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बिहार चुनाव में महागठबंधन की महाजीत

बिहार में नीतीश कुमार तीसरीबार सत्ता संभालेंगे। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में नीतीश-लालू और कांग्रेस के महागठबंधन ने 178 सीटों पर जीत हासिल की है..
Author नई दिल्ली | November 9, 2015 01:23 am
राजद कार्यालय में महागठबंधन की ऐतिहासिक जीत के बाद एक-दूसरे से गले मिलते लालू प्रसाद और नीतीश कुमार। (पीटीआई फोटो)

बिहार में नीतीश कुमार तीसरीबार सत्ता संभालेंगे। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में नीतीश-लालू और कांग्रेस के महागठबंधन ने 178 सीटों पर जीत हासिल की है। इस बार बिहार में मतदाताओं पर न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू चल पाया और न भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने चक्रव्यूह में नीतीश और लालू की जोड़ी को फंसा पाए। वोटिंग मशीनों से महागठबंधन की आंधी निकल पड़ी। तमाम चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों और एक्जिट पोल के अनुमानों व चुनावी विश्लेषकों के पांडित्य को उलटते हुए बिहार के जागरूक मतदाताओं ने नीतीश को छप्परफाड़ बहुमत दे दिया और भाजपा की अगुवाई वाले राजग को मुकाबले से बाहर कर दिया। रात आए अंतिम चुनाव नतीजों के मुताबिक 243 सदस्यों वाली विधानसभा में महागठबंधन के जद (एकी) को 71 और राजद को 80 सीटें मिली हैं। जबकि कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत हासिल हुई।

इस तरह जनता दल (एकी) और राजद के इस गठबंधन से जुड़ कर अचेत हालत में चल रही कांग्रेस को भी संजीवनी मिल गई। पिछली बार उसे दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था। इस बार उसके 41 में से करीब दो तिहाई उम्मीदवार चुनाव जीत गए। दूसरी ओर राजग के दलों- भाजपा को 53, लोजपा को 2, रालोजपा को 2 और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चे को मात्र एक सीट मिली। दो गठबंधनों के इस महासंग्राम में भी वंचितों और पीड़ितों की सियासत करने वाली भाकपा (माले) ने भी दो सीटों पर सफलता पाई है।

लालू यादव मजाक में अक्सर कहते रहे हैं कि ‘जब तक समोसे में रहेगा आलू, तब तक बिहार में रहेगा लालू’। लोकसभा चुनाव के बाद लालू यादव को हाशिए पर बता कर उनके सियासी भविष्य पर ही सवाल खड़ा करने वालों को चुनावी नतीजों ने करारा तमाचा जड़ा है। लालू की पार्टी ने नीतीश की पार्टी के बराबर ही उम्मीदवार उतारे थे। पर चुनाव में लालू के उम्मीदवार ही ज्यादा जीते। भाजपा ने नीतीश को लालू से हाथ मिलाने पर अवसरवादी बताया, तो अपने स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी को विकास का प्रतीक। लेकिन नीतीश की छवि और लालू के सामाजिक समीकरणों ने मोदी और अमित शाह की जोड़ी को चेता दिया कि बिहार को वे गुजरात या हरियाणा समझने की चूक न करें।

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रविवार को टीवी चैनलों पर शुरू में रुझान राजग के पक्ष में आए तो तमाम भाजपा नेता फूले नहीं समाए। पर दस बजे तक समीकरण उलट गए। अचानक वोटिंग मशीनों ने राजग की उलटी गिनती शुरू कर दी। नतीजे आने से पहले तक महागठबंधन के नेता लालू यादव जब 190 सीटें मिलने का दावा कर रहे थे तो कोई उन्हें गंभीरता से नहीं ले रहा था। पर लालू ने साबित कर दिया कि बिहार में मंडल-दो की लहर का उन्होंने जो संकेत दिया था, वह कमोबेश ठीक ही था। लोकसभा चुनाव में भी बेशक राजग की बिहार में आंधी चली थी, पर लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों के संयुक्त वोट भाजपा से ज्यादा ही थे। इसी वास्तविकता को समझ-बूझ कर दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और मोदी के प्रहार से बचने के लिए जहर का घूंट पीने से भी नहीं हिचके।

