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साईबाबा के समर्थन में संघ, कहा- हर मानव में है ईश्वर, इसलिए साईंबाबा में भी हैं

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने मंगलवार (25 अक्टूबर) दलील दी कि हिंदू दर्शन कहता है कि हर मानव में भगवान है इसलिए साईंबाबा में भी है।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कार्यकर्ता। (फाइल फोटो)

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के साईं बाबा की पूजा करने का विरोध करने पर विवाद छिड़ने के बाद, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने मंगलवार (25 अक्टूबर) दलील दी कि हिंदू दर्शन कहता है कि हर मानव में भगवान है इसलिए साईंबाबा में भी है। आरएसएस के अखिल भारतीय महासचिव भैयाजी जोशी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘हमें नहीं लगता कि, क्या साईं बाबा की पूजा की जानी चाहिए ? कोई वाद-विवाद होना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा है कि हम मानते हैं कि हर मानव में भगवान है और साईं बाबा में भी भगवान हैं। हर प्राणी में ईश्वर अंश है और हम हमेशा से यह कहते रहे हैं । यह हिंदू दर्शन है।’आरएसएस की तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी परिषद बैठक के अंतिम दिन उन्होंने कहा, ‘इसलिए प्राणीमात्र में ईश्वर और साईं बाबाजी ईश्वर।’जोशी ने कहा, ‘यह उनके (साईं बाबा के) श्रद्धालुओं पर है कि वह आस्था रखें और शिरडी के 19 वीं सदी के संत साईं बाबा की भगवान के तौर पर पूजा करें और साईं बाबा के नाम पर मंदिर बनाएं । और हमें नहीं लगता कि इस पर कोई बहस है।’

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गौरतलब है कि द्वारिका-शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती शिरडी के साईं बाबा की पूजा-अर्चना के खिलाफ रहते हैं। उन्होंने कई बार साईं के खिलाफ बयान दिए हैं। महाराष्ट्र के कई गांवों में सूखे की समस्या के लिए स्वरूपानंद ने साईं पूजा को जिम्मेदार बताया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र के लोग साईं बाबा की पूजा करते हैं, यह सूखा उसी की देन है। हरिद्वार की यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि साईं एक फकीर थे और एक भगवान के तौर पर उनकी पूजा करना अशुभ है। उन्होंने कहा कि जहां भक्‍त अयोग्य लोगों की पूजा करते हैं। ऐसे जगहों पर सूखे, प्राकृतिक आपदाओं और लोगों की मौत होती हैं। महाराष्ट्र भी उनमें से एक है। 2014 में उन्होंने साईं पूजा का विरोध करने के लिए एक धर्म संसद का भी आयोजन किया था, जहां सर्वसम्मति के साईं पूजा का बहिष्कार करने का ऐलान किया गया।

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