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किसान गजेंद्र की मौत पर लोस में एकजुट विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

दिल्ली में बुधवार को आप की एक रैली के दौरान एक किसान की आत्महत्या के विषय पर गुरुवार को लोकसभा में एकजुट विपक्ष ने इस मामले में दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते...
कांग्रेस के अमरिन्दर सिंह ने आरोप लगाया कि बस चालकों द्वारा की गयी सड़क दुर्घटनाओं में दस लोग मारे गए हैं लेकिन बस वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी।

दिल्ली में बुधवार को आप की एक रैली के दौरान एक किसान की आत्महत्या के विषय पर गुरुवार को लोकसभा में एकजुट विपक्ष ने इस मामले में दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए केंद्र को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया और सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर निशाना साधा। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने और किसके शासनकाल में क्या हुआ जैसी बातों को छोड़कर सभी को मिलकर आगे इसका समाधान निकालने की जरूरत है।

लोकसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए राकांपा के तारिक अनवर ने कहा कि जिस किसान ने बुधवार को आप की रैली में जान दी, वह भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ विरोध करने आया था। आप इस अध्यादेश को वापस लें। यह किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने के समान है। भाजपा सदस्यों ने अनवर की इस टिप्पणी का जबर्दस्त विरोध किया। सदन में कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा, बीजद के भर्तृहरि महताब, शिवसेना के अरविंद सावंत ने उन पत्रकारों की कड़ी आलोचना की जिन्होंने उस किसान को बचाने का प्रयास करने के बजाय उसके चित्र उतारना ज्यादा जरूरी समझा।

कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि देश की राजधानी में बुधवार को दिल दहलाने वाली घटना हुई है और यह आत्मा को झकझोर देने वाली है। इस बारे में बहुत से लोगों को आत्ममंथन करने की जरूरत है। पुलिस वाले आगे क्यों नहीं आए? मंच पर नेता भाषण क्यों देते रहे और आत्महत्या के बाद भी यह सिललिसा जारी क्यों रहा। यह असंवेदनशीलता का उदाहरण है। वहां मौजूद मीडिया ने भी उस दृश्य को कैमरे में कैद करना जरूरी समझा लेकिन उसे बचाना नहीं।

भाजपा के किरीट सोमैया ने कहा कि एक किसान गजेंद्र सिंह ने बलिदान दिया, हममें से कोई उसे बचा नहीं पाया और इस विषय पर क्या हम बार-बार राजनीति करेंगे। सोमैया ने कहा कि यह देश 1947 में आजाद हुआ, देश को आजाद हुए 68 साल हो गए। क्या कारण है कि आज भी किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। इस समस्या का मिलकर निदान निकालने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसके शासनकाल में क्या हुआ और 10 दिन, 10 महीने या 55 साल में क्या हुआ। इसे छोड़कर आगे इसका समाधान कैसे निकाला जाएगा, इस बारे में मिलकर विचार करने की जरूरत है। नेता, पत्रकार, मीडिया लाचार हो सकती है लेकिन यह देश लाचार नहीं हो सकता।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि बुधवार की रैली की घटना पर वे गहरा क्षोभ और आक्रोश प्रकट करते हैं जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में काफी संख्या में लोगों के बीच एक किसान ने आत्महत्या की। एक घंटे तक वह व्यक्ति पेड़ पर रहा, वहां पर नेता, पुलिस और पत्रकार सभी मौजूद थे। लेकिन किसी ने उसे पेड़ से नीचे उतरने के लिए राजी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि यह आप की रैली थी, इस दौरान एक किसान ने आत्महत्या की लेकिन भाषण जारी रहा। यह असंवेदनशीलता है। इस मामले में न्यायिक जांच कराने जाने की जरूरत है।

माकपा के एमबी राजेश ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों में कहा गया है कि प्रत्येक 30 मिनट में एक किसान आत्महत्या कर रहा है। नव उदारवादी नीति अपनाए जाने के बाद पिछले 25 वर्षों से यह सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को ट्विटर से निकल कर जमीनी हकीकत को देखना चाहिए।

बीजद के भर्तृहरि महताब ने कहा कि एक किसान इतने लोगों के बीच आत्महत्या कर लेता है और कोई उसे बचाने आगे नहीं आता है। कोई समाज इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है? ऐसे में यह देखने की जरूरत है कि सरकार किस तरह से व्यवहार करती है, समाज कैसे व्यवहार करता है।

शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में एक जघन्य घटना सामने आई और वहां जनता संवेदनहीन बनी रही। पुलिस, मीडिया, नेता उस घटना को देखते रहे। उन्होंने कहा कि इस बारे में गंभीरता से चर्चा की जरूरत है क्योंकि किसान परेशान है और महाराष्ट्र में तो बड़े पैमाने पर किसानों ने आत्महत्या की है। इस विषय का समग्र समाधान निकाले जाने की जरूरत है।

सपा के मुलायम सिंह यादव ने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि उत्तर प्रदेश में भी कभी कोई किसान आत्महत्या करेगा। लेकिन इस बार तीन किसानों ने आत्महत्या की। प्रदेश सरकार ने 1650 करोड़ रुपए के ऋण माफी और निशुल्क सिंचाई का प्रावधान किया। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष और विपक्ष को मिलकर इस विषय पर ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है ताकि कोई किसान आत्महत्या नहीं करे। किसानों को उसके उत्पादों का लाभकारी मूल्य देने की जरूरत है।

वाइएसआर कांग्रेस के राजमोहन रेड्डी ने कहा कि यह विडंबना है कि दूसरों के लिए अन्न पैदा करने वाला किसान अपने बच्चों का पेट नहीं भर पा रहा है। इस बात को गंभीरता से लेने की जरूरत है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अरुण कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में एक किसान ने आत्महत्या की और लोग देखते रहे। इस विषय पर जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है। आप के भगवंत मान ने कहा कि किसान की आत्महत्या का मामला अत्यंत दुखद है लेकिन वह व्यवस्था से दुखी था। इस विषय पर राजनीति न की जाए। कांग्रेस के राजीव सातव ने इस मामले में दिल्ली पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया।

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