भाजपा का गठबंधन न नीतीश को खलनायक साबित कर पाया और न लालू यादव की जड़ों को उखाड़ पाया। इसके उलट अपने सियासी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे नीतीश और लालू ने तमाम आलोचनाओं और गड़े मुर्दों को उखाड़ने की कवायद के बीच गठबंधन के धर्म का ईमानदारी से निर्वाह किया। उसी का नतीजा है कि बिहार में एक बार फिर नीतीश का ही परचम लहराएगा। चुनाव में महागठबंधन की निर्णायक बढ़त के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और लालू प्रसाद एक साथ मीडिया के सामने आए और एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। दोनों ने महागठबंधन में विश्वास जताने के लिए जनता का धन्यवाद भी किया।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद सबसे अधिक सीटें जीत कर फिर से बिहार में एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे हैं। लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 में से 31 सीटें जीतने वाले भाजपा गठबंधन को विधानसभा चुनाव में ‘महा हार’ का सामना करना पड़ा जबकि उसके ‘महानायक’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी महाप्रचार का बीड़ा उठाते हुए विधानसभा चुनाव में 30 जनसभाएं की थीं।

भाजपा को सबसे तगड़ा झटका उसके सहयोगियों की तरफ से मिला, जो 87 सीटों पर चुनाव लड़े और केवल पांच पर ही जीत दर्ज कर सके। भाजपा को उम्मीद थी कि वह राम विलास पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा के जरिये पिछड़े और अति पिछड़े वोटों में सेंध लगा लेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।  चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की एआइएमआइएम, पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी, मुलायम सिंह की सपा, मायावती की बसपा जैसी पार्टियां का तो खाता तक नहीं खुला।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जद (एकी) नेता नीतीश कुमार को फोन करके बिहार विधानसभा चुनाव में उनके गठबंधन की जीत के लिए बधाई दी, जिसके लिए नीतीश कुमार ने उनका धन्यवाद किया।
बिहार विधानसभा चुनाव में विजयी के तौर पर उभरने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘मील का पत्थर’ साबित हुए बिहार चुनाव में समाज का ध्रुवीकरण करने की कोशिशों को जनता ने पलीता लगा दिया। बिहार चुनाव के नतीजों में देश का मिजाज झलकता है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विकल्प चाहता है।

राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि महागठबंधन ‘सांप्रदायिक’ नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेगा और जनता का आंदोलन खड़ा करने के लिए वे देश भर का दौरा करेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने रहेंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव में हार स्वीकार करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नीतीश कुमार और लालू प्रसाद को बधाई दी और कहा कि उनका दल जनादेश का सम्मान करता है। जबकि राहुल गांधी ने महागठबंधन की जीत को विभाजनकारी सोच पर एकता की, अहंकार पर विनम्रता की और नफरत पर प्यार की जीत करार दिया।

वहीं नीतीश कुमार ने केंद्र में मजबूत विपक्ष के लिए गैर भाजपा ताकतों के साथ आने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव का एक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य है और यह जरूरी है कि वे एक मजबूत विकल्प देने के लिए साथ मिलकर काम करें। उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव नतीजों का राष्ट्रीय प्रभाव होगा, क्योंकि इसने पूरे देश का ध्यान खींचा है। नतीजों से यह स्पष्ट हो गया है कि लोग राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विपक्ष और एक मजबूत विकल्प चाहते हैं।

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भाजपा नेता राम माधव ने हालांकि इन दावों को खारिज किया कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम इस बात का संकेत हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में कमी आई है। उन्होंने हालांकि इस हार के मद्देनजर सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही।

आप नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी नीतीश कुमार को ‘ऐतिहासिक जीत’ पर बधाई दी। चुनाव में भाजपा नीत गठबंधन की हार के बीच सहयोगी शिवसेना ने चुटकी लेते हुए कहा कि बिहार चुनाव परिणाम ‘एक नेता के पराभव’ का संकेत हैं। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा-‘शाबास बिहार। कांग्रेस, राजद और जद (एकी) के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को बधाई। उन्होंने राजग के झूठे दावों को पराजित करने के लिए कठिन परिश्रम किया।’

चुनाव के समय महागठबंधन के पक्ष में खुलकर समर्थन में उतरीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जीत के लिए नीतीश कुमार और लालू प्रसाद को बधाई दी और इसे ‘सहिष्णुता की विजय और असहिष्णुता की पराजय’ बताया।

पूरा होगा पैकेज का वादा:
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार को एक लाख 25 हजार करोड़ रुपए का पैकेज हर कीमत पर दिया जाएगा। चुनाव में जीत के लिए नीतीश कुमार और लालू प्रसाद को बधाई देते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि बिहार में सरकार राज्य को शांति और प्रगति के पथ पर ले जाएगी।

शाह ने स्वीकारी हार:
‘हम बिहार के लोगों के जनादेश का सम्मान करते हैं। मैं नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव को बिहार विधानसभा चुनाव में विजय के लिए बधाई देता हूं। बिहार को विकास के पथ पर ले जाने के लिए हमारी शुभकामनाएं नयी सरकार के साथ हैं।’ अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष

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