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अब सरकार के रडार पर आएगी नामी-बेनामी संपत्ति

’आय से अधिक संपत्ति जुटाने वालों पर सरकार सख्त ’सात साल के सश्रम कैद से लेकर बाजार मूल्य के 25 फीसद तक हो सकता है जुर्माना ।
Author नई दिल्ली | November 23, 2016 03:25 am
प्रधानमंत्री मोदी।

नोटबंदी कर कालेधन पर कार्रवाई के बाद सरकार की तैयारी अब बेनामी संपत्तियों पर स्ट्राइक की है। इसे लेकर सरकार की ओर से बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 1988 संशोधन के बाद एक नवंबर से लागू कर दिया गया है। जानकारों की माने तो लगभग 80 फीसद काली कमाई रियल एस्टेट और सोना जमा करने पर खर्च की जाती है।
नए कानून के तहत वह संपत्ति बेनामी मानी जाएगी जो किसी और व्यक्ति के नाम हो या हस्तांतरित की गई हो लेकिन उसका प्रावधान या भुगतान किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया गया हो। इस तरह का सौदा बेनामी संपत्ति के प्रावधान या भुगतान करने वाले को तत्काल या भविष्य में लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया होता है। नए कानून में दोषी व्यक्ति को एक साल से सात साल तक के कठोर कारावास की सजा बाकी मिल सकती है। इस नए कानून के तहत उस पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। यह जुर्माना उस संपत्ति के बाजार मूल्य का 25 फीसद तक हो सकता है। पुराने कानून में तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था।

सुप्रीम कोर्ट के लीगल एडवाइजर एडवोकेट सुकुमार बताते हैं कि सरकार की ओर से सख्त किए गए नियमों का आशय केवल इतना है कि जो लोग जितनी भी संपत्ति खरीद रहे हैं या रख रहे हैं वह उनकी आय के अनुसार या उसी के अनुपात में हो। यह कदम बेतहाशा संपत्ति जुटाने वालों को सीधे तौर पर निशाने पर लेने वाला है।एडवोकेट सुकुमार ने कहा कि यह केवल मनढ़ंत बातें हैं कि कोई व्यक्ति दो मीटर या दो जमीन से ज्यादा नहीं खरीद सकता। वह बेशक खरीद सकता है लेकिन उसके पास उस खरीदी गई संपत्ति के लेनदेन का पक्का ब्योरा हो। हालांकि यह कानून पहले से ही लागू है, लेकिन इस कानून में सुधार के बाद इसे सख्त बनाया गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से जारी बयान में यह साफ किया था कि ‘मौजूदा बेनामी सौदा निषेध कानून 1988 का नाम बदलकर बेनामी संपत्ति लेनदेन कानून 1988 कर दिया गया है’।

नए कानून में ऐसे लेनदेन के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ भी जुर्माना लगाने का प्रावधान है। ऐसा करने पर कम से कम छह महीने और अधिकतम पांच वर्ष के कठिन कारावास की सजा के साथ उस संपत्ति के बाजार मूल्य के हिसाब से 10 फीसद तक राशि का जुर्माना हो सकता है।नए कानून में कोई भी कानूनी कार्रवाई सीबीडीटी की पूर्वानुमति के बिना शुरू नहीं की जाएगी। अधिकारी ने बताया कि नए कानून की मदद से रीयल एस्टेट क्षेत्र में कालेधन के प्रवाह पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इस कानून में एक एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) नियुक्त करने का प्रावधान है। जो इस कानून के तहत जब्त की जाने वाली संपत्तियों का प्रबंधन करेगा। इस नए कानून के मुताबिक, दंडनीय अपराधों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार एक या एक से अधिक सत्र अदालत या विशेष अदालतें निर्धारित कर सकती है।

हालांकि, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस कानून को पारित कराते समय यह अश्वासन दिया था कि वास्तविक धार्मिक ट्रस्टों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इसे पिछले साल 13 मई को लोकसभा में पेश किया गया था, उसके बाद उसे वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के पास भेज दिया गया। समिति ने इस पर अपनी रपट गत 28 अप्रैल को दी। लोकसभा ने इस विधेयक को 27 जुलाई को पारित किया और राज्यसभा ने दो अगस्त को इसे मंजूरी दी।

 

 

 

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