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सैन्य सेवाओं में ‘शहीद’ शब्द का इस्तेमाल नहीं: केंद्र

सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि शहीद का दर्जा सशस्त्र बलों के उन कर्मियों को नहीं दिया जाता है जो कर्तव्य के दौरान अपनी जान कुरबान कर देते है..
Author नई दिल्ली | November 14, 2015 01:22 am
डीडीसीए ने याचिका में कहा है कि केजरीवाल ने कुछ गलत, हतप्रभ करने वाले, झूठे, मानहानिपूर्ण, अपमानजनक, निराधार, दुर्भावना से प्रेरित और शर्मनाक बयान दिए।

सरकार ने शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि शहीद का दर्जा सशस्त्र बलों के उन कर्मियों को नहीं दिया जाता है जो कर्तव्य के दौरान अपनी जान कुरबान कर देते है। सरकार ने इस मामले में याचिका कोे गलत धारणा पर आधारित बताया। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति दीपा शर्मा के पीठ को सूचित किया गया, सेना, नौसेना और वायुसेना की तर्ज पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को ‘शहीद’ का दर्जा देने का अनुरोध गलत धारणा पर आधारित है क्योंकि यह दर्जा वास्तव में सेना, नौसेना और वायुसेना के कर्मियों को दिया ही नहीं जा रहा है।

हलफनामे में रक्षा मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों ने कहा कि ‘शहीद’ शब्द का तीनों सेवाओं में इस्तेमाल नहीं किया जाता है और न ही ऐसा कोई आदेश, अधिसूचना रक्षा मंत्रालय ने जारी किया कि कर्तव्य के दौरान जो मारे गए उन्हें शहीद कहा जाए। गृह मंत्रालय द्वारा भी सीएपीएफ और असम राइफल के कर्मियों के लिए भी ऐसी अधिसूचना नहीं जारी की गई। सरकार का जवाब वकील अभिषेक चौधरी और हर्ष आहूजा की जनहित याचिका के जवाब में आया है। याचिकाकर्ताओं ने सेना की भांति अर्द्धसैनिक बलों और पुलिसबलों में भी मारे गए कर्मियों के लिए शहीद का दर्जा देने की मांग की है। सरकार ने कहा, सेना, नौसेना, वायुसेना में शहीद शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग व मंत्रालय ने संयुक्त हलफनामे में कहा है, ‘अतएव, याचिकाकर्ता की प्रार्थना कि सेना, नौसेना और वायुसेना की तर्ज पर अर्द्धसैनिक सशस्त्र बल के मारे गए कर्मियों को भी शहीद का दर्ज दिया जाए, गलत धारणा पर आधारित है और निराधार है। इस बात से इनकार किया जाता है कि सीएपीएफ के कर्मी को उस सम्मान से वंचित किया जाता है जिसके वे हकदार हैं।’

चौधरी ने अपनी याचिका में सरकार को अर्द्धसैनिक सशस्त्र बलों के कर्मियों को सेना, नौसेना और वायुसेना की तर्ज पर समान वित्तीय क्षतिपूर्ति और लाभ देने का भी निर्देश देने की मांग की है। इस पर सरकार ने कहा कि परिवार, निकट रिश्तेदारों को वे ही लाभ दिए जाते हैं जो रक्षाकर्मियों को मयस्सर हैं यानी लिबरेलाइज्ड पेंशन अवार्ड्स के तहत पूर्ण पारिवारिक पेंशन यानी अंतिम तनख्वाह और उन्हीं दिशा-निर्देशों के तहत एकमुश्त क्षतिपूर्ति जो रक्षाकर्मियों के लिए मान्य है।

सरकार ने याचिकाकर्ता के इस आरोप का भी खंडन किया कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के उन कर्मियों को शहीद का दर्जा नहीं दिया जा रहा है जो उत्तराखंड में गौरीखंड के समीप हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर वायुसेना के पांच कर्मियों के साथ मारे गए। वायुसेना के इन कर्मियों को यह सम्मान प्राप्त हुआ।

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