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गोरखालैंड आंदोलन: भूटान सीमा पर पुलिस और गोरखालैंड समर्थकों के बीच झड़प

केंद्र सरकार पर 'मूक दर्शक' बने रहने का आरोप लगाते हुए जीजेएम नेतृत्व ने शनिवार को चेतावनी दी थी कि अगर 10 दिन में कोई हल नहीं निकाला गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे तथा देश के मैदानी हिस्सों में भी आंदोलन को विस्तार देंगे।
Author July 30, 2017 20:04 pm
संघर्ष में कुछ पुलिसकर्मी और जीजेएम कार्यकर्ता जख्मी हो गए। जीजेएम समर्थकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल के अलिपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के नजदीक रविवार को अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कर रहे कार्यकर्ता और पुलिस के बीच झड़प हो गई। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) नेतृत्व के अनुसार, गोरखालैंड आंदोलन के समर्थन में पूरी दुनिया में रविवार को गोरखा समुदाय द्वारा मनाए जा रहे ‘ग्लोबल रैली फॉर गोरखालैंड’ के तहत जयगांव में निकाली गई रैली को पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद गोरखालैंड कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई।

जीजेएम के सहायक महासचिव बिनय तमांग ने बताया, “हमारे कार्यकर्ताओं को ‘ग्लोबल रैली फॉर गोरखालैंड’ दिवस पर जयगांव में रैली निकालने से रोक दिया गया। अब हमें प्रशासन दबा नहीं पाएगी। पूरी दुनिया के गोरखा हमारे साथ हैं।”

उन्होंने कहा, “गोरखालैंड आंदोलन के समर्थन में पूरे दिन ग्लोबल रैली फॉर गोरखालैंड मनाया गया। इंग्लैंड सहित यूरोप के विभिन्न हिस्सों में, आस्ट्रेलिया, थाईलैंड और भारत के करीब सभी बड़े शहरों में रैलियां निकाली गईं।”

केंद्र सरकार पर ‘मूक दर्शक’ बने रहने का आरोप लगाते हुए जीजेएम नेतृत्व ने शनिवार को चेतावनी दी थी कि अगर 10 दिन में कोई हल नहीं निकाला गया तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे तथा देश के मैदानी हिस्सों में भी आंदोलन को विस्तार देंगे।

तमांग ने कहा, “हमने केंद्र सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने के लिए 10 दिन की मोहलत देने का फैसला किया है। अगर वे इसके बाद भी मूकदर्शक बने रहे तो आठ अगस्त के बाद हम फिर से अपना आंदोलन तेज करेंगे और इसे तराई और दुआर इलाकों में भी ले जाएंगे।”

जीजेएम ने दावा किया कि पुलिस की गोलीबारी में अजय छेत्री जख्मी हो गए। उसके इस दावे को एडीजी ने खारिज करते हुए इसे पूरी तरह आधारहीन करार दिया। राज्य के मुद्दे पर 15 जून को शुरू हुआ बंद अब भी जारी है जो अब तक का सबसे बड़ा बंद है। दार्जिलिंग में 1988 में गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट की अपील पर 40 दिन बंद हुआ था और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने 2013 में 44 दिन बंद कराया था।

दार्जिलिंग जिला प्रशासन के मुताबिक गोरखालैंड समर्थकों ने चाकू, तलवार और परंपरागत खुखरी के साथ जबरन सिलिगुड़ी में घुसने का प्रयास किया और मांग की कि उनकी मांग के मुताबिक इसे गोरखालैंड राज्य में शामिल किया जाए। सुकना चौराहे के पास पुलिस ने सड़क को जाम कर रखा था और प्रदर्शनकारियों से लौट जाने को कहा लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पहले दो बैरीकेड तोड़ डाले और उन पर पत्थर फेंके।

पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए पानी के फव्वारे छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और पास में खड़े कुछ वाहनों में आग लगा दी। संघर्ष में कुछ पुलिसकर्मी और जीजेएम कार्यकर्ता जख्मी हो गए। जीजेएम समर्थकों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गोरखालैंड समर्थकों ने सुकना-सिलिगुड़ी मार्ग पर धरना दिया और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल वहां पहुंचे।

जीजेएम नेतृत्व ने दावा किया कि पुलिस ने गोलीबारी की। जीजेएम के एक नेता ने बताया, ‘‘हमारे समर्थक अजय छेत्री पुलिस गोलीबारी में जख्मी हो गए। क्या यह लोकतंत्र है जहां किसी को लोकतांत्रिक रैली करने की अनुमति नहीं है?’’ एडीजी (कानून-व्यवस्था)अनुज शर्मा ने कहा कि दावा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा, ‘‘एक भी गोली नहीं चली।’’

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