर पर विस्तार) अध्यादेश, 2017 की जगह लेंगे। जीएसटीएन (जीएसटी नेटवर्क) के बारे में कुछ विपक्षी सदस्यों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए अरूण जेटली ने कहा कि जीएसटीएन में लाखों लोगों का पंजीकरण होगा। जीएसटीएन का ढांचा संप्रग सरकार ने बनाया था। मेरे ऊपर उसे बदलने का दबाव था। लेकिन हमने उसमें कोई बदलाव नहीं किया क्योंकि मुझे यह ठीक लगा। अब कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे इसका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हमने ऐसा ढांचा बनाया जो तकनीकी रूप से एक सरकारी कंपनी नहीं है। मैंने केवल यह किया कि जीएसटीएन भी कैग के प्रति जवाबदेह होगा। यह ढांचा अभी तक अच्छी तरह काम कर रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटीएन को बार बार मुद्दा बनाते रहना ठीक नहीं। सरकार कड़ी नजर रख रही है। जीएसटी में कई कर श्रेणी या स्लैब होने के विषय पर जेटली ने कहा कि स्लैब ज्यादा है, मैं मानता हूं। लेकिन…….यह तर्क गरीबों के खिलाफ, अमीरों के पक्ष में है। अगर हम एक ही कर स्लैब रखेंगे तब हवाई चप्पल और बीएमडब्ल्यू कार एक कर स्लैब में आयेंगे, जो ठीक नहीं है। सभी उत्पादों पर एक दर लगा लें तो अमीर और गरीबों की वस्तुओं पर एक ही कर लगेगा। आने वाले समय में यह संभव है कि 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के स्लैब को मिलाया जाए।

सुनने में मदद पहुंचाने वाले उपकरण, सैनिटरी नैपकिन जैसे उत्पादों को शून्य कर के दायरे में लाने की मांग पर वित्त मंत्री ने कहा कि शून्य में कई वस्तुएं आ गयीं जिन पर कर नहीं है और विशेष रूप से वो चीजें जिनका उपभोग गरीब करते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन अगर इन उत्पादों को शून्य कर की स्लैब में रखेंगे तो इन्हें इनपुट क्रेडिट नहीं मिल पायेगा, और इसलिए ऐसे कुछ उत्पादों को 5 प्रतिशत कर के स्लैब में रखा गया है। यह समझना चाहिए कि ऐसे मामले में शून्य कर स्लैब वाले उत्पाद 5 प्रतिशत वाले स्लैब से महंगे हैं।

जेटली ने कहा कि पहले मनोरंजन कर राज्य लगाते थे। अलग अलग राज्यों में दर 20 से 110 प्रतिशत तक होती थी। औसत राष्ट्रीय दर 30 प्रतिशत थी। जीएसटी परिषद ने सामूहिक निर्णय लिया जो वास्तव में कटौती वाला है। उन्होंने कहा कि सेनिटरी पैड पर पहले कर 13.8 प्रतिशत था जो मूल्य में शामिल था। अब परिषद ने 12 प्रतिशत लगाया जिसे हटाने की मांग होने लगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी राज्य के वित्त मंत्री जीएसटी परिषद में बैठते हैं तो किसी दबाव में नहीं होते।

देखिए वीडियो - जीएसटी से क्या होगा सस्ता, किन वस्तुओं के बढ़ेंगे दाम...

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