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50 साल पुरानी चिंगारी को हवा देगा गोविंदाचार्य का संगठन, 1966 में पुलिस फायरिंग में मारे गए गौरक्षकों की याद में मनाएगा स्मृति दिवस

7 नवंबर 1966 को नागा साधुओं और हिंदु धर्म के नेताओं के नेतृत्व में हजारों लोगों ने गौ हत्या को बैन करने के लिए संसद तक मार्च किया था।
Author नई दिल्ली | August 10, 2016 13:28 pm
गौ रक्षकों को लेकर दिए गए पीएम मोदी के बयान के बाद विरोध करते हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता ( Express Photo)

करीब आधी सदी पहले शांत हुए अंगारों को फिर से जगाने की कोशिश हो रही है। दिल्ली बेस्ड एक गौ रक्षा संगठन 1966 के गौ हत्या आंदोलन में मारे गए लोगों की याद में स्मृति दिवस मनाने की योजना बना रहा है। 7 नवंबर 1966 को नागा साधुओं और हिंदु धर्म के नेताओं के नेतृत्व में हजारों लोगों ने गौ हत्या को बैन करने के लिए संसद तक मार्च किया था। इस आंदोलन में पुलिस फायरिंग में 7 लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हो गए थे। इस मामले को करीब 50 साल भूलने के बाद अब फिर 'गौरक्षा आंदोलन’ नाम का संगठन इसेे लेकर एक 7 नवंबर को एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस संगठन के फाउंडर पूर्व बीजेपी महासचिव के एन गोंविदाचार्य है।

के एन गोविंदाचार्य के ईटी से बातचीत में कहा कि पुलिस फायरिंग में 200 लोग मारे गए थे और यह घटना साधुओं केे जहन में आज भी है। उन्होंनेे कहा कि ये एक नॉन कॉन्फ्रेंटेशनल प्रोग्राम है, जो मारे गए लोगों के सम्मान में और गौ सेवा को बनाए रखने के लिए है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से संत और गौ सेवक शामिल होंगे। पीएम मोदी की ओर से गौ रक्षकों पर की गई टिप्पणी पर गोविंदाचार्य ने कहा कि वह इस बारे में नहीं सोचते हैं। उन्होंने कहा कि मृत गायों की खाल निकालने के मुद्दे पर वह महात्मा गांधी के साथ है। गांधी जी ने कहा था कि गौशाला बिना चर्मालय (स्कीन शॉप) के अधूरा है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्कीनिंग और लेदर वर्क एक जरुरी बिजनेस है।

हालांकि गौरक्षा आंदोलन के संयोजक सुरेद्र सिंह बिष्ट ने पीएम मोदी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए मोदी सरकार से फर्जी गौरक्षों की सूची बनाने के लिए परेशान न होने का अनुरोध किया है। बता दें कि पीएम मोदी ने टॉउन हाल मीटिंग में गौरक्षों पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि इस प्रोग्रम में सच्चे गौ पूजा करने वाले 7 नवंबर को दिल्ली आएंगे। बिष्ट ने बताया कि इस प्रोग्राम में शंकराचार्य, समेत अन्य साधु और कुछ गौ रक्षा संगठन भी शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि आर्ट्स ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर से हम बात कर रहे हैं, बाबा रामदेव को भी आने के लिए कहा जाएगा।

आरएसएस से इस संबंध में बात करने पर बिष्ट ने बताया कि हम लोग कानुपर में हुई संघ प्रचारक मीटिंग में प्रस्ताव लेकर गए थे, वह हमारे चार्टर से सहमत है लेकिन वह इसमें हिस्सा नहीं लेंगे। वहीं आरएसएस के प्रचार विभाग के डिप्टी चीफ जे नंनद कुमार ने ईटी से कहा कि आधिकारिक तौर पर ऐसा कोई भी प्रस्ताव कानपुर मीटिंग में नहीं रखा गया था, मैं पहली बार आपसे इस बारे में सुन रहा हूं।

बिष्ट ने बताया कि हमारे चार्टर में गौ संरक्षण को लेकर कुल 21 प्वाइंट है, जिसमें गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध, गौ हत्या के बराबर गाय के साथ होने वाली बर्बरता, भैस समेत बीफ एक्सपोर्ट पर पूर्ण प्रतिबंध और राज्य और केंद्रीय स्तर पर गौ कल्याण के लिए मंत्रियों का एक  संगठन बनाया जाए जैसी मांगें शामिल हैं।

 

 

 

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