December 10, 2016

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नोटबंदी: कैश की कमी के चलते मंदिरों-दरगाहों को दान राशि बैंक खातों में जमा कराने के निर्देश

नोटबंदी के बाद हुई करंसी की कमी के चलते सरकार ने बडे़ धार्मिक स्थलों को दान में मिलने वाली नकद राशि को बैंकों खातों में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

बांके बिहारी मंदिर में नोटों की गिनती करते कर्मचारी। (Source: Express Photo/प्रवीण खन्ना)

नोटबंदी के बाद से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंकों और एटीएम पर अभी भी लोगों की कतारें बढ़ी हुई हैं। साथ ही बैंकों ने काउंटर से पुराने नोट एक्सचेंज करने की सुविधा भी बंद कर दी है और पुरानी करंसी लोग सिर्फ अपने खातों में ही जमा कर सकते हैं। इसी बीच करंसी की कमी से होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए सरकार ने वृंदावन के सबसे बड़े मंदिर को दान में मिलने वाली नकद राशि को रोज बैंक खातों म जमा करने के निर्देश दिए हैं।

बीते पाचं दिनों में बांके बिहारी मंदिर ने 1.2 करोड़ रुपये की राशि बैंक खातों में जमा कराई है। वृंदावन में रोज हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। दोपहर के समय मंदिर बंद किया जाता है ताकी मंदिर का स्टाफ और पंडित कुछ समय के लिए आराम कर सकें लेकिन अब दोपहर का समय सभी लोगों के लिए मंदिर के दान पात्र में इकट्ठा हुई राशि की गिनती करने में निकलता है। मेन हॉल में सुरक्षा अधिकारी नोटों के सील किए गए बक्सों को वकीलों और ट्रस्टी की मौजूदगी में लाते हैं।

इसके बाद उन्हें खोला जाता है और स्टाफ नोटों की गिनती शुरु करता है। मंदिर के पास यह काम पूरा करने के लिए सिर्फ ढाई घंटे का समय होता है। वहीं मंदिर अभी तक अपने 15 दान पात्रों में से सिर्फ 6 को ही खोल पाया है। एक अधिकारी के मुताबिक मंदिर के कुछ दान पात्र बीते दो महीने से बंद पड़े हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जारकारी दी कि श्रद्धालुओं के आने की तादाद में गिरावट आई है जिसका असर मंदिर को मिलने वाले दान पर भी पड़ेगा।

दूसरी तरफ वृंदावन से 70 किलोमीटर दूर अलीगढ़ में भी यही नजारा देखने को मिल रहा है। अलीगढ़ में बाबा बरछी बहादुर दरगाह को भी सरकार द्वारा दान में मिली नकद राशि को बैंक खातों में जमा कराने के निर्देश मिले हुए हैं लेकिन अधिकारियों के मुताबिक दरगाह के दान पात्र में बड़ी तादाद में कोई रकम मौजूद नहीं हैं। दरगाह के इमाम मोहम्मद नसीम ने बताया कि गुरुवार के दिन दरगाह में पैर रखने की जगह भी नहीं होती लेकिन नोटबंदी के बाद से ही लोगों का आना बहुत कम हो गया है। यात्रियों की कमी की वजह से लोकल कारोबारियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।

नूरजहां दरगाह के पास ही अपनी छोटी सी दुकान चलाकर अपना गुजारा करती हैं। नोटबंदी के बाद श्रद्धालुओं की तादाद में आई कमी से उनके फूल और चादर की दुकान का काम मंदा हो गया है। वह बताती हैं कि हर गुरुवार को वह अपनी दुकान लगाती हैं लेकिन अब बिक्री इतनी घटी है कि उनके पास सप्लायर्स को देने के लिए पैसे नहीं हैं। इसके अलावा नोटबंदी को लेकर लोगों के बीच मीडिया को लेकर भी काफी गुस्सा है। नसीम कहते हैं कि उन्होंने टीवी पर न्यूज देखना बंदकर दिया है क्योंकि सही बात कोई नहीं

बताता है। इसके अलावा दरगाह के ट्रस्टी मेहमूद भी कहते हैं कि टीवी न्यूज वाले सच नहीं दिखते। वह दिखाते हैं कि बैंकों की कतारें छोटी हुई है लेकिन सच कुछ और ही है। इसके अलावा वृंदावन के अंशुमन शर्मा ने भी कहा कि टीवी वाले गलत कर रहे हैं। उन्होंने न्यूज चैनलों पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि सब गलत बात दिखा रहे हैं। वह कहते हैं कि चैनल दिखाते हैं कि एटीएम से कतारें अब कम होने लगी है लेकिन असल में कतारें उतनी ही लंबी हैं।

वहीं 173 साल पुराने निम्बार्क कोट मंदिर के पुजारी वृंदावनी बिहारी ने कहा कि नोटबंदी के समय में लोग संभालकर पैसों का इस्तेमाल करेंगे, ऐसे में वह दान के लिए पैसी नहीं देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि नोटबंदी की घोषणा किए जाने के बाद से मंदिर में हर साल एक महीने के लिए होने वाले निम्बार्क जयंती महोत्सव को भी रद्द करना पड़ा।

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First Published on November 27, 2016 2:08 pm

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