April 23, 2017

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पीएम मोदी मेहनत करते हैं पर नतीजे आने में समय लगता है : गोविंदाचार्य

मोदी सरकार की सराहना करते हुए के एन गोविंदाचार्य ने कहा है कि केंद्र सरकार की नीयत काम करने की है और पीएम मोदी काफी परिश्रम कर रहे हैं।

Author नयी दिल्ली | November 6, 2016 14:04 pm
जाने माने चिंतक के. एन. गोविंदाचार्य। (Photo: PTI)

मोदी सरकार को राज्यों के साथ भरोसे का संवाद बनाने की सलाह देते हुए जाने माने चिंतक के एन गोविंदाचार्य ने कहा कि केंद्र सरकार के ढाई वर्षो के काम में कुछ कर दिखाने का इरादा झलकता है और प्रधानमंत्री काफी परिश्रम कर रहे हैं लेकिन परिणाम आने में अभी समय लगेगा। मोदी सरकार के ढाई वर्षो के कामकाज के बारे में पूछे जाने पर गोंविदाचर्य ने ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘कुछ कर दिखाने का इरादा तो झलकता है। बहुत परिश्रम कर रहे हैं लोग विशेष तौर पर प्रधानमंत्री । मेहनत दिखती है। परिणाम आने में अभी समय लगेगा ।’’ उन्होंने कहा कि सामान्य जन के मन में कई बार सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में सवाल, संदेह, शंकाएं उत्पन्न होती हैं। इसका कारण यह है कि चुनाव के दौरान बहुत उम्मीदें बढ़ा दी गई थीं । गोविंदाचार्य ने कहा कि केंद्र की तरफ से राज्यों की सरकारों के साथ भरोसे का संवाद बनाने की जरूरत है ।

वीडियो: रामनाथ गोयनका अवॉर्ड्स: पीएम मोदी ने कहा- “आपातकाल पर पुनर्विचार होता रहना चाहिए ताकि कोई और नेता ऐसा करने की न सोचे”

 

इस विषय पर सत्तारूढ़ दल को पहल करनी चाहिए । विपक्ष और प्रदेशों की गैर भाजपा सरकारों से विश्वास एवं संवाद बढ़ाने की जरूरत है। विपक्ष कई बार गैर जिम्मेदार ढंग से मुद्दे उठाता है फिर भी लोकतंत्र में सत्तारूढ़ पक्ष से ही अपेक्षा की जाती है कि वह संवाद की पहल करे। अन्ना आंदोलन के बाद दिल्ली में सत्तारूढ़ केजरीवाल सरकार के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि जितनी केंद्र की सरकार से उम्मीदें हैं, उससे भी ज्यादा दिल्ली की सरकार से जनता को उम्मीदें थी । मगर वे बहुत पहले राज्यपाल और विधायिका के विवाद में पड़ गए । इससे जनहित को नुकसान पहुंचा ।’’
गोविंदाचार्य ने कहा कि जवाबदेही किसकी है, इसके बारे में गर्द गुबार ने राजनैतिक वातावरण को प्रदूषित किया। जनहित की बजाए कई अवसरों पर दलीय राजनीति हावी दिखी । आरोप प्रत्यारोप में ही समय निकल गया और अंत में दलीय प्रतिस्पर्धा में जनता ही कष्ट में है।

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First Published on November 6, 2016 1:59 pm

  1. L
    lalan kumar
    Nov 6, 2016 at 10:34 am
    जनाब मेहनत नहीं, बहुत मेहनत करते हैं , पर कॉरपोरेट के लिए-देश जनता के लिए नहीं !
    Reply
    1. P
      praveen kumar
      Nov 6, 2016 at 3:29 pm
      Praveen Kumar substandard statement by govindacharya ji. u know RSS better than others. can u say why u were thrown out of there. this statement does not reflect your real stature.
      Reply
      1. S
        shivshankar
        Nov 6, 2016 at 7:53 pm
        मोदी जी जो अघषित आपात काल ले आएं हैं उनके बारे मैं भी रिसर्च होनी चाहिए
        Reply

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