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महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर फिर ताजा हो गई ‘एक हत्यारे की कहानी’

पिछले कुछ समय से गांधी बरक्स गोडसे का सुलग रहा विवाद महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर फिर से ताजा हो गया है। और इस बार विवाद उठा है गोवा में।
Author पणजी | January 30, 2016 05:14 am
गांधी जी के हत्यारे गोडसे पर आधारित किताब

पिछले कुछ समय से गांधी बरक्स गोडसे का सुलग रहा विवाद महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर फिर से ताजा हो गया है। और इस बार विवाद उठा है गोवा में। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी के ही दिन उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे पर आधारित पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम का नवगठित गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने विरोध किया है।
अनूप अशोक सरदेसाई की ‘नाथूराम गोडसे-एक हत्यारे की कहानी’ नामक पुस्तक का विमोचन 30 जनवरी को होना तय है। यह कार्यक्रम मडगांव स्थित सरकारी रवींद्र भवन में रखा गया है और पुस्तक का विमोचन भाजपा के नेता और भवन के अध्यक्ष दामोदर नाईक को करना है।
गोवा फॉरवर्ड के सचिव मोहनदास लोलाइनकर ने शुक्रवार को बताया, ‘सरकारी परिसर का इस्तेमाल ऐसे देशद्रोही काम के लिए किए जाने पर रोक लगाई जानी चाहिए। अगर सरकार इस समारोह को होने देती है तो हम रवींद्र भवन के सामने सत्याग्रह करेंगे।’ उन्होंने दावा किया कि इस विरोध को निर्दलीय विधायक विजय सरदेसाई समेत विभिन्न तबकों का समर्थन है।
लोलाइनकर ने कहा, ‘पार्टी के कार्यकर्ता आयोजन स्थल के प्रवेश द्वारों को अवरुद्ध करेंगे ताकि कोई इस समारोह में शामिल न हो पाए’। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होगा। पार्टी ने समारोह को रद्द करने का अनुरोध करते हुए दक्षिण गोवा जिला कलक्टर के पास एक ज्ञापन भी जमा करवाया है।
फतोरदा से विधायक विजय सरदेसाई ने कहा, ‘हालांकि यह आयोजन हानिरहित है लेकिन इसका समय महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को रखा गया है’। इस आयोजन को ‘हत्या का अप्रत्यक्ष जश्न’ बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक विमोचन का यह आयोजन दरअसल महात्मा गांधी की स्मृति का अपमान करके, खासतौर पर इस दिन विशेष पर शांति एवं सद््भाव बिगाड़ने के लिए और लोगों को भड़काने के लिए है।

रवींद्र भवन के अधिकारियों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वे समारोह को रोक नहीं सकते। रवींद्र भवन के अध्यक्ष दामोदर नाईक ने कहा, ‘रवींद्र भवन को सामान्य प्रक्रिया के तहत बुक कराया गया था। कुछ भी जानबूझकर नहीं है’। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि यदि समारोह में उनकी शिरकत पर आपत्ति होती है तो वे इस पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

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  1. R
    ritesh
    Jan 30, 2016 at 5:59 am
    इतिहास में बोहत कुछ गलत हुआ था , देश के बिभाजन के बाद भारत से मुस्लिम को पूरी तरह से पाकिस्तान भेजना चाहिय था , दो लोगों ( गांधी और नेहरू ) का फैसला सारे देश की आवाज़ नही हो सकती !! उस समय जनमत संग्रह करना चाहीय था I जब घर में ही बंटवारा होता है तो सब की राय ली जाती है , तो उस समय भारत के बहुमत की राय किउन नही ली गई ???
    Reply
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